नीरज खुद सेना में राजपूताना राइफल्स में हैं सूबेदार खेलपथ संवाद पानीपत। जनवरी 1761, इतिहास के पन्नों में दर्ज पानीपत की तीसरी लड़ाई की गाथा। वीर मराठों ने हिंदुस्तान को गुलामी से बचाने के लिए पानीपत के मैदान पर अपना लहू बहाया। जंग नहीं जीत सके, पर अब्दाली भी दोबारा लौटकर नहीं आया। उन्हीं मराठा वंशज से खुद को जोड़ने वाले रोड़ समाज के नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलम्पिक में योद्धा की तरह भाले की नोक पर देश को स्वर्ण पदक जिता दिया। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री .......
मणिपुर के सीएम ने कहा- अगर पीएम मोदी ने नहीं की होती मदद तो चानू नहीं जीत पाती पदक खेलपथ संवाद इंफाल। भारतीय महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलम्पिक के दूसरे ही दिन रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। उन्होंने देश को पहला मेडल दिलाया था। चानू ने 49 किलोग्राम वर्ग में कुल 202 किलोग्राम (87 किग्रा + 115 किग्रा) भार उठाकर सिल्वर मेडल पर कब्जा किया था। इस ऐतिहासिक जीत के बाद चानू की खूब तारीफ हुई। राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक स.......
कोच पार्क ताइ सैंग भी खुश टोक्यो। टोक्यो ओलम्पिक में बैडमिंटन की महिला एकल स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली भारत की स्टार शटलर वीपी सिंधू ने बयान दिया है। उनका कहना है कि फाइनल पॉइंट जीतने के बाद उनका दिमाग सचमुच ब्लैंक था। उनके मुताबिक, अंतिम समय में मैंने जो उपलब्धि हासिल की उसका कुछ क्षण तक मैंने अनुभव किया। सिंधू ओलम्पिक में बैडमिंटन स्पर्धा में लगातार दूसरा पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। पीवी सिंध.......
पुणे। दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी नंदू नाटेकर का बुधवार को निधन हो गया। वह 1956 में अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी थे। नाटेकर 88 बरस के थे। अपने करियर में 100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतने वाले नाटेकर उम्र संबंधित बीमारियों से पीड़ित थे। उनके परिवार में बेटा गौरव और दो बेटियां हैं। गौरव ने बताया, ‘‘उनका घर में निधन हुआ और हम सभी उनके साथ थे। वह पिछले तीन महीने से बीमार थे।''.......
फोन कर दी भारतीय बिटिया को बधाई मीरा को जिंदगी भर नहीं भूलेगा पीएम का फोन, विश्वास नहीं हुआ था नई दिल्ली। टोक्यो ओलम्पिक से रजत पदक जीतने के बाद भारत लौटने पर दीवानेपन की हद तक मिल रहे प्यार और स्वागत समारोहों से मीराबाई चानू न तो परेशान और न हैरान हैं। हां, एक बात पर उन्हें अब तक विश्वास नहीं हो रहा है। पदक जीतने के बाद टोक्यो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सीधे उनके मोबाइल पर फोन आना मीरा के जीवन के सर्वश्रेष्ठ लम्हों में से एक ब.......
टोक्यो पर मुक्केबाज का आकलन नई दिल्ली। ओलम्पिक खेल अभी तक हमारे लिए मिले-जुले रहे। मीराबाई चानू के भारोत्तोलन में जीते गए रजत पदक ने पूरे देश को जश्न मनाने का मौका दिया। अन्य कई खेलों में निराशा भी हाथ लगी, लेकिन फिर हमने भारतीय हाकी टीम को आस्ट्रेलिया से मिली शिकस्त से वापसी करते हुए अपनी दूसरी जीत दर्ज करते भी देखा। जिस तरह लवलीना ने मंगलवार को जर्मनी की नेदिन एपेट्ज के खिलाफ 3-2 से जीत दर्ज की, उससे भी मैं काफी प्रभावित हुआ। .......
टोक्यो में मीरा करेगी कमाल खेलपथ संवाद नई दिल्ली। पहली कोई भी चीज हो वो बहुत खास होती है, फिर यह तो ओलम्पिक का पहला पदक था। मेरा ही नहीं देश की किसी महिला खिलाड़ी का भी। यह मेरे लिए तो खास है ही देश के लिए भी। सिडनी ओलम्पिक ( 2000) के बाद भारतीय महिलाएं ओलम्पिक में पदक के बारे में सोचने लगीं। इससे पहले कोई भी भारतीय महिला पदक के बारे में नहीं सोचती थी। सिडनी के बाद बेटियों ने न सिर्फ ओलम्पिक में शानदार प्रदर्शन किया बल्क.......
बनना चाहती थी एथलीट, डिंको को देख बन गई बॉक्सर खेलपथ संवाद नई दिल्ली। कभी चाह थी एथलीट बनने की, लेकिन ये तो मैरीकॉम को भी नहीं पता था कि उनका साथ बॉक्सिंग के साथ ऐसा जुड़ेगा कि वो भारत की शान बन जाएंगी। मणिपुर के एक छोटे से गांव में 24 नवंबर, 1982 को मैरीकॉम का जन्म हुआ। असुविधा, गरीबी, समाज की बंदिशों से मैरीकॉम दो-चार हुईं, लेकिन लगन इतनी थी, कि ये सारी बातें पीछे रह गईं और सफलता कदम चूमने लगी। मैरीकॉम का झुकाव एथलेटिक.......
दिग्गज शूटर की कलम से नई दिल्ली। आखिरकार टोक्यो ओलम्पिक की शुरुआत होने जा रही है। ये अपने साथ मेरी अपनी यात्रा की ढेर सारी यादें ले आया है। 2004 में जब मैं एथेंस गया तो मेरे लिए सब कुछ नया और किसी परीकथा जैसा था। चार साल बाद बीजिंग में मेरा दिल उस समय टूट गया, जब एयर राइफल फाइनल में जगह बनाने से मैं सिर्फ एक प्वाइंट से चूक गया। लंदन 2012 में इसकी कुछ भरपाई हुई और मैंने कांस्य पदक जीता। 2016 की कहानी तो बिल्कुल ही अलग रही। एक प्रशंसक .......
दिग्गज मुक्केबाज ने साक्षात्कार में किया खुलासा नई दिल्ली। सच कहूं तो मैं टोक्यो में स्वर्ण पदक जीतकर मुक्केबाजी को अलविदा कहना चाहती हूं। मैं सोचती हूं कि इसके बिना सारी उपलब्धि कम हैं। छह बार की विश्व चैंपियन और लंदन ओलम्पिक 2012 में कांस्य पदक जीतने वाली भारत की स्टार मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम इस बार हर हाल में स्वर्ण पदक जीतना चाहती हैं। मैरीकॉम का मानना है कि उन्होंने अपने जीवन में सब कुछ हासिल किया, लेकिन बस एक सपना ओलम्पिक का स्वर्ण पदक.......