चम्बल की ऊर्जावान माटी, बन सकती एथलीटों की थाती
दो नायाब खेल सितारे ओमप्रकाश सिंह तोमर और विजय सिंह बढ़ा रहे मान
एक का प्रशिक्षण तो दूसरे का एथलेटिक्स ट्रैक पर खेलप्रेमी देख रहे जलवा
श्रीप्रकाश शुक्ला
मुरैना। चम्बल की धूल में फूल खिल सकते हैं, क्योंकि यहां की माटी बहुत ऊर्जावान है। हम आपको कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं बल्कि खेल दुनिया का सबसे दिलचस्प फलसफा बता रहे हैं। 1950 और 1960 के दशक में पान सिंह तोमर तो इक्कीसवीं सदी की शुरुआत में ओमप्रकाश सिंह तोमर और अब होनहार विजय सिंह का जलवा देश देख चुका और देख रहा है। राष्ट्रसेवा यहां पैदा होते जन-मन का मूलमंत्र है। युवाओं की सेना में जाने की धुन ही उन्हें बड़ा खिलाड़ी बना रही है।
मुरैना जिले ने हर समयकाल में बेजोड़ एथलीट दिए हैं। कालजयी पान सिंह तोमर ने बाधा दौड़ में जहां सात बार राष्ट्रीय खिताब जीता वहीं 1958 के एशियन गेम्स में भी हिस्सा लिया था। सेना से सेवानिवृत्ति लेने के बाद परिस्थितियां ऐसी बनीं कि वह चम्बल में डकैतों के गिरोह का प्रमुख बन गए, उनका करुणांत खेल इतिहास का सबसे दुखद उदाहरण है। गरीबी, संघर्ष और खेल के जरिए जिन्दगी बदलने का रिवाज ही मुरैना को विशिष्ट बनाता है। इस जिले से ही ओमप्रकाश सिंह तोमर जैसा जांबाज निकला है।
पोरसा तहसील के इस जाने-माने अंतरराष्ट्रीय एथलीट ने पान सिंह की ही तरह एथलेटिक्स की स्टीपलचेज (बाधा दौड़) स्पर्धा में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। 2006 में कोलम्बो (श्रीलंका) में आयोजित दक्षिण एशियाई खेलों की स्टीपलचेज स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर समूचे मध्य प्रदेश का गौरव बढ़ाया था। ओपी सिंह राष्ट्रीय स्तर की कई एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में भाग लेकर मध्य प्रदेश और चम्बल क्षेत्र का गौरव बढ़ा चुके हैं, लेकिन सरकार ने उनकी उपलब्धियों पर कतई ध्यान नहीं दिया।
वर्ल्ड एथलेटिक्स के आधिकारिक रिकॉर्ड पर नजर डालें तो ओमप्रकाश सिंह तोमर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में 3000 मीटर स्टीपलचेज, 3000 मीटर दौड़ और 10 किलोमीटर रोड रेस स्पर्धाओं में दर्जनों मेडल जीत चुके हैं। वह पोरसा और चम्बल क्षेत्र के स्थानीय युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करने के लिए भी लगातार सक्रिय रहते हैं। उन्होंने पोरसा में बेहतर खेल मैदान और आधुनिक खेल सुविधाएं विकसित करने के लिए जिला प्रशासन और सरकार से कई बार मांग उठाई है, ताकि क्षेत्र के अन्य युवा भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीत का परचम लहरा सकें।
ओमप्रकाश सिंह तोमर अच्छे प्रशिक्षक भी हैं। इस समय श्री तोमर भुनेश्वर में उड़ीसा सरकार की एथलेटिक्स एकेडमी में युवाओं का कौशल निखार रहे हैं। उनके छोटे भाई कुलदीप सिंह तोमर भी अच्छे धावक हैं, जो मध्यम दूरी की दौड़ में हिस्सा लेते हैं। ओमप्रकाश सिंह तोमर अब अपना अक्स अपनी बेटी अनन्या तोमर में देखते हैं। अनन्या उदीयमान एथलीट है, जोकि अपने पिता के ही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण में आगे बढ़ रही है।
मुरैना की इसी एथलेटिक्स सफलता में एक नया नाम विजय सिंह का है। चम्बल की माटी ने अब मध्यम दूरी (5000 मीटर) का धावक दिया है, जिसकी कहानी संघर्ष से सफलता तक पहुंचने की मिसाल है। होनहार विनोद सिंह ने रांची में एथलेटिक्स फेडरेशन कप 2026 की 5000 मीटर दौड़ में रजत पदक अपने नाम किया था। पान सिंह की तरह विनोद की खेल-यात्रा भी बेहतर भोजन और पहचान पाने की एक व्यावहारिक जरूरत से शुरू हुई।
पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे विनोद सिंह भारतीय नौसेना में कार्यरत हैं। एक छोटे किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले विजय के पिता के पास दो से ढाई बीघा जमीन ही है। परिवार का पालन पोषण करने के लिए उन्हें दूसरों के खेतों में भी काम करना पड़ता है। विनोद का लक्ष्य सेना में भर्ती होना था, इसी वजह से वह प्रतिदिन दौड़ने जाते थे। दो साल पहले उन्होंने अपने ट्रैक बदलते हुए मध्य प्रदेश एथलेटिक्स एकेडमी में प्रवेश लिया जहां अनुशासित प्रशिक्षण और संतुलित आहार ने उनकी जिन्दगी की दिशा बदल दी।
विनोद बताते हैं कि एकेडमी से जुड़ने के बाद मेरी जिन्दगी पूरी तरह बदल गई। वहां बेहतर डाइट और खेल पर पूरा ध्यान देने का मौका मिला, जिससे मुझे कई बड़ी सफलताएं मिलीं। लोग मेरी यात्रा की तुलना पान सिंह तोमर से करते हैं, क्योंकि मैंने खेलों में उसी मकसद के साथ कदम रखा था जो पान सिंह का था। एथलेटिक्स ने मुझे बेहतर भोजन, फोकस और भविष्य दिया। विनोद अपनी सफलता का श्रेय मध्य प्रदेश अकादमी के कोचों की अनुशासित ट्रेनिंग को देते हैं। कोच संदीप सिंह कहते हैं कि विनोद अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पूरी तरह समर्पित है। भविष्य में उससे और उपलब्धियों की उम्मीद है।
मुरैना प्रतिभाओं की खान नहीं हैं सुविधाएं और खेल सामान
कहने को मध्य प्रदेश सरकार खेलों को बढ़ावा दे रही है। लेकिन धरातल पर खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। खेल मैदान और सुविधाएं न होने के बाद भी कुछ बच्चे राष्ट्रीय स्तर पर मुरैना का नाम रोशन कर रहे हैं। पोरसा नगर पालिका की स्थापना साल 1982 में हुई थी। अब तक नगर पालिका में कई सीएमओ व अध्यक्ष बदल चुके लेकिन किसी ने खेलों के उत्थान की पहल नहीं की। आज यहां की प्रतिभाएं खेल मैदान के लिए तरस रही हैं। यहां की कई खेल प्रतिभाएं नेशनल-इंटरनेशनल स्तर पर खेल चुकी हैं, इनमें ओमप्रकाश सिंह तोमर, कुलदीप सिंह तोमर, कुश्ती में राम शर्मा, भवानी सिंह तोमर, शिवभान सिंह तोमर, वालीबाल में हितेश सिंह तोमर, धर्मेन्द्र सिंह, रवी सिंह तोमर आदि शामिल हैं।
