पोलवाल्टर देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार की फिर अनदेखी
देश के लिए रिकॉर्ड बनाया फिर ई-रिक्शा पर पोल ढोते दिखे स्टार्स
खेलपथ संवाद
नई दिल्ली। हमारी हुकूमतें खेलों के विकास का जो सपना दिखाती हैं, वो निरा झूठा है। हमारे देश में खेलों का स्याह सच जानने और उसमें सुधार करने वाला एक भी खेल मंत्री आजादी के बाद पैदा नहीं हुआ, जबकि केन्द्र और राज्य सरकारों का खेल बजट अब अरबों रुपये में पहुंच चुका है। पोलवाल्टर देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार के साथ रांची में जो हुआ उसे अच्छा नहीं कह सकते।
भारतीय एथलेटिक्स के लिए रविवार का दिन ऐतिहासिक रहा। देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार ने रांची में आयोजित फेडरेशन कप 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष पोल वॉल्ट में संयुक्त राष्ट्रीय रिकॉर्ड बना दिया। दोनों खिलाड़ियों ने 5.45 मीटर की ऊंचाई पार कर भारतीय एथलेटिक्स इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया, लेकिन इस ऐतिहासिक उपलब्धि के कुछ ही घंटों बाद सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो ने खेल जगत को झकझोर दिया। राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने वाले यही खिलाड़ी अपने पांच मीटर लम्बे पोल ई-रिक्शा में लादकर खुद ले जाते दिखाई दिए।
वीडियो में दोनों एथलीट एक छोटे से ई-रिक्शा में तंग जगह पर बैठे नजर आए, जबकि उनके लम्बे फाइबरग्लास पोल बाहर तक निकले हुए थे। सोशल मीडिया पर यह दृश्य तेजी से वायरल हो गया और लोगों ने भारतीय खेल व्यवस्था पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। पोल वॉल्ट ऐसा खेल है जिसमें इस्तेमाल होने वाले उपकरण बेहद महंगे, भारी और संवेदनशील होते हैं। इसके बावजूद देश के शीर्ष खिलाड़ियों को अपना सामान खुद ढोना पड़ा। कई लोगों ने इसे खिलाड़ियों के सम्मान और सुविधाओं की बड़ी कमी बताया।
यह पहली बार नहीं है जब देव और कुलदीप को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा हो। इसी साल दोनों खिलाड़ी ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी चैम्पियनशिप से लौटते समय ट्रेन में भी परेशानी झेल चुके हैं। पनवेल स्टेशन पर टिकट चेकर ने उन्हें पोल के साथ यात्रा करने की अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद दोनों खिलाड़ियों को ट्रेन से नीचे उतरना पड़ा और करीब पांच घंटे तक स्टेशन पर इंतजार करना पड़ा। उस समय देव मीणा ने भावुक वीडियो जारी कर सवाल उठाया था कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी इस तरह परेशान किए जा सकते हैं तो जूनियर खिलाड़ियों की स्थिति कैसी होगी।
रांची में हुआ पुरुष पोल वॉल्ट फाइनल भारतीय एथलेटिक्स के सबसे रोमांचक मुकाबलों में से एक माना जा रहा है। मुकाबले के दौरान राष्ट्रीय रिकॉर्ड एक ही शाम में दो बार टूटा। कुलदीप कुमार इससे पहले 5.41 मीटर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ मैदान में उतरे थे, जो उन्होंने इसी महीने भुवनेश्वर में बनाया था। लेकिन रांची में देव मीणा ने पहले 5.42 मीटर की छलांग लगाकर नया रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद कुलदीप ने 5.45 मीटर पार कर जवाब दिया। माहौल तब और रोमांचक हो गया जब देव मीणा ने भी 5.45 मीटर की छलांग पूरी कर ली। कम असफल प्रयासों की वजह से देव को स्वर्ण पदक मिला, लेकिन दोनों संयुक्त राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक बन गए। दोनों खिलाड़ियों ने इसके बाद 5.50 मीटर की चुनौती भी लेने की कोशिश की।
दोनों एथलीट आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए तय 5.25 मीटर के क्वालिफिकेशन मार्क को पहले ही पार कर चुके हैं। ऐसे में उनसे भविष्य में और बड़े प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। लेकिन यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने के लिए सिर्फ खिलाड़ियों की मेहनत काफी नहीं होती। उन्हें बेहतर सुविधाएं, सम्मान और बुनियादी समर्थन भी चाहिए। भारत के खिलाड़ी लगातार रिकॉर्ड बना रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या देश की खेल व्यवस्था उनके स्तर के मुताबिक तैयार हो पाई है?
