हरियाणा का हर जिला बनेगा खेल ब्रांड

खेल अब शहर नहीं, जमीन तय करेगी

खेलपथ संवाद

चंडीगढ़। हरियाणा अब सिर्फ पदकों की गिनती नहीं करेगा बल्कि खिलाड़ी तैयार करने की फैक्ट्री बनेगा। हरियाणा सरकार ने खेल विकास का ऐसा नक्शा तैयार किया है, जो हर जिले को उसकी खेल पहचान देगा। अब खेल कुछ शहरों तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि पूरा प्रदेश मैदान बनेगा और हर जिला एक खेल ब्रांड।

नई खेल नीति के तहत हरियाणा के हर जिले में स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर बनाए जाएंगे। ये सेंटर सिर्फ इमारत नहीं होंगे बल्कि ऐसे टैलेंट हब होंगे जहां से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकलेंगे। दरअसल, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 2025-26 के बजट भाषण में प्रत्येक जिले में एक राजकीय मॉडल संस्कृति विद्यालय को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पोर्ट्स के रूप में विकसित करने का ऐलान किया था।

शिक्षा विभाग ने इसी को ध्यान में रखते हुए स्कूलों को चयन किया है। यह भी तय किया है कि किस जिले के किस स्कूल में कौन से खेल का एक्सीलेंस सेंटर स्थापित होगा। शिक्षा मंत्री महिपाल सिंह ढांडा ने इस संदर्भ में एक कमेटी का गठन भी किया था। कमेटी में शिक्षा विभाग के अलावा खेल विभाग तथा सोनीपत के राई स्थित स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को भी शामिल किया था।

सिरसा में क्रिकेट और बैडमिंटन, झज्जर में फुटबॉल, फरीदाबाद और पंचकूला में स्वीमिंग, जींद, रोहतक और सोनीपत में कुश्ती, हिसार, कुरुक्षेत्र और नूंह में बॉक्सिंग, फतेहाबाद में एस्ट्रो टर्फ हॉकी, रेवाड़ी में बास्केटबॉल व कबड्डी, अंबाला में बैडमिंटन व टेबल टेनिस तथा भिवानी व यमुनानगर में वॉलीबॉल के एक्सीलेंस सेंटर विकसित होंगे यानी अब हर जिला सिर्फ नक्शे पर नहीं, खेल कैलेंडर पर भी अपनी पहचान बनाएगा।

सरकार ने पहली बार खेलों को क्षेत्रीय रुचि और परम्परा से जोड़ा है। जहां कुश्ती की मिट्टी मजबूत है, वहां अखाड़े चमकेंगे। जहां युवा फुटबॉल के दीवाने हैं, वहां ग्रीन टर्फ बिछेगी और जहां पानी में सपने तैरते हैं, वहां स्वीमिंग पूल तैयार होंगे। यानी अब खेल ऊपर से नहीं थोपा जाएगा  बल्कि नीचे से उभरेगा।

इस पूरे मॉडल की रीढ़ होंगे पीएमश्री और मॉडल संस्कृति स्कूल। पढ़ाई के साथ-साथ खेल को बराबरी का दर्जा दिया जाएगा। इन स्कूलों में आधुनिक मैदान, इंडोर हॉल, प्रशिक्षित कोच, फिटनेस लैब और खेल उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य साफ है कि बच्चा स्कूल में ही खिलाड़ी बने, खिलाड़ी हीरो बने और हीरो प्रदेश की पहचान।

हरियाणा की पारम्परिक ताकत- कुश्ती और बॉक्सिंग इस योजना का केंद्रबिंदु हैं। सबसे ज्यादा एक्सीलेंस सेंटर इन्हीं खेलों के होंगे ताकि अखाड़ों की विरासत बनी रहे और ओलम्पिक की तैयारी मजबूत हो। सिरसा को क्रिकेट का विशेष केंद्र बनाया गया है, जहां आधुनिक पिच, नेट्स और ट्रेनिंग सिस्टम विकसित होगा। झज्जर के दुजाना में फुटबॉल के लिए विशेष घास वाला मैदान बनेगा ताकि राज्य से प्रोफेशनल फुटबॉलर्स की नई पीढ़ी निकले।

खिलाड़ियों की सबसे बड़ी परेशानी मौसम, अब अतीत की बात होगी। सरकार 15 जिलों में मल्टीपर्पज इंडोर हॉल बनाएगी, जहां बारिश, सर्दी या गर्मी किसी भी हाल में ट्रेनिंग जारी रहेगी। इन हॉल्स में बैडमिंटन, टेबल टेनिस, कबड्डी, कुश्ती और बॉक्सिंग की सालभर प्रैक्टिस सम्भव होगी। फरीदाबाद और पंचकूला में बनने वाले आधुनिक स्वीमिंग पूल तैराकी को नई उड़ान देंगे। स्कूल स्तर से ही प्रोफेशनल कोचिंग मिलने से राज्य अब जल खेलों में भी राष्ट्रीय पहचान बना सकेगा।

ग्रामीण खिलाड़ी को मिलेगा घर बैठे मंच

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण प्रतिभाओं को होगा। अब अच्छे मैदान और कोचिंग के लिए उनकी शहर छोड़ना मजबूरी नहीं रहेगी। हर जिले में चयन, प्रशिक्षण और प्रतियोगिता की व्यवस्था होगी, जिससे खेल और पढ़ाई दोनों साथ चलेंगी। शिक्षा विभाग ने चयनित स्कूलों और प्रस्तावों को वित्त विभाग को भेज दिया है। बजट मंजूर होते ही काम शुरू होगा। सरकार का लक्ष्य है कि अगले शैक्षणिक सत्र से पहले इन केंद्रों की नींव पड़ जाए।

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