राष्ट्रीय खेल बोर्ड को लेकर खेलनहार परेशान, सताने लगी कुर्सी जाने की चिन्ता
क्या तीन महीने में बदल जाएगा भारतीय खेल तंत्र, खेलों में पारदर्शिता को लगेंगे पंख
श्रीप्रकाश शुक्ला
नई दिल्ली। अगले तीन महीनों में भारत में खेल संगठनों का परिदृश्य पूरी तरह बदलने वाला है, क्योंकि खेल मंत्रालय राष्ट्रीय खेल महासंघों के कामकाज में एकरूपता और पारदर्शिता लाने के लिए राष्ट्रीय खेल बोर्ड का गठन करने जा रहा है। यह नया ढांचा नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट के तहत सभी संघों के संविधान को संशोधित करने और उन्हें सुव्यवस्थित करने के लिए बाध्य करेगा।
भारतीय ओलम्पिक संघ ने 20 जनवरी को सभी राष्ट्रीय खेल संघों, राज्य खेल संघों तथा राज्य ओलम्पिक एसोसिएशनों को पत्र लिखकर तीन महीने में राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक के अनुरूप व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए हैं। भारतीय ओलम्पिक संघ के इस पत्र ने लम्बे समय से खेल संगठनों तथा राज्य ओलम्पिक एसोसिएशनों में काबिज खेलनहारों के होश उड़ा दिए हैं।
खेल मंत्रालय के एक सूत्र के अनुसार राष्ट्रीय खेल बोर्ड खेल महासंघों को सम्बद्धता देने के मानदंड तय करेगा। कामकाज में एकरूपता लाने के लिए सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों को नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट के अनुरूप अपने संविधान में बदलाव करने होंगे। जिन खेल संघों के चुनाव होने हैं या जो पहले से लम्बित हैं, उन्हें इस नई नीति के तहत काम करना होगा। खेल पारिस्थितिकी तंत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और बेहतर कोचिंग तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह पहल खेल प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और पेशेवर बनाने के लिए की जा रही है।
राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के तहत महासंघों को मान्यता देने या निलम्बित करने और उनके वित्तीय आचरण की निगरानी करने का सर्वोच्च अधिकार रखने वाले बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय खेल बोर्ड (एनएसबी) को लेकर तरह-तरह की बातें होने लगी हैं। खेल मंत्रालय के एक सूत्र के अनुसार राष्ट्रीय खेल बोर्ड अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए नियम बनाने का काम चल रहा है। एनएसबी में एक अध्यक्ष और कुछ सदस्य होंगे। इनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा 'सार्वजनिक प्रशासन, खेल प्रशासन, खेल कानून और अन्य संबंधित क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले सक्षम, ईमानदार और प्रतिष्ठित व्यक्तियों में से की जाएगी।
हम आपको बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने नवम्बर 2025 में ही राष्ट्रीय खेल नीति-2025 को मंजूरी दे दी है। यह नीति वर्ष 2001 की पुरानी खेल नीति का स्थान लेगी और देश को वैश्विक खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक ठोस आधार बनेगी। राष्ट्रीय खेल नीति-2025 का उद्देश्य भारत को खेल के क्षेत्र में ओलम्पिक 2036 जैसे वैश्विक आयोजनों में मजबूत दावेदार बनाना और खेलों को जन आंदोलन के रूप में स्थापित करना है। इस नीति को तैयार करने और लागू करने में नीति आयोग, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, राष्ट्रीय खेल महासंघों, खिलाड़ियों, कोचों, विशेषज्ञों और आम नागरिकों से विचार-विमर्श किया गया है।
राष्ट्रीय खेल नीति में जमीनी स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खेल ढांचे को मजबूत किया जाएगा। प्रतिभा की पहचान, कोचिंग, खेल विज्ञान, तकनीक और चिकित्सा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कोचों, अधिकारियों और सहयोगी स्टाफ को समयबद्ध प्रशिक्षण मिलेगा। इससे खेल पर्यटन, बड़े खेल आयोजनों, स्पोर्ट्स मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलेगा। निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और वैकल्पिक वित्तीय मॉडलों का सहारा लेगी।
इस नीति के तहत महिलाओं, अनुसूचित जातियों, जनजातीय समुदायों व दिव्यांग खिलाड़ियों को खेलों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाएगा। पारम्परिक और स्वदेशी खेलों को संरक्षित और प्रचारित किया जाएगा। खेलों को शिक्षा से जोड़कर करियर विकल्प के रूप में स्थापित किया जाएगा। स्कूलों और कार्यस्थलों पर फिटनेस इंडेक्स लागू होगा। राष्ट्रीय फिटनेस अभियान और खेल सुविधाओं की सर्वसुलभता को बढ़ाया जाएगा। खेलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। खेल शिक्षा के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे।
