मंत्री जी स्वास्थ्य अनुदेशक अंशकालिक तो क्यों करें पूर्णकालिक काम

बिहार के शारीरिक शिक्षक का मानदेय अकुशल मजदूर से भी कम

खेलपथ संवाद

पटना। बिहार में सुशासन लाने का दम्भ भरती नीतीश कुमार सरकार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों को अंशकालिक मानकर उनका मानदेय बढ़ाने से इंकार कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री को ही नहीं पता कि जिस विधान का हवाला वह दे रहे हैं, उसका स्याह सच कुछ और ही है। विधान में इन शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों से सिर्फ एक पीरियड लेने का जिक्र है लेकिन मध्य विद्यालयों के प्रधान अध्यापक इनसे दिनभर काम लेते हैं।

मध्य विद्यालयों के प्रधान अध्यापक शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों से शारीरिक शिक्षा का काम लेने के साथ चुनाव में ड्यूटी, जातीय जनगणना में ड्यूटी, तरंग प्रतियोगिता में ड्यूटी,  दूसरे स्कूलों में परीक्षा ड्यूटी और न जाने कहां-कहां ड्यूटी ले रहे हैं। शिक्षा मंत्री जिस विधान का हवाला देकर इनका मानदेय बढ़ाने से इंकार कर रहे हैं, उसी विधान में इनसे सिर्फ एक घंटे का पीरियड लेने का उल्लेख है।

सबसे बड़ा सवाल तो ये कि क्या शारीरिक शिक्षा के अलावा जो उपर्युक्त कार्य यह शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशक कर रहे हैं, वह एक घंटे में सम्भव है। बेहतर तो यह है कि शिक्षा मंत्री को विधान-विधान की बातें करने की बजाय इन जमीनी योद्धाओं को सम्मानजनक मानदेय देने का प्रबंध कर मध्य विद्यालयों में रिक्त छह हजार से अधिक शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों के पद भरिए ताकि बिहार का युवा रोजगार पाए तथा भावी पीढ़ी स्वस्थ बिहार की अलख जगाए।

आठ हजार रुपये में न तो शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशक खुश रहेगा न ही बिहार का भविष्य खिलखिलाएगा। शिक्षा विभाग के विधान में जो अंशकालिक शब्द लिखा है, उसे पूर्णकालिक भी तो किया जा सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बिहार में सुशासन लाने का दावा तब तक सच नहीं माना जाएगा जब तक कि हर मध्य विद्यालय का शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशक पूर्णकालिक नहीं हो जाता। सरकार को विधान सभा चुनाव से पहले बिहार में शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों का मानदेय सम्मानजनक किया जाना बहुत जरूरी है, क्योंकि इन्हें अभी जो मानदेय मिल रहा है वह अकुशल श्रमिक से भी कम है।

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