बड़े अजीब हैं भारतीय ओलम्पिक संघ के खजांची आनंदेश्वर पांडेय

खिलाड़ियों पर हुकूमत चलाने वाले भारतीय ओलम्पिक संघ की अजब लीला
खिलाड़ियों की डाइट मनी को लेकर खेल मंत्रालय से लगाई गुहार
श्रीप्रकाश शुक्ला
नई दिल्ली।
हमारे देश के खेलनहारों की अजब लीला है, पद दर्जनों चाहिए मगर खिलाड़ियों की मदद सरकार करे। सरकार को ही यदि खिलाड़ियों की हर जरूरत पूरी करनी है तो फिर खेल संगठनों की क्या जरूरत। भारतीय ओलम्पिक संघ के खजांची आनंदेश्वर पांडेय की सोच पर तरस आता है। खिलाड़ियों की मदद हो या नहीं मीडिया में चर्चा का विषय बने रहना इनका शगल बन गया है।  
ताजा मामला भारतीय ओलम्पिक संघ और खेल मंत्रालय के बीच खिलाड़ियों की डाइट मनी को लेकर है। भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) के कोषाध्यक्ष आनंदेश्वर पांडेय ने खेल मंत्री किरण रिजिजू को पत्र लिखकर खिलाड़ियों की डाइट मनी के लिए गुहार लगाई है। उनका मानना है कि भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के छात्रावास बंद होने के कारण खिलाड़ी इस समय कोरोना महामारी के कारण घर पर हैं, जिनमें से कई खिलाड़ियों के परिवार वालों के सामने रोजगार का संकट है। इसके कारण उन्हें अपने खेल के लिए पर्याप्त पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा है।
इस समस्या को लेकर आनंदेश्वर ने पत्र में लिखा कि छात्रावास में रहने पर इन खिलाड़ियों पर जो व्यय आता है, उसमें से एक बजट बनाकर धनराशि का कुछ हिस्सा इन खिलाड़ियों की डाइट मनी के लिए छात्रवृत्ति के तौर पर दिया जा सकता है ताकि ये खिलाड़ी अपने घर पर ही पौष्टिक आहार का सेवन कर अभ्यास जारी रख सकें। 
दरअसल, आनंदेश्वर पांडेय कागजी वीर हैं और उत्तर प्रदेश ओलम्पिक संघ के सचिव का महती पद भी इन्हीं के पास है। उत्तर प्रदेश के साढ़े चार सौ प्रशिक्षक पिछले 15 महीनों से भूखों मर रहे हैं उनके लिए भी एक परवाना यदि खेल निदेशालय उत्तर प्रदेश और केन्द्रीय खेल मंत्रालय को लिखते तो समझ में आता कि इनके दिल में खेलों और खिलाड़ियों के प्रति प्यार है। हाल ही इन्होंने उत्तर प्रदेश के खेल संगठनों से भी तंगहाल खिलाड़ियों की सूची मांगी थी। दुख की बात है इनका पत्र प्रदेश के कई खेल संगठनों को मिला ही नहीं। 
खैर, भारतीय ओलम्पिक संघ के कोषाध्यक्ष पांडेय ने जो पत्र खेल मंत्रालय को लिखा है, उसमें उन्होंने एक उदाहरण भी दिया है, जिसमें कहा गया है कि जैसे उत्तर प्रदेश सरकार की मिड डे मील योजना के तहत विद्यार्थियों की मदद धनराशि सीधे उनके खाते में स्थानांतरित करके की जा रही है, ठीक उसी तरह हम भी इन खिलाड़ियों की डाइट मनी सीधे उनके खाते में पहुंचा कर उनकी मदद कर सकते हैं, इससे खिलाड़ी भारत के मिशन 2028 ओलम्पिक के सपने को साकार करने में सक्षम होंगे।
देखा जाए तो यह पत्र भारतीय ओलम्पिक संघ के महासचिव राजीव मेहता को लिखना चाहिए था लेकिन बाजी पांडेय मार ले गए। जो भी हो खेल मंत्री और देश की सरकार इस ओर क्या फैसला लेती है, यह देखने वाली बात होगी। बात सही है कि अगर एक खिलाड़ी को अच्छा खाना नहीं मिलेगा तो वह देश का प्रतिनिधित्व कैसे कर पाएगा और उससे पदक की उम्मीद करना भी बेमानी होगा। कोरोना महामारी ने खेलों में काफी कुछ बदल दिया है, यह तो सच है। अच्छा होता आनंदेश्वर पांडेय भुखमरी का शिकार और बेजार उत्तर प्रदेश के साढ़े चार सौ प्रशिक्षकों के लिए भी एक पत्र लिखते क्योंकि बिना प्रशिक्षकों के खिलाड़ी क्या उत्तर प्रदेश ओलम्पिक एसोसिएशन तैयार करेगा?  

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