उत्तर प्रदेश में सिर्फ 32 खेल संघों को मिलेगी सरकारी मदद
पारदर्शिता और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देना मुख्य उद्देश्य
खेलपथ संवाद
लखनऊ। निदेशालय खेल उत्तर प्रदेश अब खेल संगठनों को खैरात बांटने में परहेज करेगा। प्रदेश में सिर्फ मान्यता प्राप्त खेल संघों को ही सरकारी फंड और तकनीकी सहायता मिलेगी। ये वही संघ हैं, जिन्होंने शासन की तय गाइडलाइन को स्वीकार किया है। खेल विभाग ने इन 32 संघों की सूची जारी की है। इसका उद्देश्य खेलों के संचालन में पारदर्शिता लाना और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देना है।
खेल विभाग के अनुसार, आर्थिक सहायता सिर्फ उन्हीं प्रदेशीय खेल संघों को दी जाएगी, जो सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि खिलाड़ियों तक संसाधन सही तरीके से पहुंचें और खेल संघ अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाएं। देश में खेलों के संचालन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अखिल भारतीय खेल महासंघ और राज्य स्तर पर प्रदेशीय खेल संघ काम करते हैं। इन्हीं के माध्यम से प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं और खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिलता है। इसलिए इन खेल संघों का पारदर्शी और जिम्मेदार होना जरूरी है।
खेल विभाग ने जिन 32 संघों को मान्यता दी है, उनमें उत्तर प्रदेश ओलम्पिक संघ, उप्र एथलेटिक्स संघ, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, तैराकी, हैंडबाल, वालीबाल, जूडो, रायफल, फेंसिंग, शतरंज, कुश्ती, वुशू, फुटबाल, नेटबाल, कबड्डी, बाक्सिंग, बास्केटबाल, भारोत्तोलन, रोइंग, आत्या-पात्या, तीरंदाजी, हॉकी, क्याकिंग एंड कैनोइंग, साइक्लिंग, जिम्नास्टिक, साफ्ट टेनिस, ब्रिज, कराटे, सेपक टाकरा और पैरा स्पोर्ट्स संघ शामिल हैं।
विभाग ने इन सभी संघों के नाम, पते और पदाधिकारियों की जानकारी भी जारी की है, ताकि खिलाड़ियों और आम लोगों को आसानी से पता चल सके कि कौन से संघ मान्यता प्राप्त हैं। इससे खिलाड़ियों को फायदा होगा, क्योंकि अब वे सही और मान्यता प्राप्त संघों के माध्यम से प्रशिक्षण ले सकेंगे और प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले पाएंगे। साथ ही, सरकारी फंड का सही उपयोग होने से खेल सुविधाओं में भी सुधार होगा। खेल सचिव सुहास एलवाई का कहना है कि मान्यता प्राप्त संघों को खेल विभाग के इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग भी करने दिया जाता है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए पूरी आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।
