मानसिक संतुलन, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक जुड़ाव का स्रोत चैत्र नवरात्र

प्रकृति की नवचेतना और नई ऊर्जा का स्रोत है चैत्र नवरात्र

भक्ति से शक्ति

मथुरा। वर्तमान तेज रफ्तार और डिजिटल जीवनशैली से घिरे युवाओं के लिए चैत्र नवरात्र पर्व प्रकृति की नवचेतना और नई ऊर्जा का स्रोत बन जाता है। नौ दिनों का यह पर्व पूजा-पाठ या व्रत-उपवास के लिए ही नहीं बल्कि मानसिक संतुलन, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक जुड़ाव के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति का अवसर है। ये जीवन के चार महत्वपूर्ण आयामों- धर्म, संस्कृति, स्वास्थ्य और आधुनिक जीवनशैली का संतुलित संदेश लेकर आते हैं।

चैत्र नवरात्र एक पर्व भर नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, अनुशासन, नई ऊर्जा, आस्था, आध्यात्मिकता, आधुनिकता व संतुलित जीवनशैली का समग्र पैकेज है। यह ऐसे समय पर आते हैं, जब वसंत ऋतु के आगमन के साथ प्रकृति नई अंगड़ाइयां ले रही होती है। ऐसे में आज की तेज रफ्तार और डिजिटल जीवनशैली से घिरे युवाओं के लिए यह पर्व प्रकृति की नवचेतना और युवा जीवन की नई ऊर्जा का स्रोत बन जाता है। यह पर्व पूजा-पाठ या व्रत-उपवास के लिए ही नहीं बल्कि उनके मानसिक संतुलन, शारीरिक स्वास्थ्य और सांस्कृतिक जुड़ाव के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति का सबसे बड़ा आधार है। ये नवरात्र युवाओं के जीवन के चार महत्वपूर्ण आयामों- धर्म, संस्कृति, स्वास्थ्य और आधुनिक जीवनशैली का संतुलित संदेश लेकर आते हैं।

चैत्र नवरात्रि का मूल आधार शक्ति की उपासना है। इस महापर्व पर मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। इस प्रतीक के जरिये इंसान अपने अंदर की छिपी नौ विशेष शक्तियों को जागृत करता है। क्योंकि आज का युवा आध्यात्मिकता को केवल पारम्परिक पूजा तक सीमित नहीं रखता, वह इसे मेडिटेशन, योगा, माइंडफुलनेस और मानसिक संतुलन के रूप में भी अपनाता है। ये नौ दिन इस दृष्टि से आत्मनिरीक्षण का समय बन सकते हैं। बहुत से युवा हाल के कुछ सालों में इन दिनों सोशल मीडिया से दूरी बना लेते हैं और डिजिटल डिटॉक्स कर पाने में सफल रहते हैं। यह भी एक किस्म का ध्यान और योग के अभ्यास जैसा ही है। इससे मानसिक तनाव कम होता है और जीवन में बेहतर समझ व स्पष्टता बढ़ती है। मनोवैज्ञानिक भी मानते हैं कि नियमित ध्यान और प्रार्थना से सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास बढ़ता है। इस प्रकार नवरात्र युवाओं के लिए एक तरह से स्प्रिचुअल रिचार्ज का समय है।

चैत्र नवरात्र भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग सांस्कृतिक रूपों में मनाया जाता है। उत्तर भारत में यह रामनवमी तक चलते हैं। महाराष्ट्र में इसी समय गुड़ी पड़वा मनाया जाता है। पूर्वी भारत में शक्ति पूजा की विशेष परम्परा है। जबकि दक्षिण भारत में यह उगादी के रूप में पारम्परिक कृषि पर्व तथा उत्तर पश्चिमी भारत में यह चेतीचंद और नवरेह के रूप में मनाया जाता है, जोकि अलग-अलग संस्कृतियों का आपस में सम्मिलन का आधार होता है। वास्तव में यह देश के हर क्षेत्र से युवाओं के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर होता है। इन दिनों कॉलेज और सामाजिक समूहों में दुर्गा स्तुति, भजन संध्या और अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भरमार रहती है। लोकसंगीत और लोकनृत्य भी इस दौरान आयोजित होते हैं। इन सभी आयोजनों के माध्यम से युवा अपनी निजी परम्परा व देश की बहुसांस्कृतिक विरासत से भी मजबूती से जुड़ते हैं।

चैत्र नवरात्र के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक इसका स्वास्थ्य से जुड़ा होना है। दरअसल नवरात्र में जो उपवास रखा जाता है, उसका धर्म से ज्यादा हमारे स्वास्थ्य से रिश्ता होता है। दरअसल वसंत ऋतु में जब ये नवरात्र आते हैं, तब मौसम बदलता है और शरीर को नई परिस्थितियों के अनुसार ढालने के लिए हल्के सात्विक और संतुलित भोजन की दरकरार रहती है। आज के युवा स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा कांशेस हैं। इसलिए वे नवरात्रि को डिटॉक्स डाइट के रूप में भी देखते हैं। इस दौरान व्रत के खानपान हमारे स्वास्थ्य के लिए रामबाण साबित होते हैं। जैसे- साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, फल, दूध, सूखे मेवे और दही, ये सब न केवल शरीर के लिए ऊर्जा की आपूर्ति करते हैं बल्कि पाचन के हिसाब से सबसे उपयुक्त होते हैं। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और मिनिरल्स की भरपूर मौजूदगी होती है। चैत्र नवरात्र के व्रत शरीर को डिटॉक्स तो करते ही हैं, ऊर्जा से भी परिपूर्ण कर देते हैं।

चैत्र नवरात्र के समय पारम्परिक पहनावा फैशन में होता है जो सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। नवरात्र के समय मॉडर्न युवा भी पारम्परिक और एथनिक पसंद करता है और लड़कियां भी लहंगा-चोली से लेकर साड़ी-सूट तक को प्राथमिकता देती हैं। इसलिए यह सदियों से चली आ रही पहनावे की संस्कृति का भरपूर फ्यूजन होता है। युवा इंडो-वेस्टर्न लुक के चमचमाते आकर्षण ढूंढ़ लेते हैं।

संस्कृति का नया पड़ाव सोशल मीडिया

आज के युवाओं के जीवन में सोशल मीडिया का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। नवरात्र के दौरान इंस्टाग्राम, फेसबुक, यू-ट्यूब आदि पर भक्ति संगीत, पूजा विधि, व्रत रेसिपी तथा कई तरह के एथनिक फैशन से जुड़े कंटेंट की भरमार होती है। इसलिए इन दिनों युवाओं का देश के सामाजिक सद्भाव और संस्कृति से भी सरोकार बढ़ता है। नवरात्रि आध्यात्मिक जीवन और जीवन प्रबंधन के अनुशासन का भी विशिष्ट हिस्सा बनकर सामने आता है। जिस तरह से इन दिनों व्यक्तिगत पूजा-पाठ और साधना के साथ-साथ सामजिक उपकार के जो कार्य सम्पन्न होते हैं जैसे- जरूरतमंदों को भोजन वितरण, स्वच्छता अभियान और पौधरोपण उसे खास तरह की सामूहिकता और विशिष्ट मानवीय चेतना का भी विस्तार होता है। इस तरह ये नौ दिन किसी पर्व से ज्यादा समग्र जीवनशैली के वर्कशॉप की तरह उभरकर सामने आते हैं।

चैत्र नवरात्र में सात्विक डाइट से शरीर को ऊर्जा और शुद्धता मिलती है। इसलिए ताजे फल, सूखे मेवे और दूध का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक रहता है। इन नौ दिनों में घर और बाहर धार्मिक-आध्यात्मिक वातावरण रहता है। इन दिनों कोशिश करके डिजिटल लाइफस्टाइल से खुद को दूर कर लेना बेहतर है। वहीं इस दौरान सुबह योग और प्राणायाम करने से मानसिक शांति और ऊर्जा का भरपूर प्रवाह हासिल होता है।  

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