खिलाड़ियों के जांबाज प्रदर्शन से बढ़ रहा यूपी का गौरव
'खेल प्रोत्साहन के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य' पुरस्कार से योगी खुश
खेलपथ संवाद
लखनऊ। हर समयकाल में उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों का राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबदबा रहा है। आज उत्तर प्रदेश के एक दर्जन से अधिक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर दमखम दिखाते हुए राष्ट्र को गौरवान्वित कर रहे हैं। इनमें प्रमुख सचिव खेल सुहाल एलवाई जैसे जांबाज नौकरशाह भी शामिल हैं। मुझे यह कहने में जरा गुरेज नहीं कि जमीनी स्तर पर उत्तर प्रदेश में सुधार की बहुत जरूरत है।
साल 2025 उत्तर प्रदेश के जांबाज खिलाड़ियों के लिए यादगार रहा। राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों से प्रदेश के सात खिलाड़ी पुरस्कृत हुए तो उत्तर प्रदेश को 'सर्वश्रेष्ठ खेल प्रोत्साहन राज्य' का पुरस्कार मिला। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे उत्तर प्रदेश की खेल नीति की बड़ी जीत बताया है।
लोकप्रिय क्रिकेट की बात करें तो फिलवक्त दीप्ति शर्मा, कुलदीप यादव और रिंकू सिंह भारतीय टीम की जान हैं। इन्हें जब-जब मौके मिलते हैं अपने नायाब प्रदर्शन से सबका दिल जीत लेते हैं। क्रिकेट से इतर उत्तर प्रदेश के पैरा खिलाड़ी भी किसी से कम नहीं हैं। चैम्पियन प्रवीण कुमार, प्रीति पाल, सुहास एलवाई अपने अपने खेलों के सरताज हैं। भाला फेंक खिलाड़ी अन्नू रानी और पारुल चौधरी वैश्विक स्तर पर उत्तर प्रदेश की शान हैं।
आगरा की रहने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम की हरफनमौला खिलाड़ी दीप्ति शर्मा ने साल 2025 में बड़ा कमाल किया था। दीप्ति शर्मा ने महिला वर्ल्ड कप के फाइनल में भारतीय टीम की जीत में सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी। दीप्ति ने न सिर्फ 5 विकेट चटकाए बल्कि 47 रनों की मैच जिताऊ पारी भी खेली थी। विश्व कप के अन्य मुकाबलों में भी दीप्ति शर्मा ने गेंद और बल्ले से योगदान दिया था। दीप्ति शर्मा उत्तर प्रदेश में डिप्टी एसपी के पद पर तैनात हैं।
गोरखपुर के छोटे से गांव में जन्मे प्रवीण कुमार (25) पैरालम्पिक ऊंची कूद के सितारे हैं। टोक्यो 2020 में रजत और पेरिस 2024 में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। प्रवीण को देश का सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न मिल चुका है। 2.08 मीटर की छलांग लगाने वाले प्रवीण ने बताया कि मैंने कभी सोचा नहीं था कि गांव का लड़का देश का सबसे बड़ा खेल पुरस्कार पा सकता है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने स्टेडियम बनवाया, कोच दिए, विदेशी कैम्प में भेजा, तभी यह सपना सच हुआ।
मेरठ की बेटी अन्नू रानी जब जब मौका मिलता है भालाफेंक में कुछ न कुछ नया कर गुजरती हैं। एशियाई खेलों में स्वर्ण और विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य जीतने के बाद अर्जुन पुरस्कार उनके खाते में आया। 63.82 मीटर तक भाला फेंकने वाली अन्नू कहती हैं, कि यूपी सरकार ने मुझे 2022 से ही हर सुविधा दी है। आज मेरे गांव में लड़कियां भाला फेंकने का सपना देखती हैं।
चैम्पियन प्रीति पाल (24) ने पेरिस पैरालम्पिक में 100 मीटर और 200 मीटर टी-35 वर्ग में दो कांस्य पदक जीते थे। लखनऊ की इस बेटी ने खेल के क्षेत्र में आदर्श पेश किया है। सेरेब्रल पाल्सी से जूझने वाली प्रीति पहली भारतीय महिला पैरा धाविका हैं, जिन्होंने एक ही पैरालम्पिक में दो पदक जीते हैं। वह भावुक होकर कहती हैं कि लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम में अभ्यास के लिए सरकार ने नया ट्रैक बनवाया, तभी मेरा सपना पूरा हुआ।
कानपुर के पैरा तीरंदाज राकेश कुमार ने कंपाउंड मिक्स्ड टीम में पेरिस पैरालम्पिक स्वर्ण जीता है। विश्व रैंकिंग में नम्बर एक रह चुके राकेश कहते हैं, कि पहले तीरंदाजी के लिए दूर जाना पड़ता था। अब लखनऊ में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर का रेंज है। गौतमबुद्ध नगर के अजीत सिंह ने एफ-54 वर्ग में विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए पेरिस में रजत पदक जीता। वह कहते हैं कि योगी सरकार ने पैरा खिलाड़ियों को ओलम्पिक खिलाड़ियों के बराबर सुविधा दी। नौकरी देने का वादा किया था, वह भी पूरा किया।
मुजफ्फरनगर की दृष्टिबाधित धाविका सिमरन (टी-13 वर्ग) ने 2025 एशियन पैरा गेम्स में 100 और 200 मीटर में दो स्वर्ण जीते हैं। 15 साल की उम्र में ही विश्व जूनियर चैम्पियन रह चुकी सिमरन कहती हैं कि स्कूल में मुझे कोई खेलने नहीं देता था। यूपी सरकार ने मुझे लखनऊ बुलाया और कोचिंग दी। आज मैं देश के लिए दौड़ती हूं।
लखनऊ की 18 साल की वंशिका ने बीते साल महिला ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल किया था। विश्व जूनियर रैंकिंग में टॉप-20 में पहुंचीं वंशिका को अर्जुन पुरस्कार मिला। वह कहती हैं कि लखनऊ में अब शतरंज अकादमी खुल गई है। पहले दिल्ली जाना पड़ता था। उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव खेल सुहास एलवाई भी शानदार बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। बैडमिंटन एसएल-4 वर्ग में इन्होंने टोक्यो में रजत और पेरिस में स्वर्ण जीता है। प्रशासनिक अधिकारी होने के बावजूद वह लगातार खेलते रहते हैं। सुहास एलवाई कहते हैं कि मैं दिन में अफसर और शाम को खिलाड़ी बन जाता हूं। सरकार ने मुझे दोनों जिम्मेदारियां निभाने की पूरी छूट दी है।
बीते साल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश को 'खेल प्रोत्साहन के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य' चुना जाना रहा। इसके पीछे कारण प्रदेश में खेल विश्वविद्यालय और खेल अकादमियों का खोला जाना है। खेल निदेशालय जहां 1200 से अधिक छोटे-बड़े खेल मैदान और स्टेडियम बनाए जाने की बात कहता है वहीं सरकार 47 हजार से ज्यादा खिलाड़ियों को नौकरी देने की बात कहती है। देखा जाए तो योगी सरकार ने खेल बजट को 300 करोड़ से बढ़ाकर 2100 करोड़ रुपए तक कर दिया है। आबादी की दृष्टि से सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में खेल सम्भावनाएं अपार हैं। पारुल, प्रवीण, अन्नू, प्रीति, राकेश, अजीत, सिमरन, वंशिका, सुहास जैसे जांबाज उत्तर प्रदेश की शान हैं।
