महिला नेतृत्व और आधुनिक पालन-पोषण पर साझा किए अनुभव
रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में हुआ डॉ. पल्लवी राव चतुर्वेदी से संवाद कार्यक्रम
खेलपथ संवाद
भोपाल। रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में “डॉ. पल्लवी राव चतुर्वेदी से संवाद” शीर्षक से एक विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महिला नेतृत्व, उद्यमिता और डिजिटल युग में बदलते बच्चों के पालन-पोषण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के महिला विकास प्रकोष्ठ द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अंतर्गत आयोजित गतिविधियों की संक्षिप्त रिपोर्ट से हुई, जिसे डॉ. नईश जमीर ने प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर डॉ. पल्लवी राव चतुर्वेदी ने आईसेक्ट ग्रुप की स्थापना और उसके उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत में कई शिक्षा समूह अन्य व्यवसायों से विकसित हुए हैं, जबकि आईसेक्ट मूलतः शिक्षा केंद्रित संगठन रहा है। उन्होंने बताया कि संस्था का मुख्य उद्देश्य देशभर में शिक्षा के अवसरों का विस्तार करना और युवाओं को सशक्त बनाना है।
महिला नेतृत्व पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए आत्म-विकास और आत्म-संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। जब महिलाएं स्वयं को सशक्त बनाती हैं, तभी वे समाज और परिवार को बेहतर दिशा दे सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आईसेक्ट में कई महिला नेतृत्व विभिन्न जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभा रही हैं।
कार्यक्रम में आधुनिक पालन-पोषण के बदलते स्वरूप पर भी चर्चा हुई। “गेट सेट पेरेंट” और “पेरेंट विद पल्लवी” मंच की संस्थापक के रूप में डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि पालन-पोषण शिक्षा की दिशा में उनका यह प्रयास उनके व्यक्तिगत अनुभवों से प्रेरित है। उन्होंने बच्चों के विकास के विभिन्न चरणों—प्रारम्भिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक—माता-पिता की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने भारत में मौलिक साक्षरता और संख्यात्मकता पर बढ़ते जोर का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों की प्रारम्भिक शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए इस दिशा में बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों ने बच्चों के पालन-पोषण के स्वरूप को काफी प्रभावित किया है। कई परिस्थितियों में बच्चों को अनावश्यक डिजिटल विचलनों से बचाने के लिए सामान्य मोबाइल फोन (साधारण फोन) का उपयोग भी बेहतर विकल्प हो सकता है।
उद्यमिता के विषय में उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि केवल आकर्षण के कारण स्टार्टअप शुरू करने के बजाय धैर्य, परिश्रम और संगठनात्मक क्षमता के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में भोपाल में उन्होंने उद्यमियों के लिए एक संगठन की भी शुरुआत की थी। अपने जीवन के प्रेरणास्रोत के रूप में उन्होंने अपनी माता का उल्लेख किया, जो एक विद्यालय की प्राचार्य होने के साथ शिक्षा क्षेत्र की शुरुआती महिला उद्यमियों में शामिल थीं।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. चतुर्वेदी ने उच्च शिक्षा के संदर्भ में चार प्रमुख गुण—आलोचनात्मक चिंतन, सृजनात्मकता, सम्प्रेषण और सहयोग के महत्व पर जोर दिया तथा श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर भी दिए। उन्होंने अपनी आगामी पुस्तक इक्वल पेरेंटिंग के बारे में भी जानकारी दी, जो शीघ्र ही पेंगुइन रैंडम हाउस द्वारा प्रकाशित की जाएगी।
