स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में के.डी. हॉस्पिटल बना मरीजों की उम्मीद
उन्नत तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों से बढ़ी संस्थान की लोकप्रियता
मरीजों की सेवा ही संस्थान का एकमात्र उद्देश्यः चेयरमैन मनोज अग्रवाल
मथुरा। के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर ब्रज क्षेत्र में चिकित्सा-शिक्षा का नायाब प्रकल्प है। संस्थान के चेयरमैन मनोज अग्रवाल मरीजों की सेवा को ही सर्वोपरि मानते हैं। श्री अग्रवाल का कहना है कि जब हम मरीज व समाज के कल्याण को प्राथमिकता देकर अपना कर्म ईमानदारी से करते हैं तो सफलताएं खुद-ब-खुद कदम चूमने लगती हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा को व्यापार के बजाय सेवा मानना ही वास्तविक चिकित्सा का आधार है।
चेयरमैन मनोज अग्रवाल ने अमर उजाला को बताया कि डॉक्टर और मरीजों के बीच पुरातन काल से आत्मीयता, विश्वास एवं सम्मान का बेजोड़ रिश्ता रहा है। उनके बीच भरोसे और सम्मान की जो अटूट डोर हुआ करती थी, उसी की बदौलत डॉक्टरों को भगवान की उपाधि दी गई। तब डॉक्टर और मरीजों में एक दूसरे के प्रति अपनापन था। पूरा समाज ही डॉक्टरों का सम्मान करता था और डॉक्टर भी मरीज की भावनाओं की कद्र करते थे। अब इन चीजों में बहुत कमी आ गई है। श्री अग्रवाल ने कहा कि डॉक्टर व मरीज दोनों को ही वह भरोसा फिर से कायम करना होगा। श्री अग्रवाल ने कहा कि आज भी बहुत से डॉक्टर ऐसे हैं जो समाज की भलाई के लिए ही जीते हैं।
के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर की जहां तक बात है, इसने अपनी स्थापना के 12 साल पूरे कर लिए हैं। इन 12 वर्षों में के.डी. हॉस्पिटल ने दिन-प्रतिदिन अपनी चिकित्सा सुविधाओं में सुधार किया है। मरीजों को चौबीसों घण्टे चिकित्सा सुविधा और देखभाल मिले इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सेज तथा अन्य प्रशिक्षित कर्मचारियों के ठोस प्रबंध किए गए हैं। समय के साथ चिकित्सा प्रणाली में भी लगातार परिवर्तन हो रहे हैं।
पिछले एक दशक में के.डी. हॉस्पिटल ने अपनी चिकित्सा सेवाओं को हर वर्ग के लोगों के लिए सुलभ और किफायती बनाने का प्रयास किया है। के.डी. हॉस्पिटल चिकित्सा संस्थान ही नहीं एक परिवार है, यहां काम करने वाला हर कर्मचारी चाहे उसकी भूमिका क्लीनिकल हो या मरीज़ों से जुड़ी हो, मरीजों पर केंद्रित मानसिकता ही रखता है। मरीज पहले, यही सोच के.डी. हॉस्पिटल को विशेष चिकित्सा संस्थानों में जगह दिलाती है। के.डी. हॉस्पिटल के ऑपरेशन थियेटर, प्रयोगशालाएं और इमेजिंग सेवाएं (एक्स-रे) आधुनिकतम उन्नत तकनीकों से लैश हैं। चिकित्सा में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए देश के कई जाने-माने संस्थानों से भी अनुबंध किए गए हैं।
संस्थान के चेयरमैन मनोज अग्रवाल ने चिकित्सकों की निरंतर बदलती भूमिका, बदलती सामाजिक अपेक्षाएं, तेजी से बदलते चिकित्सा विज्ञान और शैक्षणिक तकनीकों की विविधता पर न केवल ध्यान दिया बल्कि उसमें सुधार के प्रयास भी किए हैं। चिकित्सा क्षेत्र में सेवाभाव सर्वोपरि है, यही के.डी. हॉस्पिटल का मूलमंत्र भी है। के.डी. हॉस्पिटल प्रबंधन की हर पल कोशिश रहती है कि ब्रज और उसके आसपास के लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें ताकि उन्हें चिकित्सा के अभाव में महानगरों की तरफ न भागना पड़े।
अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त इस हॉस्पिटल में विशेषज्ञ चिकित्सकों, सुयोग्य नर्सेज तथा कर्मचारियों की 24 घण्टे सुविधा होने से ब्रज क्षेत्र ही नहीं बल्कि हरियाणा, राजस्थान, बिहार यहां तक कि दिल्ली तक से लोग उपचार को यहां आते हैं और स्वस्थ होकर अपने घर जाते हैं। यहां की उन्नत चिकित्सकीय परीक्षण मशीनों में बहुत ही कम शुल्क में मरीजों की जांच की जाती है। के.डी. हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर का नशामुक्ति केन्द्र उन लोगों के लिए वरदान है जोकि लम्बे समय से नशीले पदार्थों की गिरफ्त में थे। यह नशामुक्ति केन्द्र उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्वीकृत मथुरा जनपद का एकमात्र सेण्टर है।
के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर अपनी स्थापना वर्ष से ही सेवाभाव को समर्पित है। कुछ साल पहले तक मथुरा के लोगों को गुर्दे, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डियों से सम्बन्धित समस्या होने पर दिल्ली तथा अन्य महानगरों की तरफ भागना पड़ता था, लेकिन अब ये सभी सुविधाएं के.डी. हॉस्पिटल में उपलब्ध हैं। यहां नेफ्रो कार्डियक और न्यूरो पीडियाट्रिक सर्जरी की सुविधाएं होने से अब ब्रज क्षेत्र के लोगों को उपचार के लिए दिल्ली या अन्य महानगरों की तरफ नहीं भागना पड़ता। के.डी. हॉस्पिटल में बच्चों की चिकित्सा सुविधाओं में भी काफी इजाफा किया गया है। अब के.डी. हॉस्पिटल में शिशुओं की हर तरह की शल्य क्रिया सम्भव है।
ब्रज क्षेत्र के गुर्दे में पथरी तथा प्रोस्टेट पीड़ित मरीजों को महानगरों की तरफ न भागना पड़े इसके लिए के.डी. हॉस्पिटल में थूलियम लेजर मशीन और फ्लेक्सिबल यूरेटेरोस्कोपी मशीनों की व्यवस्था की गई है। इन आधुनिकतम मशीनों के आ जाने से अब के.डी. हॉस्पिटल में मरीजों की बिना चीर-फाड़ सर्जरी सम्भव है। थुलियम लेजर एक आधुनिक और सुरक्षित तकनीक है जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार की सर्जिकल प्रक्रियाओं में किया जाता है। यह पारम्परिक तकनीकों की तुलना में अधिक प्रभावी और सुरक्षित है तथा इसके कई फायदे भी हैं। थुलियम लेजर मशीन से हर तरह की पथरी का इलाज सम्भव है। पथरी गुर्दे की हो, पेशाब नली की या फिर पेशाब की थैली की थुलियम लेजर मशीन से बहुत कम समय और बिना चीरा सर्जरी सम्भव है।
के.डी. हॉस्पिटल में थूलियम लेजर मशीन और फ्लेक्सिबल यूरेटेरोस्कोपी मशीन आ जाने से नसों की ब्लॉकेज से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत की बात है। अब ऐसे मरीजों का इलाज के.डी. हॉस्पिटल में सहजता से हो रहा है तथा पीड़ित मरीज को भारी-भरकम राशि भी नहीं चुकानी पड़ती। हाल ही में यहां एंडोब्रोन्कियल अल्ट्रासाउंड (ईबीयूएस) मशीन लगाई गई है। इस आधुनिकतम मशीन से अब फेफड़े व सांस सम्बन्धी बीमारियों का पता लगाना भी आसान हो गया है। इसके माध्यम से फेफड़ों की बीमारी और कैंसर की भी पहचान आसानी से हो सकेगी।
कोई भी मरीज जीवन के सबसे नाजुक समय में हॉस्पिटल आता है, वह न केवल बेहतर होने की तलाश में होता है बल्कि आराम भी चाहता है। वह स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों से आश्वासन चाहता है, जो उनसे सीधे और ईमानदारी से बात करें, उन्हें समझाएं कि 'हम क्या करने जा रहे हैं' और यह जानें कि वे जिस लड़ाई का सामना कर रहे हैं, उसमें वे अकेले नहीं हैं। यहां के चिकित्सक और नर्सेज मरीज के प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार के साथ उनके परिवारों के साथ भी वैसा ही व्यवहार करते हैं जैसा वे अपने प्रियजनों के साथ चाहते हैं।
संस्थान के चेयरमैन मनोज अग्रवाल चाहते हैं कि चिकित्सा-शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे अनुसंधान हों जोकि मरीजों के लिए कल्याणकारी हों। श्री अग्रवाल कहते हैं कि मैं मथुरा में ही पैदा हुआ, यहीं मेरी शिक्षा-दीक्षा हुई। इसलिए अपने शहर से मेरा लगाव कुछ ज्यादा ही है। मैं चाहता हूं कि अपने शहर व प्रदेश के लिए कुछ ऐसा करूं, जिससे समाज व गरीबों का कल्याण हो। श्री अग्रवाल ने कहा कि हर इंसान को बिना स्वार्थ कर्म करना चाहिए, ईश्वर उसका फल किसी न किसी रूप में अवश्य देता है।
