अंग्रेजों की धरती पर भारतीय क्रिकेट की जमी धाक

शुभमन की कप्तानी में यशस्वी क्रिकेटरों ने रचा इतिहास

श्रीप्रकाश शुक्ला

ग्वालियर। भारतीय युवा पलटन ने अंग्रेजों के खिलाफ उन्हीं की सरजमीं पर दबंग क्रिकेट खेलकर अपने चाहने वालों का विश्वास पुख्ता कर दिया है। टीम इंडिया कुछ मौकों पर यदि न चूकती तो यह सीरीज भारत के नाम होती। परिणाम कुछ भी हो दोनों टीमों ने अपने बेजोड़ खेल से मूल क्रिकेट को एक बार फिर से जिन्दा कर दिया है।

सही मायनों में, दिग्गज क्रिकेटरों की अनुपस्थिति में युवा भारतीय क्रिकेटरों ने इंग्लैंड की धरती पर नया इतिहास रचा है। ओवल टेस्ट में उन्होंने इंग्लैंड के मुंह से जीत छीन ली। जो मैच इंग्लैंड के पाले में जाता दिख रहा था, उसे अपनी जीत में बदल दिया। लगातार रोमांचक होते मैच को जीतकर टीम ने न केवल मैच जीता बल्कि सीरीज को भी दो-दो से बराबरी पर ला खड़ा किया। युवा तुर्कों ने उन तमाम क्रिकेट पंडितों की भविष्यवाणियों को बेकार साबित किया, जो इंग्लैंड टीम द्वारा सीरीज जीतने के दावे कर रहे थे।

ओवल टेस्ट के अंतिम क्षणों में मोहम्मद सिराज ने तो मैच का पासा ही पलट दिया। मैच के रोमांच ने बताया कि क्यों क्रिकेट पंडित टेस्ट क्रिकेट को असली क्रिकेट की संज्ञा देते हैं। भारत के धुरंधर क्रिकेटरों के बिना इंग्लैंड के खिलाफ उतरी इस टीम ने कई इतिहास रचे, कई रिकॉर्ड तोड़े और नये रिकॉर्ड बनाए। भारतीय क्रिकेट के पिछले 93 साल के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि किसी सीरीज में पांच भारतीय बल्लेबाजों ने चार सौ से अधिक रन बनाए हों। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि भारतीय खिलाड़ियों ने ये रन तेज गति व उछाल लेती पिचों के बीच बनाये।

उन्होंने पूरे दमखम के साथ तेज ब्रिटिश गेंदबाजों का मुकाबला किया। दरअसल, लीड्स व लॉर्ड्स के मैच भारतीय टीम को करीबी मुकाबले में खोने पड़े अन्यथा टीम सीरीज भी जीत सकती थी। कप्तान शुभमन गिल की इसलिए भी तारीफ करनी होगी कि उन्होंने विदेशी पिच पर कप्तानी के दबाव के बीच सर्वाधिक रन बनाये। कई रिकॉर्ड्स उनकी सफल कप्तानी के गवाह हैं। मोहम्मद सिराज ने निर्णायक भूमिका निभाते हुए न केवल अंतिम कीमती विकेट लिए बल्कि पूरे मैच में नौ विकेट लेने के कारण ‘मैन ऑफ द मैच’ भी बने। वहीं प्रसिद्ध कृष्णा ने भी दोनों पारियों में चार-चार विकेट लेकर अपने नाम के अनुरूप प्रसिद्धि हासिल की। ओवल मैच में यशस्वी जायसवाल, आकाशदीप, रवींद्र जडेजा और वॉशिंगटन के बल्लों से निकले रन भी इस जीत में खूब काम आए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय टीम ने यह भी साबित किया कि वह विदेशी धरती में, विषम परिस्थितियों में व नामचीन खिलाड़ियों की अनुपस्थिति में जीत की इबारत लिख सकती है। लगता है जूझते हुए आसन्न हार को जीत में बदलने का हुनर भी टीम ने सीख लिया। जीत के जुनून को हर समय महसूस किया गया। संयुक्त रूप से मैन ऑफ द सीरीज बने शुभमन गिल के बल्ले से खूब रन बरसे। वे इस सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी बने। यदि वे बीस रन और बना पाते तो एक सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने के सुनील गावस्कर के रिकॉर्ड को तोड़ सकते थे।

वहीं सीरीज में मोहम्मद सिराज नये सितारे बनकर उभरे और उन्होंने सबसे ज्यादा 23 विकेट लिए। निस्संदेह, यह रोमांचक सीरीज टेस्ट क्रिकेट के 148 साल के इतिहास में सबसे बेहतरीन रही। पांचों टेस्ट मैचों में भारतीय टीम जीत के लिये जूझती नजर आई। शुभमन गिल कहीं से नहीं लगे कि वे एक नये कप्तान हैं। वे विराट कोहली और रोहित शर्मा के शानदार विकल्प के रूप में सामने आए हैं। भले ही भारत ने छह रन से ओवल टेस्ट जीता हो मगर यह इतिहास में एक बड़ी जीत के रूप में दर्ज की जाएगी। जिसने हाथ से निकलती सीरीज को बराबरी के स्तर पर ला खड़ा किया।

शुभमन गिल और सिराज के अलावा इस सीरीज में यशस्वी जायसवाल, के.एल. राहुल, ऋषभ पंत,जसप्रीत बुमराह व आकाश दीप जैसे सितारे भी चमके। निस्संदेह, रवींद्र जडेजा पुराने योद्धा हैं। गिल के पास बहुत समय है और उनसे लम्बी पारी और विजयी शृंखलाएं खेलने की उम्मीद की जा सकती है। निस्संदेह, उनकी प्रतिभा भारतीय टीम में जीत का जुनून भरेगी। बहरहाल, शानदार उतार-चढ़ाव भरे पांच मैचों के मुकाबलों ने दर्शाया कि धमाकेदार टी-20 क्रिकेट के दौर में टेस्ट क्रिकेट का क्यों महत्व है। ये उन क्रिकेट पंडितों के लिये जवाब है जो टेस्ट क्रिकेट को बीते दिनों की बात कहने लगे थे।

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