बहुत जिद्दी और जुनूनी है बेटी हिमाः रंजीत दास

श्रीप्रकाश शुक्ला सच कहूं तो मैं एक सपना जी रही हूं। यह शब्द हैं हिमा दास के जिनके जरिए वह असम के एक छोटे से गांव में फुटबॉलर से शुरू होकर एथलेटिक्स में पहली भारतीय महिला विश्व चैम्पियन बनने के अपने सफर को बयां करना चाहती है। नौगांव जिले के कांदुलिमारी .......

भारत के 66वें शतरंज ग्रैंडमास्टर बने तमिलनाडु के जी आकाश

चेन्नई। तमिलनाडु के जी आकाश देश के 66वें शतरंज ग्रैंडमास्टर जबकि उनके राज्य के एम प्रणेश और गोवा के अमेया ऑडी अंतरराष्ट्रीय मास्टर्स बन गए हैं। आकाश के ग्रैंडमास्टर खिताब की अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (फिडे) परिषद की हाल में हुई बैठक में पुष्टि की गई।  चेन्नई के इस खिलाड़ी की फिडे रेटिंग 2495 है। उन्होंने कहा कि वह ग्रैंडमास्टर बनकर खुश हैं और उनका लक्ष्य अपनी रेटिंग 2600 तक पहुंचाना है। आकाश ने पीटीआई-भाषा से कहा, ''मैं भारत क.......

निशानेबाज मनु भाकर को भा रही घुड़सवारी

मानसिक और शारीरिक समस्या से निपटने में मददगार है यह सब चण्डीगढ़। कोविड-19 महामारी का प्रभाव कम होता नहीं दिख रहा जिससे शीर्ष निशानेबाज मनु भाकर रोजमर्रा की एक जैसी ट्रेनिंग की बोरियत को खत्म करने के लिए खेतों में ट्रैक्टर चलाने के अलावा अपने शौक जैसे पेंटिंग और घुड़सवारी करने में समय बिता रही हैं। मनु का कहना है कि इससे उन्हें मानसिक और शारीरिक समस्या से निपटने में मदद मिल रही है। कोविड-19 महामारी के चलते अभी खेल गतिविधियां.......

ज्योति के जज्बे को सलाम

क्या ऐसे ही आगे बढ़ेंगी बेटियां? मनीषा शुक्ला कानपुर। कुछ दिनों पहले 15 साल की एक बच्ची द्वारा अपने अपाहिज पिता को लगभग 12 सौ किलोमीटर की थका देने वाली साइकिल यात्रा से बिहार पहुंचना उसके जज्बे का नायाब उदाहरण है। ज्योति की यह विवशता अपने आपमें एक यातना-कथा है तो बेटी पढ़ाओ, बेटी को आगे बढ़ाओ का सब्जबाग दिखाती हुकूमतों की कथनी और करनी का.......

उदीयमान धावक प्राजक्ता कर रही भुखमरी का सामना

माता को नहीं मिल रहा काम, पिता हो गए लकवाग्रस्त खेलपथ प्रतिनिधि नागपुर। लॉकडाउन के चलते नागपुर की धावक प्राजक्ता गोडबोले इन दिनों भुखमरी का सामना कर रही है। प्राजक्ता की मां बेरोजगार है जबकि पिता कुछ समय पहले लकवाग्रस्त हो गये हैं। प्राजक्ता दुःखी मन बताती है कि उसे नहीं पता कि अगले वक्त का खाना मिलेगा भी या नहीं। चौबीस साल की प्राजक्ता नागपुर में सिरासपेठ झुग्गी में अपने माता-पिता के साथ रहती है। प्राजक्ता 2019 में इटली में विश्व वि.......

भूखे पेट दौड़ना मुश्किलः अनिता कुमारी

मुझे एक अदद नौकरी की तलाश श्रीप्रकाश शुक्ला देहरादून। मैं देश के लिए दौड़ना चाहती हूं। मैं देश को मैडल दिलाना चाहती हूं। देश का गौरव बढ़ाना चाहती हूं। मैं दिन-रात मेहनत भी कर रही हूं। मैंने अपने राज्य उत्तराखंड को 400, 800 और 1500 मीटर दौड़ में दर्जनों मैडल दिलाए हैं लेकिन मैं अपने गरीब माता-पिता पर आखिर कब तक बोझ बनकर रहूंगी। मेरे पिता तांगा चलाते हैं, उनके सामने परिवार के भरण-पोषण की तमाम चुनौतियां हैं। तीन बहनों और दो भाइयों की उद.......

निखिल का सपना एथलेटिक्स में देश के लिए पदक जीतना

  मिल्खा सिंह और उसेन बोल्ट को मानते हैं अपना आदर्श खेलपथ प्रतिनिधि नागपुर। देशभर में लाकडाउन के चलते भारतीय खेल प्रतिभाएं मायूस तो हैं लेकिन वह अपने घरों में ही कड़ी मेहनत कर अपने सपनों को साकार करने को प्रतिबद्ध हैं। मिल्खा सिंह और उसेन बोल्ट को अपना आदर्श मानने वाले महाराष्ट्र के उदीयमान एथल.......

प्रतिभाशाली तीरंदाज रिद्धि पुणे से करनाल लौटी

ओलम्पिक कैंप समाप्त होने के बाद पुणे में ही फंसी हुई थी खेलपथ प्रतिनिधि नई दिल्ली। टोक्यो ओलम्पिक के लिए चुनी जाने वाली टीम के दावेदारों में शामिल 15 साल की अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज रिद्धि को पुणे से निकालकर करनाल के लिए रवाना कर दिया गया है। रिद्धि आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में ओलम्पिक कैंप समाप्त होने के बाद पुणे में पिछले एक माह से फंसी हुई थीं। उन्होंने आर्चरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया से उन्हें पुणे से निकालकर करनाल पहु.......

ओलम्पिक टलने से निराश हैं भावना जाट

खेलपथ प्रतिनिधि जयपुर। भारत में अधिकांश खिलाड़ी कोरोना वायरस महामारी के कारण ओलंपिक स्थगित करने को अभ्यास के लिए अधिक समय मिलने के रूप में देख रहे हैं, लेकिन पैदल चाल खिलाड़ी भावना जाट को लगता है कि यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता कि अगले साल भी खेल हो सकेंगे। फरवरी में राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में अप्रत्याशित जीत दर्ज करके ओलंपिक 20 किलोमीटर पैदल चाल के लिए क्वॉलिफाई करने वाली भावना का .......

रवि के लिए चुनौती बनेगा वजन

टोक्यो ओलम्पिक टलने से होगी दिक्कत नई दिल्ली। टोक्यो ओलम्पिक एक साल आगे बढ़ने का नुकसान भारतीय पहलवान रवि कुमार (57 किलोग्राम) को भी हुआ है। एशियाई चैम्पियन रवि इस वक्त जबरदस्त फॉर्म में थे और ओलम्पिक खत्म होते ही 57 किलोग्राम भारवर्ग को छोड़ इससे ज्यादा वजन में जाने वाले थे। लम्बाई के चलते उन्हें इस भार वर्ग में दिक्कत हो रही है। उन्हें कम्पटीशन से पहले चार किलो तक वजन कम करना पड़ता है। इसके चलते उन्होंने ओलम्पिक के बाद वजन बदलने की ठान रख.......