भगवान सिंह ने की श्रीनगर से कारगिल वार मेमोरियल की साहसिक साइकिल यात्रा

तीन सौ किलो मीटर का कठिन सफर साइकिल से तीन दिन में पूरा किया

खेलपथ प्रतिनिधि

भोपाल खेल और युवा कल्याण विभाग में कार्यरत भगवान सिंह कुशवाह ने श्रीनगर से कारगिल वार मेमोरियल तक की करीब तीन सौ किलोमीटर की कठिन साहसिक साइकिल यात्रा पूरी कर मध्य प्रदेश को गौरवान्वित किया। भगवान सिंह ने यह साइकिल यात्रा श्रीनगर से प्रारम्भ की और कारगिल वार मेमोरियल तक आने-जाने का लगभग तीन सौ किलोमीटर का यह कठिन सफर तीन दिन में पूरा किया।

साइकिल यात्रा से लौटकर भगवान सिंह ने संचालक खेल और युवा कल्याण पवन कुमार जैन से सौजन्य भेंट की और उन्हें इस साहसिक यात्रा से अवगत कराया। संचालक श्री जैन ने भगवान सिंह द्वारा की गई इस साहसिक यात्रा की सराहना करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि 11 हजार फीट ऊंचे दुनिया के कठिनतम सड़क मार्ग जोझिला-दर्रा को साइकिल से चढ़ाई कर पूरा करने वाले भगवान सिंह ने साहसिक कार्य किया है।

भगवान सिंह ने बताया कि उन्होंने 30 अक्टूबर, 2020 को प्रातः 7 बजे श्रीनगर से साइकिल यात्रा प्रारंभ की। सोनमर्ग होते हुए वे जोझिला-दर्रा पहुंचे जहां वर्फबारी के चलते ट्रक चालकों के सहयोग से ट्रक के केबिन में रात्रि विश्राम किया। अगले दिन उन्होंने अपना सफर प्रारंभ किया और वे 31 अक्टूबर को रात्रि 8.30 बजे द्रास पहुंचकर रात्रि विश्राम किया। उन्होंने एक नवम्बर, 2020 को कारगिल वार मेमोरियल पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और वापस श्रीनगर के लिए प्रस्थान किया। भगवान सिंह ने शाम सात बजे श्रीनगर पहुंचकर अपनी साहसिक यात्रा का समापन किया।

भगवान सिंह ने इससे पूर्व भी साइकिल से कई साहसिक यात्राएं पूरी की हैं। वे मध्य प्रदेश के पहले पर्वतारोही हैं जिन्होंने वर्ष 2016 में दुनिया की सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया। उन्होंने वर्ष 2017 से लगातार तीन वर्ष तक दुनिया की सबसे ऊंची सड़क कुल्लू-मनाली- लेह-खारढूंगला की साइकिल द्वारा साहसिक यात्रा की है। उनका मानना है कि नियमित साइकिलिंग से स्वयं को फिट रखकर हम फिट रह सकते हैं। भगवान सिंह का संदेश हम फिट तो इंडिया फिट।

 

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