दिग्गजों ने किया स्वदेशी खेलों को पुनर्जीवित करने का आह्वान

पेफी की दो दिवसीय राष्ट्रीय ई-कॉन्फेंस

खेलपथ प्रतिनिधि

नई दिल्ली। फिजिकल एजूकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पेफी) द्वारा देश में स्वदेशी खेलों के प्रति जागरूकता एवं इनके प्रचार-प्रसार के लिए दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की ई-कॉन्फेंस का आयोजन किया गया जिसमें खेलों के विशेषज्ञों ने स्वदेशी खेलों को पुनर्जीवित करने की सराहनीय कोशिश की। कॉन्फेंस के समापन सत्र को सम्बोधित करते हुए पेफी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. पीयूष जैन ने देश की नई शिक्षा नीति का समर्थन करते हुए कहा कि बच्चों की शुरुआती शिक्षा में जिस प्रकार स्वदेशी भाषा पर जोर दिया गया है, उसी तरह क्लास पांच तक स्वदेशी खेलों का प्रशिक्षण दिया जाना भी जरूरी है। उन्होंने कहा की पारम्परिक भारतीय खेलों के माध्यम से बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास सहजता से किया जा सकता है, जिससे आगे चलकर यह बच्चे आज के प्रसिद्ध आधुनिक खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दे सकें।

श्री जैन ने कहा कि हम यह भी आशा करते हैं कि आने वाले समय में सरकार एवं अन्य सम्बन्धित संगठन/संस्थाओं द्वारा इस ओर अधिकाधिक प्रयास कर अपनी पारम्परिक विरासत एवं स्वदेशी विचार को पूर्ण सार्थकता प्रदान करने की सार्थक कोशिशें होंगी। पेफी द्वारा आने वाले समय में इस विषय पर देशभर में कुछ और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. शरद कुमार शर्मा ने बताया की इस दो दिवसीय ई-कान्फ्रेंस में देशभर के सभी राज्यों से स्वदेशी, परंपरागत क्षेत्रीय एवं वैदिककालीन खेलों पर शोध पत्र एवं लेख आमंत्रित किए गए थे, जिनमें से चयनित श्रेष्ठ शोध पत्रों एवं लेखों का प्रस्तुतिकरण भी किया गया। इस कार्यक्रम के आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति में खेलों का महत्व एवं उनके माध्यम से सर्वांगीण विकास को कैसे प्राप्त किया जाता था और उस समय में यह खेल सीमित साधनों के साथ इस लक्ष्य को प्राप्त करने में क्या और कैसे भूमिका निभाते थे, इसके मूल से सभी का परिचय कराना है।

कार्यक्रम के आयोजन अध्यक्ष डॉ. अनिल करवंदे ने कहा की पेफी द्वारा यह आयोजन अपने आप में अति आवश्यक इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि देश में अभी तक इस ओर ध्यान न देने के कारण अधिकांश भारतीय परंपरागत स्वदेशी खेल विलुप्त हो चुके हैं या विलुप्त होने की कगार पर हैं। प्राप्त होने वाले सभी चुने गए शोध पत्रों एवं लेखों को एक पुस्तक के माध्यम से जारी किया जाएगा, जोकि भविष्य में इनकी पहचान एवं प्रचार-प्रसार के लिए एक उत्तम प्रयास सिद्ध होगा। इस पूरे आयोजन में दो दिन में चार तकनीकी सत्र आयोजित किये गए जिसमें खेल जगत, भारतीय संस्कृति एवं स्वदेशी खेलों में रूचि रखने वाले लगभग तीन हजार लोग सहभागी बने। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण पेफी के यूट्यूब चैनल पर किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अरुणा डोगरा एवं डॉ. अमृता पांडे द्वारा नागपुर, महाराष्ट्र से किया गया।

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