एशियाई खेलों के आकाश में भारत नई उड़ान को तैयार

लक्ष्य पदक के साथ भारत को खेल महाशक्ति बनाना

खेलपथ, शब्द सहयात्री

नई दिल्ली। एशियाई खेल केवल मैदान पर जीत और हार का उत्सव नहीं हैं। यह एशिया की युवा ऊर्जा, खेल प्रतिभा, अनुशासन और राष्ट्रीय स्वाभिमान का सबसे बड़ा मंच हैं। जब भारतीय खिलाड़ी तिरंगे के साथ मैदान में उतरते हैं तो उनके साथ करोड़ों देशवासियों की उम्मीदें भी उतरती हैं।

भारत के लिए एशियाड 2026 एक और पदक अभियान से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। यह अवसर है यह दिखाने का कि भारत की खेल प्रतिभा अब केवल कुछ लोकप्रिय खेलों तक सीमित नहीं है। एथलेटिक्स, हॉकी, शूटिंग, कुश्ती, मुक्केबाजी, बैडमिंटन, तीरंदाजी, तैराकी और अनेक खेलों में देश की नई पीढ़ी लगातार अपनी पहचान बना रही है।

इस बार कुछ स्थापित सितारे मैदान पर नहीं होंगे। नीरज चोपड़ा की अनुपस्थिति निश्चित रूप से भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक बड़ी कमी महसूस होगी। लेकिन खेल किसी एक खिलाड़ी का नाम नहीं है। एक महान खिलाड़ी की अनुपस्थिति दूसरे खिलाड़ी के लिए अपने आपको साबित करने का अवसर भी बनती है। यही खेल की खूबसूरती है, मैदान कभी खाली नहीं रहता, प्रतिभा आगे आती रहती हैं।

भारत की बेटियों पर भी विशेष नजर होगी। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने एशिया और दुनिया के मंच पर जिस आत्मविश्वास का परिचय दिया है, वह भारतीय खेल व्यवस्था में आए सकारात्मक बदलाव का संकेत है। अब बेटियां केवल भागीदारी नहीं, बल्कि पदक और गौरव की दावेदार बनकर उतरती हैं।

हमारी नजर केवल पदकों पर नहीं होनी चाहिए। हम यह भी पूछें कि एशियाड से लौटने के बाद इन खिलाड़ियों की सफलता का लाभ हमारे स्कूल के मैदान तक कैसे पहुंचेगा? गांव की प्रतिभा को प्रशिक्षण कैसे मिलेगा? हर बच्चे को खेलने का अवसर कब मिलेगा? विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा और योग को वास्तविक महत्व कब मिलेगा? और हमारे जमीनी प्रशिक्षकों तथा खेल योद्धाओं को वह सम्मान कब मिलेगा जिसके वे अधिकारी हैं? यही एशियाड की असली विरासत होगी। एक पदक एक खिलाड़ी को गौरव देता है, लेकिन एक मजबूत खेल संस्कृति पूरे राष्ट्र को शक्ति देती है।

इसलिए खेलपथ का संदेश स्पष्ट है- “खेलेंगे हम, बढ़ेगा भारत।” आइए, एशियाड 2026 में भारत के हर खिलाड़ी का उत्साह बढ़ाएं। जीत पर गर्व करें, संघर्ष का सम्मान करें और हार में भी खिलाड़ी का हाथ थामें क्योंकि राष्ट्र की खेल शक्ति केवल पदक तालिका से नहीं, बल्कि मैदानों पर पैदा होने वाली अगली पीढ़ी की प्रतिभाओं से तय होती है।

खेलपथ का संकल्प- खेल को सम्मान | खिलाड़ी को प्रोत्साहन | प्रतिभा को मंच | स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण

 

रिलेटेड पोस्ट्स