के.डी. हॉस्पिटल में किडनी पीड़ितों को मिली सीआरआरटी मशीन की सौगात

मथुरा जनपद की पहली मशीन आईसीयू में भर्ती मरीजों के लिए होगी वरदान

मथुरा। के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर लगातार मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। शनिवार को संस्थान के चेयरमैन मनोज अग्रवाल और विशेषज्ञ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. सीताराम सिंह ने किडनी पीड़ितों के बेहतर इलाज के लिए कंटीन्यूअस रेनल रिप्लेसमेंट थेरेपीज (सीआरआरटी) मशीन का शुभारम्भ किया। मथुरा जनपद में लगने वाली पहली सीआरआरटी मशीन आईसीयू में भर्ती गम्भीर रोगियों के लिए वरदान साबित होगी।

विशेषज्ञ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. सीताराम सिंह का कहना है कि सीआरआरटी मशीन एक विशेष प्रकार की डायलिसिस मशीन होती है। इसका उपयोग आईसीयू में भर्ती गम्भीर रोगियों के लिए किया जाता है। जिन लोगों की किडनी अचानक काम करना बंद कर देती है या जिनका रक्तचाप बहुत असंतुलित या कम होता है, या जिनका खून बहुत पतला होता है, उनके उपचार में यह मशीन बहुत उपयोगी है।

डॉ. सीताराम सिंह बताते हैं कि नॉर्मल डायलिसिस मशीन लगभग 500 मिलीलीटर ब्लड लेती है, जिस मरीज के शरीर में पहले से ही खून की कमी हो उसकी हालत और ज्यादा खराब हो सकती है। डॉ. सिंह का कहना है कि नॉर्मल डायलिसिस महज दो घंटे में हो जाती है, लेकिन सीआरआरटी लगातार 24 घंटे तक चलती है तथा काफी कम ब्लड लेती है, इसलिए आईसीयू में सीआरआरटी का इस्तेमाल सबसे बेहतर है।

डॉ. सीताराम सिंह बताते हैं कि सीआरआरटी मशीन 24 घंटे धीरे-धीरे खून को साफ करती है। यह शरीर से यूरिया और क्रिएटिनिन जैसे जहरीले अपशिष्ट पदार्थों को लगातार बाहर निकालती रहती है। उन्होंने बताया कि सामान्य डायलिसिस की तुलना में यह प्रक्रिया बहुत धीमी होती है। इसलिए यह उन मरीजों के लिए सुरक्षित है जिनका ब्लड-प्रेशर बहुत कम या अस्थिर रहता है। यह मशीन शरीर में जमे अतिरिक्त पानी और सूजन को नियंत्रित करने में भी मदद करती है। शरीर में सोडियम, पोटेशियम और एसिड-बेस के स्तर को भी सामान्य बनाए रखती है।

डॉ. सिंह का कहना है कि सीआरआरटी मशीन का इस्तेमाल आजकल गम्भीर रूप से बीमार किडनी फेलियर वाले मरीजों के लिए इंटेंसिव केयर यूनिट में ज्यादा किया जा रहा है क्योंकि यह शरीर पर कम दबाव डालती है। सीआरआरटी, स्टैंडर्ड डायलिसिस तकनीकों की तुलना में शरीर से कचरा और तरल पदार्थ को ज्यादा आराम से निकालती है। यह बहुत ज़रूरी है, क्योंकि एक्यूट किडनी फेलियर वाले गम्भीर रूप से बीमार मरीजों में, जिन्हें डायलिसिस की जरूरत होती है, मृत्यु दर 50 प्रतिशत से ज्यादा देखी गई है। डॉ. सीताराम सिंह का कहना है कि सीआरआरटी एक जटिल थेरेपी है, जिसके सही इस्तेमाल के लिए डॉक्टरों और नर्सों को खास जानकारी और अनुभव होना बहुत जरूरी है।

के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के चेयरमैन मनोज अग्रवाल का कहना है कि हमारा उद्देश्य मरीजों को कम लागत में उच्च गुणवत्ता और सही समय पर इलाज सुनिश्चित करना है। श्री अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में लगातार बदलाव हो रहे हैं, ऐसे में हमारा प्रयास है कि के.डी. हॉस्पिटल में हर रोग के जांच और उपचार की बेहतर सुविधाएं हों ताकि किसी मरीज को महानगरों की तरफ न भागना पड़े।

चित्र कैप्शनः सीआरआरटी मशीन के शुभारम्भ अवसर उपस्थित संस्थान के चेयरमैन मनोज अग्रवाल एवं विशेषज्ञ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. सीताराम सिंह।

 

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