ग्लास्गो में भारत का उम्मीदों से अच्छा रहा प्रदर्शन
शूटिंग-कुश्ती जैसे 9 बड़े खेल नहीं होने के बावजूद भारत ने जीते 39 पदक
खेलपथ संवाद
नई दिल्ली। स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में 2026 राष्ट्रमंडल खेलों का अंत हो चुका है। भारत ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य समेत कुल 39 पदक अपने नाम किए और चौथे स्थान पर रहा। पहली नजर में यह आंकड़ा निराशाजनक लग सकता है, क्योंकि 1998 के बाद पहली बार भारत 50 पदकों का आंकड़ा नहीं छू सका, लेकिन यदि इन खेलों की परिस्थितियों और प्रतियोगिताओं की संख्या को देखा जाए तो यह अभियान भारत के राष्ट्रमंडल खेल इतिहास के सबसे सफल प्रदर्शनों में से एक माना जाएगा।
वहीं, ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में ऑस्ट्रेलिया 70 स्वर्ण, 45 रजत और 56 कांस्य समेत कुल 171 पदकों के साथ पहले स्थान पर रहा। इंग्लैंड 29 स्वर्ण, 45 रजत और 36 कांस्य समेत 110 पदकों के साथ दूसरे और कनाडा 19 स्वर्ण, 20 रजत और 23 कांस्य समेत 62 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। आइए जानते हैं कि भारत का यह अभियान कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास के सर्वश्रेष्ठ अभियानों में से क्यों है...
राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का इतिहास: भारत का राष्ट्रमंडल खेलों में लम्बा और गौरवशाली इतिहास रहा है। भारतीय दल ने अब तक आयोजित अधिकांश संस्करणों में हिस्सा लिया है। केवल 1930, 1950, 1962 और 1986 के राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने भाग नहीं लिया। भारत ने पहली बार 1934 में लंदन में आयोजित तब के ब्रिटिश एम्पायर गेम्स (वर्तमान राष्ट्रमंडल खेल) में हिस्सा लिया था। आजादी के बाद पहली बार भारत ने 1954 में राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लिया था। 1966 में पहली बार पदकों की संख्या ने 10 को पार किया।
1934 में मिला पहला पदक: 1934 में भारतीय दल में केवल छह एथलीट शामिल थे, जिन्होंने एथलेटिक्स और कुश्ती में भाग लिया। इसी संस्करण में भारत ने अपना पहला राष्ट्रमंडल पदक जीता। पहलवान रशीद अनवर ने पुरुषों के 74 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में कांस्य पदक जीतकर राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के पहले पदक विजेता बनने का गौरव हासिल किया।
मिल्खा सिंह ने दिलाया पहला स्वर्ण: शुरुआती वर्षों में भारत के लिए पदक जीतना आसान नहीं था। हालांकि, 1958 के कार्डिफ राष्ट्रमंडल खेल भारत के लिए ऐतिहासिक साबित हुए। महान धावक मिल्खा सिंह ने पुरुषों की 440 यार्ड दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को पहला स्वर्ण दिलाया। उसी संस्करण में पहलवान लीला राम ने पुरुषों के 100 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में स्वर्ण जीतकर भारत के खाते में दूसरा गोल्ड जोड़ा।
महिला खिलाड़ियों ने भी रचा इतिहास: कार्डिफ 1958 भारतीय महिला खिलाड़ियों के लिए भी खास रहा। एथलेटिक्स की स्टेफनी डी'सूजा और एलिजाबेथ डेवनपोर्ट राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। इसके बाद भारतीय महिलाओं का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया।
कुश्ती और भारोत्तोलन ने बदली भारत की तस्वीर: 1970 और 1980 के दशक में भारतीय कुश्ती ने राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की सफलता की नई कहानी लिखी। शुरुआती वर्षों में पुरुष खिलाड़ियों का दबदबा रहा, लेकिन बाद में महिला खिलाड़ियों ने भी शानदार प्रदर्शन करना शुरू किया। 1978 के एडमोंटन राष्ट्रमंडल खेलों में अमी घिया और कंवल ठाकर सिंह बैडमिंटन महिला युगल में कांस्य जीतकर राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं। भारोत्तोलन में भी भारत ने बड़ी सफलता हासिल की। दो बार के ओलंपियन राघवन चंद्रशेखरन ने 1990 राष्ट्रमंडल खेलों में फ्लाईवेट वर्ग में तीन स्वर्ण पदक जीते। इसके बाद 1994 विक्टोरिया खेलों में उन्होंने तीन रजत पदक अपने नाम किए।
जसपाल राणा सबसे सफल भारतीय खिलाड़ी: दिवंगत भारतीय निशानेबाज जसपाल राणा राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में भारत के सबसे सफल खिलाड़ी हैं। उन्होंने कुल 15 पदक जीते, जिनमें नौ स्वर्ण, चार रजत और दो कांस्य शामिल हैं। 1990 और 2000 के दशक में उन्होंने भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
2010 में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन: भारत का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रमंडल अभियान 2010 में नई दिल्ली में आयोजित खेलों में देखने को मिला। मेजबान भारत ने 38 स्वर्ण, 27 रजत और 36 कांस्य सहित कुल 101 पदक जीतकर पदक तालिका में दूसरा स्थान हासिल किया। यह आज भी राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जाता है।
2000 के बाद लगातार शीर्ष देशों में भारत: साल 2000 के बाद से भारत लगातार राष्ट्रमंडल खेलों की पदक तालिका में शीर्ष पांच देशों में शामिल रहा है। 2018 के गोल्ड कोस्ट खेलों में भारत ने 26 स्वर्ण, 20 रजत और 20 कांस्य सहित 66 पदक जीतकर तीसरा स्थान हासिल किया। उस संस्करण में टेबल टेनिस स्टार मनिका बत्रा चार पदकों के साथ भारत की सबसे सफल खिलाड़ी रहीं।
ग्लास्गो 2026 क्यों है सबसे खास?
ग्लासगो 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीते। कई पारंपरिक खेल कार्यक्रम से बाहर होने के बावजूद भारतीय दल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया और यह अभियान राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में भारत के उल्लेखनीय प्रदर्शनों में शामिल हो गया।
सिर्फ 10 खेलों तक सिमटा ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल
ग्लास्गो में इस वजह से पदकों का नुकसान: ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में वित्तीय कारणों से खेलों की संख्या घटाकर केवल 10 कर दी गई। इसके चलते कई ऐसे खेलों को कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया, जो वर्षों से भारत के लिए सबसे अधिक पदक दिलाने वाले खेल रहे हैं।
कौन-कौन से खेल नहीं थे: ग्लास्गो खेलों से निशानेबाजी (भारत के 135 ऐतिहासिक CWG पदक), कुश्ती (114 पदक), बैडमिंटन (31 पदक), टेबल टेनिस (28 पदक) और हॉकी (6 पदक) जैसे खेल हटा दिए गए। वित्तीय सीमाओं के कारण इन खेलों को शामिल नहीं किया गया, जबकि यही खेल लंबे समय से भारत की पदक जीतने की सबसे बड़ी ताकत रहे हैं।
बर्मिंघम 2022 में इन्हीं पांच खेलों से आए थे आधे से ज्यादा पदक: बर्मिंघम 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने कुल 61 पदक जीते थे। इनमें से 30 पदक और 13 स्वर्ण पदक सिर्फ इन पांच खेलों से आए थे। यानी ग्लास्गो 2026 शुरू होने से पहले ही भारत की पारंपरिक पदक जीतने की सबसे बड़ी उम्मीदें खत्म हो चुकी थीं। हालांकि भारतीय दल ने इसे निराशा का कारण नहीं बनने दिया। खिलाड़ियों ने उपलब्ध खेलों में बेहतर प्रदर्शन कर संभावित पदक नुकसान की भरपाई करने का लक्ष्य बनाया।
मौजूदा खेलों में झोंकी पूरी ताकत: अपने सबसे सफल खेलों के बिना उतरे भारतीय दल ने रणनीति बदली और जिन खेलों में प्रतियोगिताएं आयोजित हुईं, उनमें अधिकतम पदक जीतने पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। यही रणनीति भारत के लिए सफल साबित हुई।
स्कॉटलैंड को पीछे छोड़ चौथे स्थान पर रहा भारत: भारतीय दल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। भारत से आगे केवल ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा रहे। मेजबान स्कॉटलैंड और भारत दोनों ने 39-39 पदक जीते, लेकिन अधिक रजत पदक होने के कारण भारत को चौथा स्थान मिला।
हर खेल में लगभग चार पदक जीतने का रिकॉर्ड: ग्लास्गो 2026 में शामिल 10 खेलों में भारत ने औसतन प्रति खेल 3.90 पदक जीते। प्रति खेल पदकों का यह औसत राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है। कम खेलों और सीमित अवसरों के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने उपलब्ध मंच पर अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया।
ग्लास्गो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स पदक तालिका (फाइनल)
रैंक देश स्वर्ण रजत कांस्य कुल पदक
कुल पदकों के आधार पर ओवरऑल रैंक
1 ऑस्ट्रेलिया 70 45 56 171 1
2 इंग्लैंड 29 45 36 110 2
3 कनाडा 19 20 23 62 3
4 भारत 13 17 9 39 4
5 स्कॉटलैंड (मेजबान देश) 13 9 17 39 4
6 न्यूजीलैंड 10 14 12 36 6
7 नाइजीरिया 10 7 7 24 9
8 जमैका 10 4 5 19 10
9 वेल्स 9 10 12 31 7
10 मलयेशिया 8 3 5 16 11
ग्लास्गो 2026 में किन खेलों में भारत ने दिखाया दम?
मुक्केबाजी में भारत का ऐतिहासिक दबदबा: ग्लास्गो 2026 में भारत की सबसे बड़ी सफलता मुक्केबाजी में मिली। 14 मुक्केबाजों के दल ने 10 पदक जीते, जिनमें सात स्वर्ण और तीन रजत शामिल रहे। महिला वर्ग में प्रीति पवार, जैस्मिन लांबोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घंघास और अरुंधति चौधरी ने स्वर्ण पदक जीते, जबकि पुरुष वर्ग में सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल चैंपियन बने। राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में यह किसी एक देश का मुक्केबाजी में सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन माना जा रहा है।
जूडो और एथलेटिक्स में भी बना इतिहास: जूडो में हर्ष सिंह और अस्मिता डे ने भारत को राष्ट्रमंडल खेलों का पहला स्वर्ण दिलाकर इतिहास रच दिया। वहीं यामिनी मौर्य ने रजत और उन्नति शर्मा ने कांस्य जीतकर भारत का सर्वश्रेष्ठ जूडो अभियान पूरा किया।
एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स: इनमें भारत ने कुल 16 पदक जीते। नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक में रजत पदक हासिल किया। गुलवीर सिंह एक ही संस्करण में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एथलीट बने। तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में भारत का पहला राष्ट्रमंडल पदक जीता।
पैरा खिलाड़ियों और मीराबाई ने भी बढ़ाया गौरव: पैरा खिलाड़ियों ने सात पदक जीतकर इतिहास रच दिया। शर्मिला धनखड़, दिलीप महादू गवित और सोमन राणा ने स्वर्ण पदक अपने नाम किए।
भारोत्तोलन में फिर हुए कामयाब: मीराबाई चानू के नेतृत्व में भारत ने भारोत्तोलन में फिर से कई पदक जीते। मीराबाई ने महिला 48 किलोग्राम भार वर्ग में लगातार तीसरा राष्ट्रमंडल स्वर्ण जीतकर भारत के आठ पदकों वाले वेटलिफ्टिंग अभियान की अगुआई की। टीम ने इस खेल में एक स्वर्ण, छह रजत और एक कांस्य पदक जीता।
ग्लास्गो 2026 में भारत के पदक विजेता कौन-कौन हैं?
स्वर्ण पदक विजेता (13)
क्रम खिलाड़ी स्पर्धा खेल
1 मीराबाई चानू महिला 48 किग्रा भारोत्तोलन
2 शर्मिला धनखड़ महिला शॉटपुट F57 पैरा एथलेटिक्स
3 दिलीप महादू गावित पुरुष 100 मीटर T47 पैरा एथलेटिक्स
4 अस्मिता डे महिला 48 किग्रा जूडो
5 हर्ष सिंह पुरुष 60 किग्रा जूडो
6 प्रीति पवार महिला 54 किग्रा मुक्केबाजी
7 जैस्मिन लंबोरिया महिला 57 किग्रा मुक्केबाजी
8 सोमन राणा पुरुष शॉटपुट F57 पैरा एथलेटिक्स
9 साक्षी चौधरी महिला 51 किग्रा मुक्केबाजी
10 अरुंधति चौधरी महिला 70 किग्रा मुक्केबाजी
11 प्रिया घंघास महिला 60 किग्रा मुक्केबाजी
12 सचिन सिवाच पुरुष 60 किग्रा मुक्केबाजी
13 अंकुश पुरुष 70 किग्रा मुक्केबाजी
रजत पदक विजेता (17)
क्रम खिलाड़ी स्पर्धा खेल
1 ऋषिकांत सिंह पुरुष 60 किग्रा भारोत्तोलन
2 राजा मुथुपांडी पुरुष 65 किग्रा भारोत्तोलन
3 ज्ञानेश्वरी यादव महिला 53 किग्रा भारोत्तोलन
4 सरवेश कुशारे पुरुष हाई जंप एथलेटिक्स
5 वल्लुरी अजया बाबू पुरुष 79 किग्रा भारोत्तोलन
6 हरजिंदर कौर महिला 69 किग्रा भारोत्तोलन
7 गुलवीर सिंह पुरुष 10,000 मीटर एथलेटिक्स
8 मुरली श्रीशंकर पुरुष लंबी कूद एथलेटिक्स
9 मोहम्मद बासिल पुरुष 100 मीटर T47 पैरा एथलेटिक्स
10 लवप्रीत सिंह पुरुष +110 किग्रा भारोत्तोलन
11 यामिनी मौर्य महिला 57 किग्रा जूडो
12 नीरज चोपड़ा पुरुष भालाफेंक एथलेटिक्स
13 प्रवीण चित्रावेल पुरुष ट्रिपल जंप एथलेटिक्स
14 जादूमणि सिंह पुरुष 55 किग्रा मुक्केबाजी
15 शुभम जुयाल पुरुष शॉटपुट F57 पैरा एथलेटिक्स
16 लवलीना बोरगोहेन महिला 75 किग्रा मुक्केबाजी
17 नरेंद्र बेरवाल पुरुष +90 किग्रा मुक्केबाजी
कांस्य पदक विजेता (9)
क्रम खिलाड़ी स्पर्धा खेल
1 झंडू कुमार पुरुष हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग
2 बिंदियारानी देवी महिला 58 किग्रा भारोत्तोलन
3 शिल्पा के. शायला महिला शॉटपुट F57 पैरा एथलेटिक्स
4 सीमा कालीरामना महिला डिस्कस थ्रो एथलेटिक्स
5 यशवीर सिंह पुरुष भालाफेंक एथलेटिक्स
6 तेजस्विन शंकर पुरुष डेकाथलॉन एथलेटिक्स
7 सेल्वा प्रभु थिरुमरन पुरुष ट्रिपल जंप एथलेटिक्स
8 गुलवीर सिंह पुरुष 5000 मीटर एथलेटिक्स
9 उन्नति शर्मा महिला 63 किग्रा जूडो
राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के मुख्य पड़ाव के बारे में जानें
लंदन 1934: भारतीय खिलाड़ी पहली बार टूर्नामेंट में उतरे। छह एथलीटों ने 10 ट्रैक एंड फील्ड इवेंट्स और एक कुश्ती स्पर्धा में भाग लिया। भारत ने तब अपना पहला पदक जीता था। उसे पुरुषों की 74 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती स्पर्धा में राशिद अनवर ने रजत पदक दिलाया था। वह राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी हैं।
सिडनी 1938: भारत ने मुख्य रूप से साइकिलिंग में हिस्सा लिया था, लेकिन एक भी पदक नहीं मिला।
वैंकूवर 1954: भारत 1947 में आजाद होने के बाद पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में उतरा। उसने 1950 ऑकलैंड राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं लिया था। 1954 में भारत के एथलीटों ने कुछ खेलों में हिस्सा लिया, लेकिन एक भी पदक नहीं जीत पाए।
कार्डिफ 1958: भारत को पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक मिला। महान धावक मिल्खा सिंह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण अपने नाम करने वाले पहले पहले भारतीय खिलाड़ी बने। उन्होंने पुरुषों की 440 यार्ड स्पर्धा में पहला स्थान हासिल किया। कुश्ती में पहलवान लीला राम ने पुरुषों की 100 किग्रा फ्रीस्टाइल स्पर्धा में भारत को स्वर्ण दिलाया। इस साल पहली बार भारतीय महिला एथलीट राष्ट्रमंडल खेलों में उतरीं। ट्रैक एंड फील्ड एथलीट स्टेफनी डिसूजा और एलिजाबेथ डेवनपोर्ट ने हिस्सा लिया था। कुश्ती में लक्ष्मीकांत पांडेय ने रजत पदक अपने नाम किया था।
किंग्सटन, जमैका 1966: भारत ने 1962 पर्थ राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं लिया था। 1966 में भारत को तीन स्वर्ण, चार रजत और तीन कांस्य मिला। इस तरह भारत ने 10 पदक अपने नाम किए। यह अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। भारत की तीनों स्वर्ण कुश्ती में मिले। दो रजत और दो कांस्य भी इसी खेल से आए
