दर्जी के बेटे लवप्रीत सिंह ने रचा इतिहास
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता रजत पदक
खेलपथ संवाद
जालंधर। पंजाब के अमृतसर जिले के बल सचंदर गांव के वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों के +110 किलोग्राम भारवर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। लवप्रीत ने स्नैच में 176 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 212 किलोग्राम सहित कुल 388 किलोग्राम वजन उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया। इससे पहले उन्होंने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीता था।
लवप्रीत की सफलता सिर्फ खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और परिवार के त्याग की मिसाल भी है। साधारण परिवार से आने वाले लवप्रीत के पिता किरपाल सिंह दर्जी का काम करते हैं, जबकि उनके दादा गुरमेज सिंह और चाचा सब्जियां बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि प्रशिक्षण पर जाने से पहले लवप्रीत रोज सुबह पांच बजे अपने दादा और चाचा के साथ सब्जी मंडी जाकर ट्रकों से सब्जियां उतारने में मदद करते थे। इसके बाद ही वह अभ्यास के लिए निकलते थे।
लवप्रीत ने आठवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान वेटलिफ्टिंग शुरू की। गांव के खिलाड़ियों से प्रेरित होकर उन्होंने इस खेल में करियर बनाने का सपना देखा। उनके पिता बताते हैं कि गांव के ही एक खिलाड़ी के राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीतने पर पूरे गांव ने जश्न मनाया था। उसी खुशी को देखकर उन्होंने अपने बेटे को भी खेलों में आगे बढ़ाने का फैसला किया।
मेहनत का पहला बड़ा फल उन्हें नौवीं कक्षा में मिला, जब उन्होंने अपना पहला राज्यस्तरीय पदक जीता। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। प्रशिक्षण स्थल घर से काफी दूर था। रोजाना उनके पिता उन्हें साइकिल से बस स्टॉप तक छोड़ते थे, जहां से वह ऑटो-रिक्शा लेकर कॉलेज के मैदान में अभ्यास के लिए पहुंचते थे। किरपाल सिंह कहते हैं, "यही हमारी रोज की दिनचर्या थी। संघर्ष की शुरुआत वहीं से हुई थी।"
अपने बेटे की उपलब्धि पर भावुक हुए किरपाल सिंह ने कहा, "पहले कांस्य और अब रजत पदक जीतने के बाद मेरी खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। यह सब ईश्वर की कृपा है। हमने ऐसे दिन देखने की कभी कल्पना भी नहीं की थी।" लवप्रीत की यह उपलब्धि पंजाब के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।
