शॉटपुट एफ-57 में महेंद्रगढ़ की शर्मिला धनखड़ ने जीता गोल्ड
9.81 मीटर के बेस्ट थ्रो से भारत को दिलाया दूसरा स्वर्ण पदक
गांव छितरौली और पूरे हरियाणा में जश्न का माहौल
खेलपथ संवाद
ग्लासगो/नारनौल। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के गांव छितरौली की पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला शॉटपुट एफ-57 स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। 40 वर्षीय शर्मिला ने 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनके इस प्रदर्शन से भारत को खेलों का दूसरा स्वर्ण पदक मिला और देश की कुल पदक संख्या 10 पहुंच गई।
घाना की जिनाबू इसाह ने 8.65 मीटर के साथ रजत और नाइजीरिया की यूकारिया इयाजी ने 8.19 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता। भारत की शिल्पा चौथे स्थान पर रहीं। महेंद्रगढ़ की शर्मिला की सफलता संघर्ष, साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। दो वर्ष की उम्र में पोलियो से प्रभावित होने के बावजूद उन्होंने जीवन की कठिन चुनौतियों का सामना किया। 18 वर्ष की आयु में विवाह के बाद उन्हें वर्षों तक घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना झेलनी पड़ी। आखिरकार वह अपनी दोनों बेटियों के साथ मायके लौट आईं। बाद में दूसरे पति अजीत सिंह के प्रोत्साहन से उन्होंने पैरा एथलेटिक्स में कदम रखा। परिवार ने उनके प्रशिक्षण के लिए वर्ष 2023 में अपना घर तक बेच दिया।
34 वर्ष की उम्र में खेलों की शुरुआत करने वाली शर्मिला ने 2021 में राष्ट्रीय चैम्पियन बनने के बाद लगातार अपनी पहचान मजबूत की और अब कॉमनवेल्थ खेलों का स्वर्ण जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। मूल रूप से महेंद्रगढ़ जिले के छितरौली में जन्मी शर्मिला का रेवाड़ी में विवाह हुआ है। उनकी दो बेटियां हैं। बचपन में पोलियो के कारण एक पैर से दिव्यांग शर्मिला ने राष्ट्रीय स्तर पर शॉट पुट के साथ डिस्कस थ्रो में भी उन्होंने करीब आठ से 10 पदक जीते हैं।
शर्मिला की ऐतिहासिक जीत के बाद महेंद्रगढ़ जिले सहित पूरे हरियाणा में खुशी की लहर दौड़ गई। उनके पैतृक गांव छितरौली में परिजनों और ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया। लोगों ने इसे जिले और प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि शर्मिला की उपलब्धि युवा खिलाड़ियों, विशेषकर पैरा खिलाड़ियों के लिए बड़ी प्रेरणा है। भारत के लिए अब तक दो स्वर्ण, पांच रजत और तीन कांस्य सहित कुल 10 पदक आ चुके हैं। स्वर्ण पदक विजेताओं में मीराबाई चानू और शर्मिला धनखड़ शामिल हैं।
