मीराबाई चानू की निगाहें लगातार तीसरा स्वर्ण जीतने पर टिकीं
भारतीय भारोत्तोलक का लक्ष्य एशियाड के लिए अच्छी रिकवरी करना
खेलपथ संवाद
नई दिल्ली। टोक्यो ओलम्पिक की रजत पदक विजेता और स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ग्लासगो में 26 जुलाई को इतिहास रचने उत्तरेंगी। चानू लगातार तीसरे राष्ट्रमंडल खेल में स्वर्ण जीतने उतरेंगी, जो उनका लगातार चौथा पदक होगा, फिर भी उनकी निगाहें राष्ट्रमंडल से ज्यादा एशियाई खेलों पर हैं।
बर्मिंघम में तैयारी कर रहीं मीरा ने बताया कि किसी भी बड़े खेल से पहले खिलाड़ी की कोशिश उच्चस्तरीय फॉर्म पाने की रहती है, लेकिन वह ग्लासगो में ज्यादा जोर नहीं लगाएंगी। उनकी 200 किलो वजन उठाने की भी कोशिश नहीं रहेगी। वह अपनी पीक 19 सितम्बर से होने वाले एशियाई खेलों में हासिल करेंगी, जहां उनकी कोशिश अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ (205 किलोग्राम वजन) को पीछे छोड़ने की होगी।
चानू ग्लासगों में 48 किलो में खेलेंगी, जबकि एशियाड में उन्हें 49 किलो में खेलना है। चानू को मालूम है कि यह 48 किलो में उनका अंतिम टूर्नामेंट है। यह भार अब ओलम्पिक से बाहर हो गया है। मीरा ने इस भार में साल 2014 में रजत, 2018 में गोल्डकोस्ट में स्वर्ण और 49 किलो में बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। चानू कहती हैं कि वह फुल लोड नहीं लेकर एशियाड के लिए अच्छी तरह रिकवरी करना चाहती हैं।
चानू पहली बार भारतीय दल की ध्वजवाहक बनने जा रही है। मीरा कहती हैं हैं कि उनका सपना था कि वह किसी खेल के उद्द्घाटन समारोह में तिरंगा उठाएं। हमेशा उद्घाटन के अगले दिन कम्पटीशन रहने के चलते वह चाहकर भी ध्वजवाहक नहीं बन पाती थीं। इस बार कम्पटीशन समारोह के बाद है, जिससे उन्हें यह मौका मिल गया। भारतीय टीम के कोच विजय शर्मा के मुताचिक, मीरा के सामने नाइजीरिया की रूथ असोडको और मलयेशिया की इरिन जेन हेनरी की चुनौती हैं। रूथ ने बीते वर्ष भारत में राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में 167 किलो से रजत और इरिन ने 161 किलो से कांस्य जीता था। ऐसे में मीरा के सामने यहां बड़ी चुनौती नहीं है।
