पहले से अधिक मजबूत होकर रिंग में करूंगी वापसीः निकहत ज़रीन
दो बार की विश्व चैम्पियन ने सर्जरी के बाद साझा की स्वास्थ्य जानकारी
जांबाज मुक्केबाज ने डॉक्टरों और रिलायंस फाउंडेशन का जताया आभार
खेलपथ संवाद
नई दिल्ली। भारत की स्टार मुक्केबाज़ और दो बार की विश्व चैम्पियन निकहत ज़रीन ने घुटने की सफल सर्जरी के बाद अपने प्रशंसकों को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि पिछले कई महीनों से घुटने के दर्द से जूझने के बाद आखिरकार उनकी सर्जरी सफलतापूर्वक हो गई है। अब उनका पूरा ध्यान रिकवरी पर है और उन्होंने भरोसा जताया है कि वह पहले से अधिक मजबूत होकर रिंग में वापसी करेंगी।
निकहत ज़रीन ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर भावुक संदेश साझा करते हुए कहा कि जीवन में आने वाली चुनौतियां उन्हें रोक नहीं सकतीं। उन्होंने लिखा कि पिछले कुछ महीने शारीरिक और मानसिक रूप से काफी कठिन रहे, लेकिन अब उनके नए सफर की शुरुआत हो चुकी है।
'यह अंत नहीं, सिर्फ एक छोटा विराम है'
निकहत ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा,"जिंदगी ने मेरे सामने एक कठिन चुनौती रखी, लेकिन मैंने इससे और मजबूत होकर लौटने का फैसला किया है। पिछले कुछ महीनों से घुटने के दर्द से जूझ रही थी, जिसने अंततः सर्जरी तक पहुंचा दिया। अब मेरी रिकवरी शुरू हो गई है। मैं धैर्य, विश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ एक-एक कदम आगे बढ़ूंगी। मुझे पूरा भरोसा है कि अल्लाह मेरे लिए इससे भी बेहतर कुछ तैयार कर रहे हैं। यह अंत नहीं, बल्कि सिर्फ एक छोटा सा विराम है। मैं जल्द ही पहले से ज्यादा मजबूत होकर लौटूंगी।"
डॉक्टरों और रिलायंस फाउंडेशन का जताया आभार
निकहत ज़रीन ने अपनी पोस्ट में कोकिलाबेन धीरूभाई अम्बानी अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर डॉ. दिनशॉ परदीवाला और उनकी पूरी मेडिकल टीम का विशेष धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और अस्पताल के स्टाफ ने उनकी बेहतरीन देखभाल की। इसके अलावा उन्होंने अपने सहयोगी संगठन रिलायंस फाउंडेशन स्पोर्ट्स का भी आभार व्यक्त किया, जिसने उपचार और रिकवरी के दौरान हर कदम पर उनका साथ दिया।
राष्ट्रीय ट्रायल में मिली थी अप्रत्याशित हार
निकहत ज़रीन के लिए वर्ष 2026 अब तक चुनौतीपूर्ण रहा है। मई में पटियाला में आयोजित राष्ट्रीय चयन ट्रायल में उन्हें अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। महिलाओं के 51 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में साक्षी चौधरी ने उन्हें 4-1 से हराकर फाइनल की दौड़ से बाहर कर दिया। इस हार के कारण निकहत 2026 राष्ट्रमंडल खेल (कॉमनवेल्थ गेम्स) और एशियाई खेलों की भारतीय टीम में जगह बनाने से चूक गईं। यह उनके करियर के सबसे बड़े झटकों में से एक माना गया। निकहत को हराने के बाद साक्षी चौधरी ने फाइनल में मौजूदा 48 किलोग्राम विश्व चैम्पियन मीनाक्षी हुड्डा को 5-0 से हराकर 51 किलोग्राम वर्ग का राष्ट्रीय खिताब अपने नाम किया।
मीनाक्षी हुड्डा ने इससे पहले सेमीफाइनल में पूर्व विश्व चैम्पियन और कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 की स्वर्ण पदक विजेता नीतू घनघस को हराया था। हालांकि मीनाक्षी का मुख्य वर्ग 48 किलोग्राम है, लेकिन यह भार वर्ग न तो एशियाई खेलों और न ही कॉमनवेल्थ गेम्स के कार्यक्रम में शामिल है। इसी कारण उन्होंने 51 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा की। निकहत ज़रीन भारतीय महिला मुक्केबाज़ी की सबसे सफल खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं। उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है।
उनकी प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं: दो बार विश्व मुक्केबाज़ी चैम्पियन बनने का गौरव। 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई स्वर्ण और पदक। भारतीय महिला मुक्केबाज़ी को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका। अपनी आक्रामक शैली, तेज फुटवर्क और तकनीकी दक्षता के कारण निकहत लम्बे समय से भारतीय मुक्केबाज़ी की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल रही हैं।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि घुटने की सर्जरी के बाद किसी भी मुक्केबाज़ के लिए जल्दबाजी में वापसी करना उचित नहीं होता। इसलिए निकहत फिलहाल पूरी तरह फिटनेस हासिल करने, पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) और फिजियोथेरेपी पर ध्यान देंगी। मेडिकल टीम की निगरानी में उनकी रिकवरी चरणबद्ध तरीके से होगी ताकि भविष्य में चोट दोबारा न उभरे।
निकहत ज़रीन के संघर्ष और सकारात्मक सोच ने एक बार फिर यह साबित किया है कि बड़े खिलाड़ी मुश्किल परिस्थितियों में भी हार नहीं मानते। राष्ट्रीय ट्रायल में हार और फिर सर्जरी जैसी चुनौतियों के बावजूद उनका आत्मविश्वास बरकरार है। भारतीय मुक्केबाज़ी प्रेमियों को उम्मीद है कि निकहत जल्द पूरी तरह फिट होकर रिंग में वापसी करेंगी और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फिर से देश के लिए पदक जीतेंगी। उनका संदेश यह भी दिखाता है कि खेलों में सफलता केवल जीत से नहीं, बल्कि कठिन समय में धैर्य, विश्वास और दृढ़ संकल्प बनाए रखने से भी हासिल होती है।
