युवा पीढ़ी को खेलों से जोड़कर सकारात्मक दिशा प्रदान करें

भारत को सशक्त खेल महाशक्ति बनाने में अपना योगदान दें

खेलपथ संवाद

ग्वालियर। खेल केवल पदक जीतने के माध्यम के साथ लोगों को जोड़ने, राष्ट्र निर्माण करने और विश्व बंधुत्व की भावना को सशक्त बनाने का प्रभावी साधन भी हैं। जिस प्रकार जैव-विविधता प्रकृति को संतुलित, समृद्ध और सशक्त बनाती है, उसी प्रकार खेलों की विविधता समाज को स्वस्थ, अनुशासित, आत्मविश्वासी और ऊर्जावान बनाती है।" यह कहना है आदर्श गौशाला  ग्वालियर के स्वामी ऋषभ देवानंद का।

स्वामी ऋषभ देवानंद कहते हैं कि हॉकी भारत की गौरवशाली विरासत, खेल संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है। आवश्यकता है कि हम हॉकी सहित सभी पारम्परिक खेलों को प्रोत्साहन दें, खिलाड़ियों को सम्मान, अवसर और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएँ तथा युवा पीढ़ी को खेलों से जोड़कर सकारात्मक दिशा प्रदान करें।"

उन्होंने कहा कि हर गाँव में खेल मैदान, हर बच्चे के हाथ में खेल का अवसर और हर खिलाड़ी को उचित पहचान मिले— यही एक सशक्त, स्वस्थ, आत्मनिर्भर और समरस भारत की दिशा है।" "आइए, हॉकी को अपनाएँ, खेलों की विविधता को बढ़ावा दें, खिलाड़ियों का सम्मान करें और भारत को एक सशक्त खेल महाशक्ति बनाने में अपना योगदान दें।"

 

 

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