भारत को थॉमस कप में पदक मिलने के बाद भी खिलाड़ी निराश
स्वागत न होने से सात्विक-चिराग नाराज, बोले- किसी को फर्क नहीं पड़ता
खेलपथ संवाद
नई दिल्ली। भारत की स्टार पुरुष युगल जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी का एक सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। थॉमस कप 2026 में भारत को कांस्य पदक दिलाने के बाद दोनों खिलाड़ियों ने इंस्टाग्राम स्टोरी शेयर की, जिसने फैंस का ध्यान खींच लिया। पोस्ट में भारतीय टीम की दो तस्वीरें थीं। एक टूर्नामेंट के लिए डेनमार्क रवाना होते समय और दूसरी वापसी के बाद की। लेकिन तस्वीरों से ज्यादा चर्चा नीचे लिखे मैसेज की हो रही है।
सात्विक ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा, 'अब घर वापस आ गए हैं। हमेशा की तरह किसी को नहीं पता कि पिछले दो हफ्तों में क्या हुआ, और ऐसा लगता है कि किसी को सच में इसकी परवाह भी नहीं है।' इस पोस्ट को चिराग शेट्टी ने भी अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किया। हालांकि दोनों खिलाड़ियों ने साफ तौर पर किसी संस्था या व्यक्ति का नाम नहीं लिया, लेकिन फैंस ने इसे टीम को मिले फीके स्वागत और कम पहचान से जोड़कर देखा।
पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई फैंस ने निराशा जताई। लोगों का कहना था कि देश के लिए पदक जीतकर लौटने वाले खिलाड़ियों का स्वागत ज्यादा सम्मानजनक होना चाहिए था। कुछ यूजर्स ने लिखा कि क्रिकेट के मुकाबले बैडमिंटन जैसे खेलों की उपलब्धियों को उतनी चर्चा नहीं मिलती, जबकि खिलाड़ी लगातार देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
भारत ने थॉमस कप 2026 में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। यह पुरुष टीम का सिर्फ दूसरा पदक था और 2022 के स्वर्ण पदक के बाद पहला पोडियम फिनिश रहा। भारत की ओर से सात्विक-चिराग, लक्ष्य सेन और आयुष शेट्टी ने शानदार प्रदर्शन किया। टीम सेमीफाइनल तक पहुंची, जहां उसे फ्रांस से 0-3 से हार का सामना करना पड़ा।
सेमीफाइनल मुकाबले में भारत को बड़ा झटका तब लगा, जब लक्ष्य सेन चोट के कारण नहीं खेल सके। उन्हें चीनी ताइपे के खिलाफ मैच में चोट लगी थी। इसके अलावा सात्विक-चिराग भी मुकाबले में नहीं उतर सके, जिसका फायदा फ्रांस को मिला और उसने सभी तीन सिंगल्स मैच जीत लिए।
इस वायरल पोस्ट ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या भारत में गैर-क्रिकेट खेलों के खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के अनुसार सम्मान और पहचान मिलती है या नहीं। सात्विक और चिराग की यह नाराजगी सिर्फ एक पोस्ट नहीं, बल्कि उन खिलाड़ियों की भावना मानी जा रही है जो लगातार मेहनत कर देश के लिए पदक जीतते हैं।
