बागपत की मिट्टी में तपकर सोने सी चमकी पायल नाग
भारतीय तीरंदाज बेटी ने हौसले को बनाया हथियार
खेलपथ संवाद
बागपत। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की धरती से जुड़ी पैरा तीरंदाज पायल नाग ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वर्णिम सफलता हासिल कर देश का नाम रोशन किया है। बैंकॉक में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में पायल नाग ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। उनकी इस जीत की खास बात यह रही कि उन्होंने विश्व चैम्पियन और ओलम्पिक पदक विजेता शीतल देवी को हराकर यह उपलब्धि हासिल की।
पायल नाग मूल रूप से ओडिशा के बालंगीर की रहने वाली हैं, लेकिन वर्ष 2023 से वह बागपत जिले के धनौरा टीकरी गांव स्थित वेदवान तीरंदाजी अकादमी से जुड़ी हुई हैं। यहां कोच कुलदीप वेदवान के मार्गदर्शन में वह लगातार अभ्यास कर रही हैं। कभी दिल्ली तो कभी बागपत में अभ्यास करते हुए उन्होंने अपने संघर्ष को साधना में बदल दिया।
पायल नाग की कहानी असाधारण साहस की मिसाल है। वह बिना हाथ-पैर के तीरंदाजी करती हैं। कृत्रिम पैर के सहारे वह धनुष को संतुलित करती हैं और कंधे की मदद से तीर खींचकर सटीक निशाना साधती हैं। उनका हर निशाना यह साबित करता है कि हौसला मजबूत हो तो शारीरिक सीमाएं भी रास्ता नहीं रोक सकतीं।
धनौरा टीकरी गांव निवासी कोच कुलदीप वेदवान ने पायल की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें तीरंदाजी की राह दिखाई। कोच के मार्गदर्शन और पायल की कड़ी मेहनत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में गर्व और खुशी का माहौल है। वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में स्वर्ण पदक जीतने के बाद पायल नाग की नजर अब पैरालम्पिक खेलों पर है। वह लगातार अभ्यास कर अपनी तकनीक को और बेहतर बना रही हैं ताकि देश के लिए पैरालम्पिक में भी पदक जीत सकें।
पायल नाग के जीवन में यह संघर्ष सात साल की उम्र में शुरू हुआ। उनके पिता विजय कुमार छत्तीसगढ़ के रायपुर में राजमिस्त्री का काम करते थे। जिस भवन में उनके पिता काम कर रहे थे, वहीं दूसरी मंजिल पर खेलते समय पायल बिजली के तारों की चपेट में आ गई। इस हादसे में पायल की जान तो बच गई, लेकिन दोनों हाथ और पैर गंवाने पड़े।
पायल बताती हैं कि उस समय उन्हें लगा कि जिंदगी अब बोझ बन जाएगी। लोगों की आंखों में अपने लिए सिर्फ हमदर्दी दिखाई देती थी। लेकिन उसी हमदर्दी ने उनके भीतर हिम्मत जगाई और उन्होंने ठान लिया कि जिंदगी में कुछ ऐसा करना है जिससे उनकी अपनी अलग पहचान बने। आज वही बेटी अपनी मेहनत और हौसले से दुनिया के मंच पर भारत और बागपत का नाम रोशन कर रही है।
पायल का उपलब्धियों भरा सफरः छठीं पैरा नेशनल तीरंदाजी चैम्पियनशिप में दो स्वर्ण, खेलो इंडिया गेम्स में दो रजत, सातवीं पैरा नेशनल चैम्पियनशिप में एक रजत और एक कांस्य, दुबई पैरा यूथ खेल में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
