विपक्षी गेंदबाजों में खौफ देखना चाहते हैं हम

तिलक वर्मा ने खोला टीम इंडिया का मंत्र

खेलपथ संवाद

चेन्नई। तिलक वर्मा ने कहा कि शुरू में विकेट गंवाने के बावजूद भारत मौजूदा टी20 विश्व कप में अपने आक्रामक रवैए पर कायम रहेगा क्योंकि इससे विपक्षी टीम के गेंदबाजों में खौफ पैदा होता है। भारत ने सभी बल्लेबाजों के उपयोगी योगदान से जिंबॉब्वे के खिलाफ सुपर आठ मैच में चार विकेट पर 256 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया और इसके बाद 72 रन से आसान जीत दर्ज की।

तिलक ने मैच के बाद कहा कि हम बस ऐसा ही प्रदर्शन चाहते थे। हम एक टीम के रूप में अच्छा स्कोर बनाना चाहते थे। हमने इस पर चर्चा की कि अगर हम पावर प्ले में तीन या चार विकेट भी खो दें तब भी आक्रामक अंदाज में ही बल्लेबाजी करेंगे। इस संदर्भ में तिलक ने संजू सैमसन की प्रशंसा की। रिंकू सिंह के स्थान पर अंतिम एकादश में शामिल किए गए सैमसन ने 15 गेंदों में 24 रन बनाए और अभिषेक शर्मा के साथ पहले विकेट के लिए 3.4 ओवरों में 48 रन जोड़े।

तिलक ने कहा कि जब सलामी बल्लेबाज अच्छी शुरुआत देते हैं तो इससे तीसरे, चौथे और पांचवें नम्बर के बल्लेबाजों का भी आत्मविश्वास बढ़ता है। संजू ने शानदार शुरुआत की। हमने इसको लेकर चर्चा की थी और हम विपक्षी गेंदबाजों में यह खौफ देखना चाहते हैं कि भारतीय बल्लेबाज हर गेंद पर जोरदार शॉट लगाने के लिए तैयार हैं।

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सुपर आठ के अपने पहले मैच में भारतीय बल्लेबाज बुरी तरह लड़खड़ा गए थे। तिलक ने कहा कि खिलाड़ियों ने चेपॉक में खेले गए मैच से पहले पिछले टी20 मैचों के वीडियो देखे। हमने मैच से ठीक पहले चर्चा की थी कि हम सकारात्मक मानसिकता के साथ मैदान में उतरेंगे। हमने पिछले एक साल में टी20 क्रिकेट में अपने प्रदर्शन को देखा।

इन वीडियो को देखने के बाद हम सभी का आत्मविश्वास बढ़ा। मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी टीम के सदस्यों को बिना किसी झिझक के अपना स्वाभाविक खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। गौतम सर ने यह भी कहा कि परिस्थिति चाहे कैसी भी हो, बस उस तरह की क्रिकेट को याद रखें जो हमने पिछले साल से तथा न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू श्रृंखला में खेली थी।

पिछले मैचों के वीडियो देखने और गंभीर के प्रेरणादायक शब्दों से बल्लेबाजों की मानसिकता में बदलाव आया। अहमदाबाद और दिल्ली दोनों की पिचें अच्छी थीं, लेकिन इस खेल में मानसिकता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मुझे लगता है कि हमारी मानसिकता यह थी कि अगर कोई विकेट गिरता है तो हम बड़े शॉट खेलने के लिए थोड़ा समय लेंगे। हम पहले भी उस टीम के खिलाफ खेल चुके थे।

उस समय हम खेल का पूरा आनंद ले रहे थे और सारा दबाव विपक्षी गेंदबाजों पर होता था। अगर विकेट गिरता तो हम अगली ही गेंद पर छक्का मार देते थे। इसलिए, हमारी सोच कुछ इस तरह की थी। हमने चर्चा की कि अगर पहली गेंद हमारी जद में आती है तो हम उस पर छक्का मारने में नहीं हिचकिचाएंगे।

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