दंत चिकित्सकों को दी कैंसर की रोकथाम और स्क्रीनिंग की जानकारी
के.डी. डेंटल कॉलेज में निवारक ऑन्कोलॉजी पर सीडीई आयोजित
मथुरा। के.डी. डेंटल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल में नियमित दंत चिकित्सा अभ्यास में कैंसर की रोकथाम, स्क्रीनिंग और जोखिम मूल्यांकन की वर्तमान अवधारणाओं से प्रशिक्षुओं, स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं और संकाय सदस्यों को अवगत कराने के लिए शुक्रवार को निवारक ऑन्कोलॉजी विषय पर सतत दंत शिक्षा (सीडीई) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अतिथि वक्ता डॉ. मनीषा लखनपाल शर्मा ने मौखिक और सामान्य ऑन्कोलॉजी में शीघ्र निदान और रोकथाम-उन्मुख रणनीतियों के महत्व पर प्रकाश डाला। सतत दंत शिक्षा कार्यक्रम का शुभारम्भ विद्या की आराध्य देवी मां सरस्वती के छायाचित्र पर मार्ल्यापण और दीप प्रज्वलित कर किया गया।
के.डी. विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी ने इस शैक्षणिक पहल की सराहना करते हुए गुणवत्तापूर्ण दंत चिकित्सा शिक्षा के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। डॉ. लाहौरी ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में निरंतर बदलाव हो रहे हैं, ऐसे बदलावों से प्रत्येक भावी दंत चिकित्सक को अवगत कराना ही संस्थान का एकमात्र उद्देश्य है। के.डी. डेंटल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. नवप्रीत कौर ने अतिथि वक्ता का स्वागत किया और दैनिक नैदानिक प्रशिक्षण में निवारक ऑन्कोलॉजी को एकीकृत करने पर बल दिया।
अतिथि वक्ता डॉ. मनीषा लखनपाल शर्मा अनुभवी शिक्षाविद और दंत चिकित्सक हैं। इन्हें मौखिक चिकित्सा के साथ ऑन्कोलॉजी शिक्षा में व्यापक अनुभव है। अरिस्टो फार्मास्युटिकल द्वारा प्रायोजित सतत दंत शिक्षा कार्यक्रम में अतिथि वक्ता डॉ. मनीषा शर्मा ने कैंसर की रोकथाम के प्रमुख सिद्धांतों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि निवारक ऑन्कोलॉजी का उद्देश्य न केवल कैंसर को होने से रोकना है, बल्कि शुरुआती स्तर पर ही बीमारी को पकड़कर बेहतर जीवन की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी है।
अतिथि वक्ता ने बताया कि जब कैविटी बढ़ती है और दांत की भीतरी परतों तक पहुंच जाती है, तो वह दर्दनाक फोड़े और संक्रमण का कारण बन जाती है। सीडीई में उन्होंने उच्च जोखिम वाले घावों की पहचान, तम्बाकू और शराब से होने वाले जोखिम तथा दंत चिकित्सालय में जीवनशैली संशोधन परामर्श के महत्व पर प्रकाश डाला। व्याख्यान में व्यावहारिक चेयरसाइड स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल, संदिग्ध घावों का दस्तावेजीकरण, रेफरल प्रक्रियाएं और मुख एवं सिर-गर्दन के कैंसर से जुड़ी रुग्णता और मृत्यु दर को कम करने में नियमित फॉलो-अप की भूमिका को शामिल किया गया।
डॉ. मनीषा शर्मा ने निवारक ऑन्कोलॉजी में शीघ्र निदान और रोगी परामर्श में दंत चिकित्सक की भूमिका पर विशेष बल दिया। के.डी. डेंटल कॉलेज के स्नातक प्रशिक्षुओं, स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं और संकाय सदस्यों ने संवादात्मक चर्चाओं और केस-आधारित सत्रों में भाग लिया। इससे भावी दंत चिकित्सक निवारक ऑन्कोलॉजी को विस्तार से समझ सके। सीडीई के समापन अवसर पर के.डी. डेंटल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. नवप्रीत कौर ने कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी, अतिथि वक्ता डॉ. मनीषा लखनपाल शर्मा तथा अरिस्टो फार्मास्युटिकल का शैक्षणिक सफलता में अमूल्य योगदान के लिए आभार माना। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित कर किया गया। सीडीई की सफलता में कमेटी सदस्य डॉ. सिद्धार्थ सिसोदिया, डॉ. अनुज गौड़, डॉ. मनीष भल्ला, डॉ. विवेक शर्मा, डॉ. राजीव एवं डॉ. जुही दुबे का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सीडीई में विभागाध्यक्ष डॉ. विनय मोहन, डॉ. हस्ती, डॉ. सोनल गुप्ता एवं डॉ. अजय नागपाल उपस्थित रहे।
चित्र कैप्शनः अतिथि वक्ता डॉ. मनीषा लखनपाल शर्मा का स्वागत करते कुलपति डॉ. मनेष लाहौरी साथ में हैं प्राचार्या डॉ. नवप्रीत कौर। दूसरे चित्र में अतिथि वक्ता डॉ. मनीषा लखनपाल शर्मा के साथ प्रतिभागी छात्र-छात्राएं।
