मुजफ्फरपुर में योग प्रशिक्षकों के साथ पीएचसी प्रभारियों की नादरशाही

पिछला भुगतान नहीं, जारी कर दिया नई नियुक्तियों का फरमान

खेलपथ संवाद

मुजफ्फरपुर। जिले के हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटरों पर तैनात पीएचसी प्रभारी नियम-कायदों को बला-ए-ताक रखकर योग प्रशिक्षकों को परेशान करने का कोई मौका जाया नहीं कर रहे। योग प्रशिक्षकों की बहाली के लिये सिविल सर्जन डॉ. अजय कुमार द्वारा दिए गए निर्देशों को भी पीएचसी प्रभारी मानने को तैयार नहीं हैं। अलबत्ता प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कुढनी ने 27 अगस्त, 2025 को नया फरमान जारी कर राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार द्वारा चार जनवरी, 2021 को जारी नियमावली को ही ठेंगा दिखा दिया है। इस नियमावली में स्पष्ट उल्लेख है कि पीएचसी प्रभारी योग प्रशिक्षकों की नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं रखते।

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कुढनी में पूर्व में सेवा दे चुके योग प्रशिक्षक साधना कुमारी, नंदनी कुमारी और अमलेश कुमार ने संयुक्त हस्ताक्षरों से पीएचसी प्रभारी को पत्र लिखा है कि उन्हें अयोग्यता के चलते नहीं बल्कि बजट न होने का हवाला देकर 25 मई, 2024 को सेवा से बेदखल किया गया था। हम आपको बता दें कि इन्हीं तीन योग प्रशिक्षकों ने पटना हाईकोर्ट में वाद दायर किया हुआ है। इन योग प्रशिक्षकों का अदालत की शरण पहुंचना जिला कार्यक्रम अधिकारी और पीएचसी प्रभारी को रास नहीं आ रहा, इसीलिए वे योग प्रशिक्षकों को मानसिक परेशान कर रहे हैं। इन योग प्रशिक्षकों को पूर्व का मानदेय भुगतान भी अभी तक नहीं किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि सम्मानित योग प्रशिक्षकों को उनका पिछला भुगतान न करना पड़े इसीलिए यह खेल खेला जा रहा है। सम्भावना तो यह है कि मुजफ्फरपुर के योग प्रशिक्षकों के पिछले मानदेय का बंदरबांट होने की वजह से ही नई नियुक्ति का फरमान जारी किया गया है। हम आपको बता दें कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कुढनी ही नहीं मुजफ्फरपुर के अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में भी योगसत्र नहीं चल रहे हैं। पीएचसी प्रभारियों की इस नादरशाही के खिलाफ राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार भी पत्र लिख चुकी है, लेकिन जिला कार्यक्रम अधिकारी और पीएचसी प्रभारी अपनी आदत में सुधार नहीं ला रहे।

अधिकारियों की इस नादरशाही से योग प्रशिक्षक परेशान हैं वहीं डीएम और सिविल सर्जन के आदेशों की अवहेलना पर अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई तथा योगसत्र क्यों चालू नहीं हुए यह भी जांच का विषय है। हम आपको बता दें यह योग प्रशिक्षक जब पीएचसी प्रभारियों के पास जाकर डीएम और सिविल सर्जन के आदेशों का हवाला देते हैं तो उन्हें बजट न होने की बात कहकर वापस लौटा दिया जाता है। अब सवाल यह उठता कि यह पीएचसी प्रभारी क्या डीएम और सिविल सर्जन से बड़े हैं या यह खेल जिला कार्यक्रम अधिकारी की शह पर हो रहा है।

हम आपको बता दें कि सिविल सर्जन ने निर्देश जारी करते हुए सभी योग प्रशिक्षकों को लेटर भी जारी किया है। यह दुख की बात है कि जिले के 128 योग प्रशिक्षक फिलवक्त साजिश का शिकार हैं। यह योग प्रशिक्षक अपनी समस्या को लेकर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय से भी मिल चुके हैं लेकिन वह भी अपने आपको असहाय मान रहे हैं। हम आपको बता दें कि बिना दवा के यह डॉक्टर योग कक्षाओं में आम जनता को थायराइड, बीपी, डायबिटीज, एसिडिटी, माइग्रेन, जोड़ों में दर्द, कमर में दर्द, सर्दी-जुकाम, इम्युनिटी बूस्टर के लिए जरूरी आसन प्राणायाम और ज्ञान देते हैं। योग प्रशिक्षकों को अनहक परेशान करने से तो यही लगता है कि बिहार की जनता से अधिक स्वास्थ्य मंत्री और नौकरशाह मानसिक बीमार हैं।

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