खेल दिवस पर चीन की चुनौती का सामना करेगी भारतीय हॉकी टीम

एशिया कप के जरिए विश्व कप का टिकट कटाने की होगी कोशिश

खेलपथ संवाद

राजगीर। बिहार के राजगीर में हॉकी एशिया कप का आयोजन हो रहा है। यह टूर्नामेंट भारतीय हॉकी टीम के लिए बेहद खास होने वाला है और टीम इसे जीतकर अगले साल होने वाले वर्ल्ड कप के लिए अपनी जगह पक्की करना चाहेगी। शुक्रवार को खेल दिवस पर भारतीय टीम चीन की मजबूत चुनौती का सामना करने उतरेगी।

तीन बार की चैम्पियन भारतीय हॉकी टीम अपने हालिया खराब फॉर्म को भुलाकर पुरुष एशिया कप हॉकी टूर्नामेंट 2025 जीतने के इरादे से मैदान पर उतर रही है। यह टूर्नामेंट भारत के लिए बेहद अहम है क्योंकि खिताबी जीत के साथ ही अगले साल होने वाले विश्व कप 2026 में जगह बनाने का रास्ता साफ होगा। भारत का पहला मुकाबला शुक्रवार को चीन से खेला जाएगा।

भारत और चीन को पूल ए में जापान और कजाखस्तान के साथ रखा गया है। वहीं पूल बी में पांच बार की चैम्पियन दक्षिण कोरिया, मलेशिया, बांग्लादेश और चीनी ताइपै की टीमें हैं। कजाखस्तान तीन दशक बाद एशिया कप में वापसी कर रही है, जिसने इस बार ओमान की जगह ली है वहीं बांग्लादेश की जगह पाकिस्तान को खेलना था, लेकिन सुरक्षा कारणों से उसने अपना नाम वापस ले लिया।

अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले और उसके बाद भारत के ऑपरेशन सिंदूर के मद्देनज़र पाकिस्तान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर एशिया कप से नाम वापस ले लिया। इससे टूर्नामेंट में नया संतुलन बना है और कजाखस्तान को मौका मिला है। प्रत्येक पूल से शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी। फाइनल मुकाबला 7 सितम्बर को खेला जाएगा। यही टूर्नामेंट भारत के लिए विश्व कप में क्वालीफाई करने का अंतिम और सर्वश्रेष्ठ मौका है।

भारत ने इस साल एफआईएच प्रो लीग में बेहद खराब प्रदर्शन किया। टीम ने आठ में से सिर्फ एक मैच जीता और लगातार सात मैच गंवा दिए। नतीजतन भारत सातवें स्थान पर खिसक गया और सीधा क्वालीफाई करने का मौका गंवा बैठा। इसी कारण अब कोच क्रेग फुल्टोन पर दबाव है कि वे एशिया कप में अपनी सर्वश्रेष्ठ टीम उतारें।

भारतीय टीम ने प्रो लीग में आठ मैचों में 26 गोल गंवाए, जिसमें डिफेंडरों की गलतियां साफ नजर आईं। कप्तान हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई में इस बार डिफेंस को मजबूती देनी होगी। पेनल्टी कॉर्नर भी चिंता का विषय है, क्योंकि ज्यादातर जिम्मेदारी हरमनप्रीत पर ही रहती है। उनकी गैरमौजूदगी में अमित रोहिदास, जुगराज सिंह और संजय उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं। अनुभवी पी.आर. श्रीजेश के संन्यास के बाद गोलकीपिंग भारतीय टीम की सबसे कमजोर कड़ी मानी जा रही है। कृष्ण बहादुर पाठक हवा में आती गेंदों पर नियंत्रण नहीं रख पा रहे, वहीं सूरज करकेरा दबाव झेलने में नाकाम दिखे हैं।

हालांकि भारत ने 2023 एशियाई खेलों और 2024 एशियाई चैम्पियंस ट्रॉफी में 14 मैचों में कुल 94 गोल दागे थे। टीम की आक्रामकता उसकी सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन एशिया कप 2022 की तरह इस बार भी टीम को आत्ममुग्धता से बचना होगा। पिछली बार भारत को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा था।

चीन को हल्के में नहीं ले सकता भारत

पहले मुकाबले में भारत का सामना विश्व रैंकिंग में 23वें स्थान पर काबिज चीन से होगा। भले ही चीन की टीम अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती हो, लेकिन उसके खिलाड़ी जवाबी हमलों में माहिर हैं। 2009 में मलेशिया में हुए एशिया कप में चीन तीसरे स्थान पर रह चुका है। चीन अब तक केवल एक बार 2008 में ओलम्पिक खेल चुका है, जब वह 11वें स्थान पर रहा था। वहीं 2018 विश्व कप में चीन 10वें स्थान पर रहा। खास बात यह है कि चीन की मौजूदा टीम में अधिकांश खिलाड़ी मंगोलिया से आते हैं, जहां पारंपरिक खेल बेइकू हॉकी से काफी मिलता-जुलता है। टूर्नामेंट के पहले दिन भारत-चीन मैच के अलावा अन्य रोमांचक मुकाबले भी होंगे। मलेशिया का सामना बांग्लादेश से, दक्षिण कोरिया का मुकाबला चीनी ताइपे से और जापान का मैच कजाखस्तान से होगा।

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