अर्जुन अवॉर्डी कपिल परमार धोखेबाज भारतीय दृष्टिहीन खिलाड़ी

इंटरनेशनल कोच जसपाल सिंह ने पैरा खेलों के पैरोकारों को लिखे पत्र
खेलपथ संवाद
नई दिल्ली। पेरिस पैरालम्पिक के कांस्य पदकधारी जूडो खिलाड़ी कपिल परमार की दृष्टिहीनता को एक अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक ने चुनौती दी है। जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम के इंटरनेशनल कोच जसपाल सिंह ने पैरा खेलों के पैरोकारों को भेजे पत्र में लिखा है कि कपिल एक धोखेबाज भारतीय दृष्टिहीन खिलाड़ी है, वह नकली है। उन्होंने इसकी जांच कर फरेबी खिलाड़ी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का आग्रह किया है।
कोच जसपाल सिंह ने लिखा कि 2024 पेरिस पैरालम्पिक खेलों में पुरुषों की 60 किलोग्राम जे1 पैरा जूडो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ी कपिल परमार ने कांस्य पदक जीता था। इस खिलाड़ी को उसके बाद अर्जुन अवॉर्ड भी मिला। दरअसल, कपिल परमार ने जिस श्रेणी में कांस्य पदक जीता, उस पर सम्भावित वर्गीकरण उल्लंघन का मामला बनता है। कोच जसपाल सिंह के अनुसार आईबीएसए वर्गीकरण दिशानिर्देशों के अनुसार, जे1 श्रेणी केवल उन एथलीटों के लिए आरक्षित है जोकि पूरी तरह से दृष्टिहीन हैं।
भारत के पैरा खेल समुदाय में इस बात के पर्याप्त प्रमाण और व्यापक चिन्ता है कि कपिल परमार जे1 वर्गीकरण के लिए आवश्यक दृष्टिबाधित मानदंडों को पूरा नहीं करते। कई उदाहरणों से पता चलता है कि उनके पास कार्यात्मक दृष्टि है, जो उन्हें इस श्रेणी के लिए अयोग्य बनाती है। इससे वर्गीकरण प्रक्रिया की अखंडता और प्रतियोगिता की निष्पक्षता पर गम्भीर प्रश्न उठते हैं। जसपाल सिंह एक राष्ट्रीय स्तर के पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी और अंतरराष्ट्रीय कोच ही नहीं पैरा खेलों में पारदर्शिता और समावेशिता को बढ़ावा देने को भी पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने पैरा खेलों के पैरोकारों से मामले की गहन जाँच करने का आग्रह किया है।
कोच जसपाल सिंह ने भारतीय पैरालम्पिक संघ से कपिल परमार के वर्गीकरण दस्तावेज़ों और चिकित्सा मूल्यांकन की औपचारिक समीक्षा करने, पेरिस पैरालम्पिक खेलों से पहले अपनाई गई वर्गीकरण प्रक्रियाओं की एक स्वतंत्र जाँच करने तथा संदिग्ध गलत वर्गीकरण के संबंध में आईपीसी के रुख और प्रोटोकॉल के मुताबिक कठोर कार्रवाई करने का आग्रह किया है। कोच ने यहां तक लिखा कि यदि आवश्यक हो, तो मैं सहायक साक्ष्य और गवाहों के बयान देने के लिए तैयार हूँ। उन्होंने चिन्ता जताई कि जो खिलाड़ी पूरी तरह से दृष्टिहीन है ही नहीं वह लोगों की आंखों में धूल झोंक रहा है। कोच का मानना है कि सभी एथलीट समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा करें और पैरालम्पिक आंदोलन की निष्पक्षता और विश्वसनीयता के उच्चतम मानकों को बनाए रखें।
अर्जुन अवॉर्डी कपिल परमार की जहां तक बात है वह मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव शिवोर से आते हैं। वह चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे हैं। कपिल के पिता एक टैक्सी ड्राइवर हैं। कपिल को बचपन से खेलों से लगाव रहा। वह जब खेलों में उड़ान भरने के सपने देख रहे थे तभी एक दिन अपने गांव के खेत में खेलते समय गलती से पानी के पम्प को छू लिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें गम्भीर बिजली का झटका लगा। वह छह माह तक कोमा में रहे। इस झटके के बावजूद, कपिल का जूडो के प्रति प्यार, जिसे उन्होंने स्कूल में खेलने में आनंद लिया, कभी कम नहीं हुआ। ठीक होने के बाद डॉक्टरों ने कपिल को वजन बढ़ाने की सलाह दी। इसी अवधि के दौरान उन्होंने अपने गुरु और कोच भगवान दास के प्रोत्साहन से ब्लाइंड जूडो में कदम रखा। भगवान दास ने ही कपिल को प्रतिस्पर्धी खेल में आगे बढ़ने को प्रेरित किया।