जहां पहुंचा तिरंगा, वहां दी जीत से सलामी

जीते हॉकी के दो एशिया कप ताज

क्रिकेट की शेरनियों ने आठवां साम्राज्य

खेलपथ विशेष

ग्वालियर। एक तरफ चीन के मोकी में भारतीय होनहार हॉकी की बेटियों ने लगातार तीसरी बार एशिया कप अपने नाम किया, तो कुछ ही देर बाद जूनियर जांबाजों ने कोरिया को चार गोलों से ध्वस्त कर छठी बार एशियाई चैम्पियन बनने का गौरव हासिल किया। और फिर दुबई से आई वह खबर, जिसने भारतीय खेलप्रेमियों के दिल को गर्व से भर दिया- भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने श्रीलंका को 72 रन से रौंदकर रिकॉर्ड आठवीं बार महिला एशिया कप जीत लिया। यह सिर्फ तीन ट्रॉफियाँ नहीं हैं। यह भारतीय खेल की नई तस्वीर है।

चीन के मेजबान शहर में हॉकी बेटियों का फाइनल था। सामने मेजबान चीन। मुकाबला बेहद कड़ा था। लेकिन भारतीय जूनियर बेटियों ने दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। सानिका चंद्रकांत माने ने 17वें मिनट में गोल दागा और यही गोल पूरे मुकाबले का निर्णायक क्षण बन गया। भारत ने 1-0 की बढ़त को आखिरी सीटी तक बचाए रखा और लगातार तीसरी बार महिला जूनियर एशिया कप की चैम्पियन बनी। सानिका पूरे टूर्नामेंट में चमकीं और सात गोल के साथ उनका योगदान भारत के अभियान में बेहद अहम रहा। खास बात यह कि भारत ने टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं गंवाया। यह जीत आज की नहीं, आने वाले कल की भी घोषणा है।

भारतीय बेटियों की विजय के बाद बारी थी बेटों की। फाइनल में सामने था दक्षिण कोरिया। भारतीय युवाओं ने शुरुआत से ही आक्रामक तेवर दिखाए और अंततः 4-1 की शानदार जीत के साथ पुरुष जूनियर एशिया कप अपने नाम कर लिया। यह भारत का इस प्रतियोगिता में छठा खिताब है। पूरे टूर्नामेंट में भारत का आक्रमण कहर बनकर टूटा। भारत ने पूल चरण में 14-0 और 15-0 जैसी बड़ी जीत दर्ज कीं और फाइनल तक अपना विजय अभियान जारी रखा। सबसे ज्यादा गोल करने वालों में भारत के अनमोल एक्का 17 गोल के साथ सबसे आगे रहे। यानी हॉकी की अगली पीढ़ी ने दस्तक नहीं दी है- दरवाजा तोड़ दिया है।

हॉकी के दोहरे जश्न के बीच दुबई में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एक और सुनहरा अध्याय लिख दिया। फाइनल में श्रीलंका सामने था। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 183/5 का मजबूत स्कोर खड़ा किया। सलामी बल्लेबाज शैफाली वर्मा ने 68 और स्मृति मंधाना ने 59 रन की शानदार पारियाँ खेलीं। दोनों ने 130 रन की जोरदार साझेदारी से भारत को विस्फोटक शुरुआत दी। शैफाली ने केवल 24 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया। यह महिला टी20 एशिया कप इतिहास का सबसे तेज अर्धशतक है। लेकिन असली कहानी अभी बाकी थी।

183 रन का लक्ष्य आसान नहीं था। श्रीलंका ने शुरुआत में संघर्ष किया, लेकिन भारतीय स्पिनरों ने धीरे-धीरे शिकंजा कसना शुरू कर दिया। श्री चरणी ने चार विकेट। दीप्ति शर्मा ने तीन विकेट। और श्रीलंका की पूरी टीम 111 रन पर ढेर। भारत की जीत 72 रन से। इसके साथ ही भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने रिकॉर्ड आठवीं बार महिला एशिया कप का ताज अपने सिर सजा लिया। पूरा टूर्नामेंट भारत ने अजेय रहते हुए समाप्त किया।

 तीन जीत, एक संदेश

इन तीनों विजयों को साथ रखिए। जूनियर हॉकी बेटियां चैम्पियन। जूनियर हॉकी बेटे चैम्पियन। महिला क्रिकेट टीम एशिया की चैम्पियन। तीन मैदान। तीन मुकाबले। तीन बार तिरंगा सबसे ऊपर। यह संयोग भर नहीं है। यह बताता है कि भारतीय खेल की बेंच पर बैठी अगली पीढ़ी अब सिर्फ सीख नहीं रही- वह जीतना सीख रही है।

“जहाँ तिरंगा पहुँचा, वहाँ जीत ने सलामी दी!”

चीन में हॉकी की नई पीढ़ी का जलवा, दुबई में शेरनियों की दहाड़- भारत का सुनहरा खेल-सप्ताह इतिहास के पन्नों में दर्ज। कभी खेलों में भारत की चर्चा कुछ चुनिंदा नामों और कुछ चुनिंदा खेलों तक सीमित समझी जाती थी। अब तस्वीर बदल रही है। आज हॉकी की युवा बेटियां एशिया पर राज कर रही हैं। युवा पुरुष हॉकी खिलाड़ी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। महिला क्रिकेटर एशिया कप की ट्रॉफी को बार-बार अपने नाम कर रही हैं। यह जीत की आदत बनने का दौर है। ‘खेलपथ’ की नजर में इस पूरे स्वर्णिम सप्ताह का सबसे बड़ा संदेश यही है- “तिरंगे के नीचे खेल रही नई पीढ़ी अब सपने देखने से आगे बढ़कर उन्हें सच करने लगी है।” सलाम इन बेटियों को। सलाम इन बेटों को। सलाम उस जुनून को, जो हर मैदान को हिन्दुस्तान बना देता है। जय हिन्द।

 

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