भारतीय सम्भावनाएं जताते एशियाई खेल
आइची-नागोया जापान में 19 सितम्बर से चार अक्टूबर तक होने वाले एशियाई खेलों में भारत इस बार 36 से अधिक खेल विधाओं में बड़ी संख्या में खिलाड़ियों के साथ उतर रहा है। भारत की उम्मीदें इस बार इसलिए भी बढ़ी हुई हैं क्योंकि पिछले एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 107 पदक (28 स्वर्ण, 39 रजत और 41 कांस्य) जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया था।
एथलेटिक्स भारत के लिए पदकों का प्रमुख आधार रहा है। 2022 के एशियाई खेलों में भारत ने एथलेटिक्स में 29 पदक जीते थे। इस बार नीरज चोपड़ा की गैरमौजूदगी में अविनाश साबले, तजिंदरपाल सिंह तूर, पारुल चौधरी और अन्नू रानी जैसे खिलाड़ियों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। निशानेबाजी में भारत के पास अनुभवी खिलाड़ियों के साथ नई प्रतिभाओं का भी मजबूत मिश्रण है। अंतिम तैयारियों के लिए भारतीय निशानेबाज भोपाल में विशेष प्रशिक्षण शिविर में जुटे हैं। एलावेनिल वलारिवन और मनीषा कीर जैसे निशानेबाज पदक की दावेदारों में शामिल हैं।
मुक्केबाजी में भी भारत की उम्मीदें मजबूत हैं। 11 मुक्केबाजों वाली टीम में लवलीना बोरगोहेन जैसे अनुभवी नाम शामिल हैं। युवा खिलाड़ियों का उत्साह और अनुभवी खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भारत के लिए अतिरिक्त लाभ हो सकता है। बैडमिंटन में पी. वी. सिंधु, लक्ष्य सेन और अन्य भारतीय खिलाड़ी चुनौती पेश करेंगे। कुश्ती में अंतिम पंघाल और अमन सहरावत जैसे खिलाड़ियों से पदक की उम्मीद है। हॉकी भी भारत की मजबूत पदक सम्भावनाओं में शामिल है। भारतीय महिला हॉकी टीम विश्व कप के बाद सीधे एशियाई खेलों की तैयारी में जुट गई है और स्वर्ण पदक के लिए अपना दावा मजबूत करना चाहती है।
क्रिकेट और कबड्डी में भारत अपनी पिछली सफलता को दोहराने की कोशिश करेगा। भारत की पुरुष और महिला क्रिकेट तथा कबड्डी टीमें पिछले एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता हैं और इस बार भी स्वर्ण की रक्षा करने उतरेंगी। भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसी मजबूत खेल शक्तियों से मुकाबला है। चीन ने 815 खिलाड़ियों का दल उतारा है और लगातार 12वीं बार पदक तालिका में शीर्ष पर रहने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा एशियाई खेलों में कई खेलों का स्तर विश्व स्तर का है, इसलिए केवल पिछला प्रदर्शन भविष्य की सफलता की गारंटी नहीं देता।
भारत ने खिलाड़ियों को जापान की परिस्थितियों के अनुकूल ढालने के लिए विशेष तैयारियाँ भी की हैं। यहाँ तक कि खिलाड़ियों को वहां की असामान्य आवास व्यवस्था का अनुभव कराने के लिए पटियाला और बेंगलुरु में कंटेनर जैसी आवासीय इकाइयों में रहने का अभ्यास कराया गया है।
कुल मिलाकर, 2026 के एशियाई खेलों में भारत के पास पिछले रिकॉर्ड को बेहतर करने की वास्तविक सम्भावना है। एथलेटिक्स, निशानेबाजी, मुक्केबाजी, बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी, कबड्डी और क्रिकेट भारत के पदक अभियान के प्रमुख आधार बन सकते हैं। यदि खिलाड़ी दबाव में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाए और चोटों से बचे रहे, तो भारत न केवल 2022 के 107 पदकों के आंकड़े को चुनौती दे सकता है, बल्कि पदक तालिका में चौथे स्थान से ऊपर उठने की कोशिश भी कर सकता है। भारतीय खेलों की बढ़ती गहराई और युवा प्रतिभाओं का उभार इस अभियान को विशेष रूप से आशाजनक बनाता है।
