हर हॉकी बेटी में खुद को साबित करने का जुनूनः सविता पूनिया
हॉकी बेटियों को अब मिलती है खुलकर अपनी बात रखने की आजादी
खेलपथ संवाद
एम्सटेलवीन। पिछले एक दशक से अधिक समय से भारतीय महिला हॉकी में कई उतार चढ़ाव देख चुकी दिग्गज गोलकीपर सविता पूनिया ने विश्व कप में शानदार प्रदर्शन का श्रेय टीम के भीतर बदले हुए माहौल को देते हुए कहा कि खिलाड़ियों की आंखों में कुछ कर दिखाने का भाव नजर आता है।
भारत ने अपने से ऊंची रैंकिंग वाली जर्मनी को 3-1 से हराकर विश्व कप में पांचवां स्थान हासिल किया जो 1974 के बाद महिला हॉकी टीम का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारत के लिये सर्वाधिक मैच खेलने के रिकॉर्ड की बराबरी से एक मैच दूर 319 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकी सविता ने कहा,''कोच शोर्ड मारिन और सारे नये स्टाफ के आने के बाद हमने यही तय किया था कि मैदान से बाहर आनंद लेना है, हंसना बोलना और बातें करना है।
पहले ऐसा नहीं था और मन की बात मन में ही रखते थे लेकिन आज हर खिलाड़ी काफी खुलकर एक दूसरे से बात करता है। आज मुझे जो भी बोलना है तो टीम से बोल सकती हूं।'' उन्होंने कहा,'' कोचिंग स्टाफ ने ऐसा माहौल दिया है कि अंदर से फीलिंग आती है कि कुछ कर दिखाना है। यह सभी खिलाड़ियों की आंखों में, वर्कआउट में, अभ्यास में दिखता है।''
पेरिस ओलम्पिक के लिये क्वालीफाई करने से चूकी और प्रो लीग से पिछले साल बाहर हुई भारतीय महिला हॉकी टीम ने इस साल विश्व कप के लिये क्वालीफाई किया और एफआईएच नेशंस कप जीतकर प्रो लीग में वापसी करने के बाद विश्व कप में पांचवें स्थान पर रही। भारतीय टीम विश्व कप में सिर्फ एक मैच नीदरलैंड से हारी लेकिन आस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे दौर का आखिरी मैच गोलरहित ड्रॉ रहने पर सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गई जिसके बाद डगआउट में आंसुओं पर काबू पाने की कोशिश करती सविता की तस्वीर काफी वायरल हुई थी।
इस अनुभवी गोलकीपर ने कहा,'' पीछे गोलपोस्ट में खड़ी मैं यही सोच रही थी कि जर्मनी के खिलाफ जो हॉकी खेली, उसका पचास प्रतिशत भी आस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलते तो सेमीफाइनल में होते। उस दिन मैं दुख के कारण रोई थी लेकिन आज खुशी के आंसू थे। बहुत सारे मैसेज आये कि आपको टीवी पर रोते हुए देखकर अच्छा नहीं लगा। लोगों ने यह भी कहा कि टीम पांचवें स्थान का मैच खेलेगी, यह किसी ने सोचा नहीं था।''
टोक्यो ओलम्पिक 2021 में भी पदक के करीब पहुंचकर चूकी इस खिलाड़ी ने कहा,'' लेकिन शायद उस झटके से उबरने के लिये मुझे भी समय चाहिये था। मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि उस दिन टीम ने भी मुझे संभाला और कहा कि अगले मैच में देखते हैं कि क्या कर सकते हैं।''
उन्होंने कहा,'' मुझे संभलने में दो घंटे लगे लेकिन उस दिन शाम को हम फिर साथ बैठे और बात की कि अब खोने के लिये कुछ नहीं है और अगर हमें अपनी हॉकी दिखानी है तो सम्मान लेना है तो हर हालत में पांचवें स्थान पर रहते हैं तो दुनिया को लगे कि हम सिर्फ एक मैच हारे हैं और सच में भारतीय हॉकी बेहतर हो रही है।''
सविता ने कहा, टोक्यो ओलम्पिक में भी पदक हाथ से निकल गया और अब विश्व कप से भी। लेकिन मुझे खुशी इस बात की है कि हम सही राह पर हैं और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर लॉस एंजिलिस ओलम्पिक के लिये क्वालीफाई करेंगे।'' उन्होंने कहा,''हमारी आक्रामक हॉकी बहुत अच्छी है और यही हमारी ताकत है। हम गर्व से सिर ऊंचा करके जाना चाहते हैं क्योंकि आगे एशियाई खेल में भाग लेना है और यहां से अच्छी फील लेकर जायेंगे। जो अच्छा है, उसे जारी रखेंगे और जो कमियां हैं उन पर काम करेंगे।''
उन्होंने कहा कि भारतीय टीम विरोधी पर फोकस करने की बजाय अपने खेल पर पूरा ध्यान दे रही है और आगे भी वही करेगी। उन्होंने कहा,'' सीनियर होने के नाते मैने काफी उतार चढ़ाव देखे हैं। अनुभव से पता चलता है कि मनोबल कैसे ऊपर लेकर जाना है और विषम परिस्थितियों से कैसे निकलना है। हमने फोकस नहीं गंवाया था और अनुशासित थे। हमने मैच दर मैच रणनीति बनाई और नतीजों के बारे में नहीं सोचा। हमने अपनी हॉकी पर फोकस रखा और आगे भी यही करेंगे।' टीम की उपलब्धि का जहां पूरा देश जश्न मना रहा था, वहीं सविता सोशल मीडिया पर महिला हॉकी लीग को बचाने की अपील में जुटी थीं क्योंकि उन्हें इन खिलाड़ियों में भविष्य की उम्मीद नजर आती है और वह चाहती हैं कि जीत का सिलसिला आगे भी बना रहे।
उन्होंने कहा, '11 खिलाड़ियों का यह पहला विश्व कप था और उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया। इससे लगता है कि भारतीय महिला हॉकी का भविष्य उज्ज्वल है। दो दिन पहले जो हम बात कर रहे थे कि महिला हॉकी लीग क्यों जरूरी है क्योंकि हमें पता है कि जमीनी स्तर पर खिलाड़ी बहुत अच्छे हैं। अगर लीग मिलेगी तो इस तरह का प्रदर्शन लगातार करने में मदद मिलेगी।'' वहीं जर्मनी के खिलाफ दो गोल करने वाली अनुभवी फॉरवर्ड नवनीत कौर ने कहा कि भारतीय महिला हॉकी के भविष्य के लिये भी उन्हें अच्छा खेलना ही था।
उन्होंने कहा,'' हम अपने लिये, परिवार के लिये और देश के लिये खेल रहे थे लेकिन हमें भारतीय महिला हॉकी के भविष्य के लिये भी अच्छा खेलना ही था ताकि भारत में और लड़कियां हॉकी खेलें। '' दो दिन पहले बातचीत में लीग को बचाने की अपील करने वाली नवनीत ने कहा,'' महिला हॉकी इंडिया लीग के लिये अब हमारी अपील को लोग समझेंगे कि हम सच में और अच्छा करना चाहते हैं और कर सकते हैं। हम ओलम्पिक के लिये क्वालीफाई करना चाहते हैं। इस विश्व कप में हमने जो किया है, अब हम में वह आत्मविश्वास आया है कि हम किसी भी टीम को हरा सकते हैं।''
