एमपी में अरबों निसार पर प्रशिक्षकों के मूल्यांकन का नहीं कोई सिस्टम तैयार
सुयोग्य प्रशिक्षक खेल विभाग से एक अदद प्रशस्ति-पत्र तक को मोहताज
बड़वानी कलेक्टर जयंती सिंह के खेलप्रेम की सर्वत्र हो रही प्रशंसा
खेलपथ संवाद
ग्वालियर। बीते लगभग 20 वर्षों में मध्य प्रदेश खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने खेलों के उत्थान और खेल अधोसंरचना पर कई अरब रुपये खर्च कर दिए लेकिन उसके पास आज भी सुयोग्य और जमीनी स्तर पर प्रशिक्षकों के मूल्यांकन का कोई ठोस सिस्टम नहीं है, इसकी वजह से प्रदेश और देश को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी देने वाले प्रशिक्षक विभाग से एक अदद प्रशस्ति-पत्र तक पाने को मोहताज हैं जबकि सर्वसुविधायुक्त एकेडमियों में कार्यरत प्रशिक्षकों को राज्य के खेल अवॉर्डों तथा तरह-तरह की सुविधाओं से प्रतिवर्ष नवाजा जा रहा है।
जो काम खेल एवं युवा कल्याण विभाग नहीं कर सका उसकी शुरुआत बड़वानी कलेक्टर जयंती सिंह ने की है। उन्होंने हाल ही में जापान में हुए जूनियर एशिया कप से कांस्य पदक जीतकर लौटी कुमारी स्नेहा दावदे का न केवल उत्साहवर्धन किया बल्कि उसके प्रारम्भिक प्रशिक्षक मुकेश राठौर की प्रशंसा करते हुए उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी मिलवाने की प्रशंसनीय पहल की। कलेक्टर जयंती सिंह की इस शुचिता और खेलप्रेम की जहां प्रशंसा हो रही है वहीं विभाग पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
देखा जाए तो जब कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि प्राप्त कर मध्य प्रदेश लौटता है तो उसका सारा श्रेय एकेडमी के मुख्य प्रशिक्षक को दिया जाता है जबकि किसी खिलाड़ी का प्रारम्भिक प्रशिक्षक परिदृश्य से ही ओझल कर दिया जाता है। यह पहली बार है जब बड़वानी कलेक्टर ने एक अच्छी परम्परा का श्रीगणेश किया है। बड़वानी कलेक्टर जयंती सिंह के प्रयासों से मध्य प्रदेश के प्रशिक्षकों को एक नई उम्मीद की किरण दिखी है। पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के प्रारम्भिक प्रशिक्षक को मान सम्मान मिलने से जमीनी प्रशिक्षकों में खुशी का माहौल है।
यह काम खेल विभाग के अधिकारी भी कर सकते थे परंतु ऐसी स्वस्थ परम्परा का श्रीगणेश तो कलेक्टर बड़वानी के हाथों लिखा था। खैर, कलेक्टर जयंती सिंह ने खेलों में प्रोत्साहन की जो लकीर खींची है उसका परिपालन यदि मध्य प्रदेश के हर जिले का कलेक्टर करेगा तभी जमीनी स्तर पर काम करने वाले प्रशिक्षकों का मान-सम्मान और अभिमान सुरक्षित रह पाएगा। उम्मीद है कि खेल विभाग अपनी गलती स्वीकारेगा तथा भविष्य में यह परम्परा खेल विभाग का हिस्सा बनेगी तथा प्रारम्भिक स्तर पर खिलाड़ी तैयार कर रहे खेल प्रशिक्षकों का मनोबल बढ़ाएगी।
हॉकी प्रशिक्षक अविनाश भटनागर की उपलब्धियों पर कब पहुंचेगी पारखी नजर
मध्य प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ दर्पण हॉकी फीडर सेंटर ग्वालियर के हॉकी प्रशिक्षक अविनाश भटनागर की उपलब्धियां किसी भी तरह से किसी से कम नहीं हैं लेकिन उन पर खेल विभाग की नजर ही नहीं है। श्री भटनागर के प्रयासों से मध्य प्रदेश को जहां सात विक्रम एवं एकलव्य अवार्डी खिलाड़ी मिले हैं वहीं दर्जनों राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अब तक प्रदेश का गौरव बढ़ा चुके हैं लेकिन उन्हें आज तक विश्वामित्र अवॉर्ड तो छोड़िये विभाग ने एक प्रशंसा पत्र तक देना मुनासिब नहीं समझा।
दर्पण मिनी स्टेडियम ग्वालियर के ये हैं दर्पण
कुमारी करिश्मा यादव विक्रम अवॉर्ड 2019, कुमारी नीरज राणा विक्रम अवॉर्ड 2021, कुमारी नेहा सिंह एकलव्य अवॉर्ड 2015, कुमारी इशिका चौधरी एकलव्य अवॉर्ड 2019, कुमारी करिश्मा यादव एकलव्य अवॉर्ड 2015, अंकित पाल एकलव्य अवॉर्ड 2023.
