अब स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर में निखरेगा होनहार मशीयत फातिमा का हुनर

रामपुर की होनहार गोलकीपर ने स्किल और फिजिकल टेस्ट में किया टॉप

खेलपथ संवाद

रामपुर। कुछ बच्चे जन्म से ही विलक्षण होते हैं, यदि उन्हें माता-पिता का सपोर्ट और प्रोत्साहन मिल जाए तो उनके लिए असम्भव शब्द ही मिथ्या साबित हो जाता है। रामपुर में हॉकी की शहजादी जन्म ले चुकी है। हाल ही में हुए हॉकी के चयन ट्रायल में रामपुर की 11 साल की होनहार मशशो यानी मशीयत फातिमा ने स्किल और फिजिकल टेस्ट में टॉप करते हुए गोरखपुर के वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में अपना दाखिला सुनिश्चित किया।  

ग्यारह वर्षीय हॉकी बेटी मशीयत फातिमा नौ वर्ष की उम्र से गोलकीपिंग का अभ्यास कर रही है। सुविधाओं का अभाव रहा लेकिन उसके मजबूत हाथों और माता-पिता ने साथ दिया। रामपुर नेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रबंधक माज़ नुसरत ने भी इस बेटी को गोलकीपिंग किट स्पॉंऩ्सर्ड कर अपना योगदान दिया।

कक्षा छह में राष्ट्रीय खिलाड़ी मुहम्मद विक़ार के आइडेंटिटी एजुकेशनल एकेडमी बग़ी में प्रवेश लिया और यहीं से अंडर 14 उत्तर प्रदेश हॉकी टीम में मुरादाबाद मंडल से चयनित हुई। इस बेटी ने ग्वालियर में हुई स्कूल नेशनल गेम्स की हॉकी स्पर्धा में न केवल हिस्सा लिया बल्कि उत्तर प्रदेश को कांस्य पदक दिलाकर अपने स्वर्णिम भविष्य का संकेत दिया।

क्रीड़ा अधिकारी संतोष कुमार और गोल कीपिंग कोच ओलम्पियन आर.एस. रावत से बेसिक ट्रेनिंग लेने वाली यह बेटी अपनी मेहनत और लगन से निरंतर आग बढ़ रही है तथा अपने प्रशिक्षक की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश कर रही है। हाल ही में हुए विद्यार्थी सम्मान सम्मान समारोह में पालिका अध्यक्षा और ज़िला अधिकारी ने हॉकी बेटी को सम्मानित कर उसका हौसला बढ़ाया।

पिता फ़रहत अली खान जोकि स्वयं योग्य और काबिल हॉकी प्रशिक्षक हैं, बताते हैं कि मशीयत फातिमा की अगर कोशिश इसी तरह जारी रही तो रामपुर की यह बेटी एक दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्र का गौरव जरूर बढ़ाएगी। फ़रहत अली खान ने हॉकी संघ के सचिव मुख्तार के सहयोग की सराहना करते हुए बताया कि आठ से चौदह आयु वर्ग में इसी स्तर की उनके पास पच्चीस बेटियां हैं, जिन्हें अभी प्लेटफार्म मिलना है। वे परिश्रम कर रहे हैं, उनके कौशल को निखार रहे हैं।

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