भारतीय मुक्केबाजी महासंघ को खेल मंत्रालय ने थमाया नोटिस
चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल, एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा
खेलपथ संवाद
नई दिल्ली। भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और खेल मंत्रालय ने भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) की चयन प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। खेल मंत्रालय ने सोमवार को बीएफआई को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
खेल मंत्रालय ने बीएफआई की चयन नीति को अस्पष्ट और पारदर्शिता से रहित बताया है। यह नोटिस ऐसे समय में जारी हुआ है जब एक दिन पहले ही साई ने पटियाला में आयोजित होने वाले मूल्यांकन शिविर को रोकने के निर्देश दिए थे। यह शिविर आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स के लिए मुक्केबाजों के चयन के उद्देश्य से आयोजित किया जाना था।
खेल मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय शिविर में खिलाड़ियों को शामिल करने के लिए अपनाए गए “दूसरे रास्ते” यानी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (सीओएएस) कप के मानदंड स्पष्ट नहीं हैं। यह टूर्नामेंट अप्रैल में पुणे स्थित आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में आयोजित हुआ था। आरोप है कि इसमें कुछ ऐसे मुक्केबाजों को हिस्सा लेने से रोक दिया गया जो सशस्त्र बलों से जुड़े नहीं थे। सीओएएस कप के 40 पदक विजेताओं को राष्ट्रीय कैम्प में मूल्यांकन के लिए बुलाया जाना था, लेकिन साई ने इस पर आपत्ति जताई। साई का कहना है कि बंद टूर्नामेंट के खिलाड़ियों को ऐसे कोचिंग पैनल के तहत शामिल किया जा रहा था जो अनुभव और योग्यता के मानकों पर खरे नहीं उतरते।
खेल मंत्रालय ने बीएफआई पर यह आरोप भी लगाया कि उसने कई बार याद दिलाने के बावजूद अभी तक हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर की नियुक्ति नहीं की है। मंत्रालय ने पिछले वर्ष सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) के लिए इस पद हेतु 10 करोड़ रुपये अलग रखने को अनिवार्य किया था। नोटिस में यह भी कहा गया है कि बीएफआई ने कोच और सपोर्ट स्टाफ की नियुक्ति के लिए बनाई गई चयन समिति में साई के महानिदेशक या उनके प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया, जबकि मंत्रालय के नियमों के तहत यह अनिवार्य है।
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं से संबंधित प्रस्ताव तय समयसीमा के भीतर जमा नहीं किए जा रहे हैं। नियमों के अनुसार, प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के प्रस्ताव खिलाड़ियों के नाम के बिना कम से कम 90 दिन पहले और खिलाड़ियों के नाम सहित 60 दिन पहले भेजे जाने चाहिए। सूत्रों के अनुसार, साई को कई शिकायतें मिली हैं कि मूल्यांकन शिविर के दौरान मुकाबलों के नतीजे तुरंत घोषित नहीं किए जाते थे। आरोप है कि बीएफआई की तथाकथित हाई परफॉर्मेंस यूनिट और चयन समिति आपसी चर्चा के बाद खिलाड़ियों के चयन पर फैसला लेने वाली थी। साई के एक सूत्र ने कहा, 'यह निष्पक्ष खेलभावना के खिलाफ है। यदि मामला अदालत तक जाता है तो साई को भी जवाब देना पड़ेगा, लेकिन बीएफआई हमारी पूछताछ का जवाब नहीं दे रहा है।' फिलहाल खेल मंत्रालय के नोटिस के बाद बीएफआई की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
