एशियाई खेलों से पहले हुआ भारतीय तीरंदाजों के साथ धोखा
तीरंदाजी कोच पागिनी टीम इंडिया की जगह कोरिया से जुड़े
खेलपथ संवाद
नई दिल्ली। एशियाई खेल सिर पर हैं और भारतीय तीरंदाजों के लिए विदेशी कोच का अनुबंध मुसीबत बनता जा रहा है। कुछ माह पूर्व तक यह तय था कि इटली के जाने-माने कोच सर्गियो पागिनी भारतीय कम्पाउंड तीरंदाजों को कोचिंग देंगे। उनका अनुबंध सिरे चढ़ने जा रहा था, लेकिन भारतीय टीम के पूर्व कोच रहे पागिनी को तीरंदाजी के मजबूत देश कोरिया से भारत के मुकाबले अधिक वेतन में प्रस्ताव मिल गया। पागिनी ने भारतीय तीरंदाजों को दरकिनार कर कोरियाई टीम का दामन थाम लिया।
अब 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक में शामिल की गई कम्पाउंड तीरंदाजी के लिए पूर्व विश्व चैम्पियन अमेरिकी तीरंदाज डेव कजिंस पर दांव लगाया गया है। कजिंस को अच्छे वेतन पर रखने की तैयारी कर ली गई है, लेकिन उनके अनुबंध पर तीरंदाजी के कुछ लोगों में रोष है। सूत्र बताते हैं कि 1999 के विश्व चैम्पियन और 2003 के उपविजेता कजिंस भारतीय कम्पाउंड टीम के कोच के लिए इंटरव्यू भी दे चुके हैं।
उनके अनुबंध पर अंतिम फैसला होना बाकी है। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो कजिंस जल्द कम्पाउंड तीरंदाजी टीम के कोच होंगे। हालांकि सूत्र बताते हैं कि कजिंस एक अच्छे कम्पाउंड तीरंदाज तो रहे हैं, लेकिन उनके पास कोचिंग का बड़ा अनुभव नहीं है, जबकि भारतीय कम्पाउंड तीरंदाज इस वक्त दुनिया के शीर्ष तीरंदाजों में शामिल हैं। कजिंस फीटा राउंड का विश्व रिकॉर्ड भी बना चुके हैं।
दिक्कत कम्पाउंड विदेशी कोच की नहीं बल्कि रिकर्व कोच की भी है। बीते वर्ष अप्रैल में कोरियाई मूल के अमेरिकी कोच की सिकली को 20 हजार अमेरिकी डॉलर के भारी-भरकम वेतन पर अनुबंधित करने की तैयारी की गई थी। उन्हें इस वर्ष जनवरी में अनुबंध भी दिया गया, लेकिन वह शर्तों से खुश नजर नहीं आए। उनका अनुबंध अब तक सिरे नहीं चढ़ा है। यही नहीं भारतीय तीरंदाज इस वक्त विश्वकप में खेल रहे हैं, लेकिन रिकर्व और कंपाउंड दोनों टीमों का अब तक चीफ कोच भी नियुक्त नहीं किया गया है।
