मंदिरों के शहर भुवनेश्वर में होगी प्राच्य विरासत पर गहन मंत्रणा

देश-दुनिया के जाने-माने योगाचार्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में लेंगे हिस्सा

योग विभूषण सस्मिता राय भी साझा करेंगी अपने अनुभव

खेलपथ संवाद

भुवनेश्वर। मंदिरों के शहर भुवनेश्वर में 25 अप्रैल को प्राच्य विरासत पर होने जा रहे 19वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-दुनिया के जाने-माने योगाचार्य हिस्सा ले रहे हैं। इंडियन एस्ट्रो वास्तु एंड योगा एकेडमी के प्रयासों से जयदेव यूनिट-2 अशोक नगर भुवनेश्ववर में आयोजित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस सम्मेलन में योग विभूषण सस्मिता राय भी अपने अनुभव साझा करेंगी।

योग विभूषण सस्मिता राय प्राच्य विरासत पर होने जा रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को लेकर न केवल खुश हैं बल्कि कहती हैं कि इससे योग की विरासत को भावी पीढ़ी आसानी से समझ पाएगी। इनका कहना है कि योग की जड़ें भारत में हजारों वर्ष पूर्व से जमी हुई हैं। योग भारतीय सभ्यता की महानतम उपलब्धियों में से एक है, जिसका प्रभाव देश ही नहीं दुनिया भर में फैला हुआ है। इस सम्मेलन में इसी बात पर मंत्रणा होगी।

योग विभूषण सस्मिता राय का कहना है कि प्राचीन ऋषियों ने योग को बाह्य और आंतरिक जगत का अन्वेषण करने, वेदों, शास्त्रों और उपनिषदों के ज्ञान और बुद्धि को प्राप्त करने के साधन के रूप में उपयोग किया, जो आज तक विश्व को विरासत में प्राप्त है। प्राचीन भारतीय ऋषियों ने योग को व्यक्ति के पूर्ण शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूपांतरण के लिए एक व्यावहारिक विधि के रूप में विकसित किया है। भारतीय इतिहास के विभिन्न कालखंडों में योग की उत्पत्ति और इसकी उपयोगिता का जिक्र है।

इंडियन एस्ट्रो वास्तु एंड योगा एकेडमी की प्रबंध निदेशक डॉ. तपस्विनी मिश्रा का कहना है कि भुवनेश्वर में हो रहा यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन कई मायनों में अहम साबित होगा। इस सम्मेलन का शुभारम्भ ओडिशा विधानसभा की स्पीकर सुरमा पाढ़ी करेंगी। इस अवसर पर आचार्य अनिल वत्स, कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन, विधायक सिद्धांता मोहपात्रा, विधायक बाबू सिंह आदि उपस्थित रहेंगे। इंडियन एस्ट्रो वास्तु एंड योगा एकेडमी की जहां तक बात है, यह संस्थान 2005 से ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, योग, टैरो कार्ड और वैदिक विज्ञान में प्रमाणित पाठ्यक्रम तथा परामर्श प्रदान कर रहा है। यह संस्थान पारम्परिक ज्ञान तथा आधुनिक वास्तुकला के संयोजन से एस्ट्रो-वास्तु और व्यावहारिक केस स्टडीज के माध्यम से शिक्षा और समाधान देता है।

डॉ. तपस्विनी मिश्रा कहती हैं कि प्राच्य विरासत का अर्थ है, भारत के प्राचीन ऋषियों द्वारा विकसित पांच हजार साल से अधिक पुरानी आध्यात्मिक, दार्शनिक और शारीरिक प्रणाली। यह भारतीय उपमहाद्वीप से उपजी संस्कृति, वेदों, उपनिषदों और पतंजलि योगसूत्र जैसे ग्रंथों में निहित ज्ञान है, जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन तथा एकता पर केंद्रित है। योग के उन्नयन में हमारे ऋषियों-मुनियों की अथक साधना समाहित है। भारतीय योग को स्वामी विवेकानंद ने लोकप्रिय बनाया और भारत के बाहर भी इसके ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया। योग में फिर से रुचि काफी बढ़ गई है, इसके पीछे कई ठोस कारण हैं। सच कहें तो योग विश्व में व्यक्तिगत विकास का सबसे प्राचीन रूप है,  जो शरीर, मन और आत्मा को समाहित करता है।

 

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