कैंसर के जोखिम को कम कर सकती है स्वस्थ जीवन शैलीः डॉ. उमा शर्मा
जीएल बजाज के संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों को किया कैंसर से जागरूक
मथुरा। कैंसर का मतलब हमेशा मृत्यु नहीं होता, हम सब स्वस्थ जीवन शैली अपनाकर कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं। खूब पानी पिएं, क्योंकि पानी हमारे शरीर से सभी फ्री रेडिकल्स को बाहर निकाल देता है। यह बातें के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर की विशेषज्ञ ऑन्कोलॉजिस्ट और कैंसर सर्जन डॉ. उमा शर्मा ने कैंसर जागरूकता कार्यक्रम में जीएल बजाज ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस मथुरा के संकाय सदस्यों और छात्र-छात्राओं को बताईं।
अतिथि वक्ता डॉ. उमा शर्मा ने बताया कि कैंसर दुनिया की दूसरी सबसे प्रमुख बीमारियों में से एक है। उन्होंने कहा कि वैसे तो कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन 70 वर्ष से कम आयु में मृत्यु का पहला या दूसरा सबसे बड़ा कारण कैंसर ही है। डॉ. शर्मा ने बताया कि पुरुषों में मुख कैंसर, महिलाओं में स्तन और गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर सबसे आम हैं। उन्होंने बताया कि कैंसर के चार अलग-अलग चरण होते हैं। कैंसर होने की कोई निश्चित आयु सीमा नहीं है। अधिकांश प्रकार के कैंसर किसी भी उम्र में हो सकते हैं। तम्बाकू, शराब का सेवन, दीर्घकालिक संक्रमण और मोटापा कैंसर जोखिम के प्रमुख कारक हैं। बुखार, थकान, वजन कम होना, सूजन और दर्द कैंसर के लक्षणों में शामिल हैं।
अतिथि वक्ता डॉ. उमा शर्मा ने स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का खतरा अधिक होता है। स्तन कैंसर के बाद यह महिलाओं में दूसरा सबसे आम प्रकार का कैंसर है। उन्होंने स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के लक्षणों के बारे में भी बताया। डॉ. शर्मा ने कहा कि नियमित व्यायाम, स्तन पान, शराब से परहेज तथा नियमित अंतराल पर स्वयं का परीक्षण कराते रहने से कैंसर को प्रारम्भिक अवस्था में ही पहचाना जा सकता है। डॉ. शर्मा ने बताया कि नियमित शारीरिक व्यायाम, योग और आहार से भी कैंसर का खतरा कम हो सकता है। उन्होंने कहा कि स्क्रीनिंग से कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान की जा सकती है। उन्होंने सभी को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने की सलाह दी।
विशेषज्ञ व्याख्यान के बाद संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने छात्र-छात्राओं से दैनिक जीवन में स्वस्थ आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हम अपने खान-पान में सुधार कर बहुत सी शारीरिक परेशानियों से अपने आपको बचा सकते हैं। प्रो. अवस्थी ने खानपान में फल, सब्जियों, साबूत अनाज और दालों का सेवन करने की सलाह दी। यह जागरूकता कार्यक्रम पहला कदम- द सोशल क्लब के अंतर्गत यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यूज सेल और उन्नत भारत अभियान सेल के सहयोग से आयोजित किया गया, जो सामाजिक उत्तरदायित्व और सामुदायिक कल्याण के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
जागरूकता कार्यक्रम के समापन अवसर पर इंजीनियर ऋचा मिश्रा और प्रो. भोले सिंह ने अतिथि वक्ता डॉ. उमा शर्मा को पौध और स्मृति चिह्न भेंटकर उनका आभार माना। जागरूकता कार्यक्रम की सफलता में अनुप्रयुक्त विज्ञान एवं मानविकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर (डॉ.) राजेश कुमार देवलिया, डॉ. प्रवीण कुमार अग्रवाल, डॉ. तनुश्री गुप्ता आदि का अहम योगदान रहा। कार्यक्रम का सुचारु संचालन लोकेश और महक ने किया। आभार डॉ. राजेश कुमार देवलिया ने माना।
चित्र कैप्शनः संकाय सदस्यों और छात्र-छात्राओं को कैंसर से बचने की जानकारी देतीं विशेषज्ञ ऑन्कोलॉजिस्ट और कैंसर सर्जन डॉ. उमा शर्मा। दूसरे चित्र में अतिथि वक्ता डॉ. उमा शर्मा के साथ संकाय सदस्य और छात्र-छात्राएं।
