हर महीने होगा पुस्तकालय अध्यक्षों के काम का सम्मान
भारत में लाइब्रेरी साइंस के जनक हैं डॉ. शियाली राममृत रंगनाथन
श्रीप्रकाश शुक्ला
मथुरा। राष्ट्रीय खेलपथ के प्रधान सम्पादक श्रीप्रकाश शुक्ला ने देशभर के स्कूल-कॉलेजों के पुस्तकालय अध्यक्षों के काम को मान्यता और पहचान देने के लिए मासिक लाइब्रेरियन पुरस्कार देने का निश्चय किया है। मासिक लाइब्रेरियन सम्मान का मकसद पुस्तकालय को युवा छात्र-छात्राओं की कल्पना और गहन सोच को बढ़ावा देने की क्षमता में विस्तार के मद्देनजर एक स्थान के रूप में विकसित करने के उनके प्रयासों की सराहना करना भी है।
प्रधान सम्पादक श्री शुक्ला ने एक बयान में कहा कि यह पुरस्कार देशभर के उन स्कूल-कॉलेजों, विश्वविद्यालयों के पुस्तकालय अध्यक्षों को सम्मानित करने के लिए स्थापित किया गया है, जो पुस्तकालय में नवीन और मूल कार्यक्रमों के माध्यम से छात्र-छात्राओं में पढ़ने के जुनून और प्यार को बढ़ावा देते हैं। इस पुरस्कार के तहत प्रत्येक विजेता लाइब्रेरियन को रुपये 501 के नकद पारितोषिक के साथ ही प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। सभी पुस्तकालय अध्यक्ष अपनी विस्तृत जानकारी मय फोटो सहित 15 जनवरी तक हमारी ईमेल-shriprakashgwalior1@gmail.com या ह्वाट्सऐप नम्बर-9627038004 पर भेज सकते हैं।
भारत में लाइब्रेरी साइंस के जनक हैं डॉ. शियाली राममृत रंगनाथन
उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद विश्वविद्यालय में वर्ष 1916 से लाइब्रेरी चल रही है। वर्ष 1973 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुस्तकालय को अपना भवन मिल गया। यहां एक बार में तकरीबन 900 विद्यार्थी बैठकर अध्ययन कर सकते हैं। तकरीबन साढ़े सात लाख पुस्तकें हैं। इसके अलावा हजारों की संख्या में ई-जर्नल्स और ई-डाटाबेस तो हैं ही। क्या आपको पता है कि इसके विस्तृत स्वरूप का खाका किसने खींचा था। जी हां, वह थे भारत में लाइब्रेरी साइंस के जनक डॉ. शियाली राममृत रंगनाथन। उन्होंने मार्च 1947 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी की विस्तृत रूपरेखा बनाई थी। वर्ष 1957 से दरभंगा हाल में इसका संचालन शुरू हुआ।
भारत में पुस्तकालय विज्ञान के जनक कहलाने वाले डॉ. शियाली राममृत रंगनाथन का जन्म 12 अगस्त, 1892 को तमिलनाडु के तंजूर जिला स्थित शियाली गांव में हुआ था। इसलिए यह तारीख पुस्तकालय दिवस के रूप में भी मनाई जाती है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भी उनका नाता रहा है। डॉ. शियाली राममृत रंगनाथन मद्रास विश्वविद्यालय के प्रथम पुस्तकालयाध्यक्ष बने। शुरू में उन्हें कार्य रुचिकर लगा लेकिन एक हफ्ते में ही यह काम उन्हें नीरस समझ में आने लगेगा।
अधिकारियों को पता चला तो उन्होंने कहा कि डॉ. शियाली राममृत रंगनाथन लाइब्रेरियनशिप में समकालीन पश्चिमी तौर-तरीकों का अध्ययन करने के लिए लंदन की यात्रा करें, यदि वापस आने पर भी कार्य में मन नहीं लगता है तो उनको बतौर गणित शिक्षक नियुक्ति दे दी जाएगी। लंदन यात्रा के बाद वह लाइब्रेरी उन्नत करने के काम में जुट गए। मद्रास विश्वविद्यालय में 20 साल की सेवाओं के बाद उप कुलपति से उनका विवाद हुआ तो उन्होंने 1945 में स्वैच्छिक रिटायरमेंट ले लिया और शोध में जुट गए।
उनको बनारस विश्वविद्यालय के उप कुलपति एस. राधाकृष्णन ने पुस्तकालय तकनीक और सेवाओं को व्यवस्थित, सुधार और आधुनिकीकरण के लिए निमंत्रित किया। वर्ष 1947 में वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पुस्तकालय के विकास के लिए बनी कमेटी में शामिल हुए। इसी साल मार्च में उन्होंने जो सुझाव दिया, उसके अनुरूप इलाहाबाद विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी तैयार हुई।
