बिहार के शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों को वेतन के लाले
कई महीनों का वेतन लम्बित, डीपीओ बजट आवंटन न होना बता रहे
खेलपथ संवाद
पटना। बिहार के मध्य विद्यालयों में प्रतिनियुक्त शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों का वेतन पिछले कई महीनों से लम्बित है। कई महीनों से वेतन का भुगतान नहीं होने से अनुदेशक गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। इसको लेकर अनुदेशकों ने संबंधित विभाग के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) को आवेदन देकर अपनी समस्या से अवगत कराया कराते हुए जल्द समाधान की मांग की है। डीपीओ बजट न होने की बात कह अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।
आवेदन में अनुदेशकों ने स्पष्ट किया है कि वे नियमित रूप से विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए योग, खेलकूद, शारीरिक प्रशिक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों का संचालन करते हैं। बच्चों में अनुशासन, शारीरिक फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में उनकी अहम भूमिका होती है। इसके बावजूद उन्हें मात्र 16 हजार रुपये का मानदेय मिलता है, वो भी समय पर नहीं मिलने से उनकी परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
अनुदेशकों का कहना है कि कई माह का वेतन लम्बित रहने के कारण उन्हें मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। कई अनुदेशक अपने परिवार की दैनिक आवश्यकताओं, बच्चों की पढ़ाई, घर का किराया और इलाज जैसे जरूरी खर्च पूरे करने में असमर्थ हो रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में शारीरिक शिक्षा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके बावजूद इस वर्ग की लगातार उपेक्षा की जा रही है।
अनुदेशकों ने जिला कार्यक्रम पदाधिकारी से मांग की है कि लम्बित वेतन का शीघ्र भुगतान कराया जाए ताकि वे बिना किसी तनाव के अपने शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन कर सकें और विद्यालयों में बच्चों के हित में अपना कार्य पूरी निष्ठा से जारी रख सकें वहीं इस मामले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी का कहना है कि अनुदेशकों के वेतन का अलॉटमेंट फिलहाल जिले में उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि राज्य स्तर पर अलॉटमेंट की मांग भेज दी गई है। जैसे ही राज्य से राशि प्राप्त होगी, सभी अनुदेशकों का लम्बित वेतन शीघ्र भुगतान कर दिया जाएगा। फिलहाल अनुदेशक प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही उनकी समस्या का समाधान होगा। अगर वेतन भुगतान में और देरी होती है तो इसका सीधा असर न केवल अनुदेशकों पर बल्कि विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
