दिव्या देशमुख ने फिडे महिला विश्व कप फाइनल में कोनेरू हम्पी को ड्रॉ पर रोका

आज दोनों भारतीय बेटियों के बीच टाईब्रेकर से होगा विजेता का फैसला
खेलपथ संवाद
बातुमी (जॉर्जिया)। अंतरराष्ट्रीय मास्टर दिव्या देशमुख ने अपने से ऊंची रैंकिंग वाली ग्रैंडमास्टर और हमवतन कोनेरू हम्पी को फिडे महिला विश्व कप फाइनल के दूसरे गेम में रविवार को कोई मौका दिए बिना ड्रॉ खेलने पर मजबूर किया जिससे विजेता का फैसला अब टाईब्रेकर से होगा। सोमवार को होने वाले टाईब्रेकर में कम अवधि की बाजियों की सीरीज खेली जाएंगी।
फाइनल के पहले गेम में शनिवार को अपनी शानदार शुरुआत का पूरा फायदा उठाने में विफल रही दिव्या ने दूसरी बाजी में काले मोहरों से खेलने के बावजूद बेहतर प्रदर्शन किया। वह इस दौरान अनुभवी हम्पी की हर चाल का माकूल जवाब देने में सफल रही। हम्पी ने अपने एक प्यादे को गंवाने के साथ दिव्या को उलझाकर मैच पर दबदबा बनाने की कोशिश की लेकिन इस दौरान वह अपने दोनों बिशप (ऊंट या वजीर) को गंवा बैठी। इससे युवा भारतीय खिलाड़ी को एक प्यादे के फायदे के साथ वापसी करने का मौका मिल गया।
टाईब्रेकर में कैसे खेला जाएगा मैच?
दोनों खिलाड़ियों ने 34 चालों के बाद मैच को बराबरी पर खत्म करने का फैसला किया। अब टाई-ब्रेकर में 15-15 मिनट के दो गेम होंगे जिसमें हर चाल के बाद 10 सेकेंड का इजाफा होगा। स्कोर इसके बाद फिर भी बराबरी पर रहा तो दोनों खिलाड़ी 10-10 मिनट प्रति गेम के हिसाब से एक और सेट खेलेंगी, जिसमें 10 सेकेंड का इजाफा होगा।
मैच का परिणाम अगर फिर भी नहीं निकला तो पांच-पांच मिनट के दो और गेम होंगे और इसमें हर चाल के बाद तीन सेकेंड की बढ़ोतरी होगी। इसके बाद एक गेम का मुकाबला होगा जिसमें दोनों खिलाड़ियों को तीन मिनट मिलेंगे और दो सेकंड का इजाफा होगा। यह तब तक चलेगा जब तक कोई खिलाड़ी विजेता ना बना जाए।
चीन की झोंगयी टैन और लेई टिंगजी के बीच तीसरे स्थान का प्ले-ऑफ मुकाबला भी ड्रॉ की ओर बढ़ता दिख रहा है। दिव्या ने मुकाबले के बाद प्रसारक से बातचीत के दौरान शनिवार को पहले गेम में की गई गलतियों से परेशान दिखीं। उन्होंने कहा, 'मैं पहले गेम से काफी निराश थी क्योंकि मैं गलत चुनाव कर बैठी थी। पहला गेम मेरे पक्ष में नहीं गया और हालांकि यह ड्रॉ रहा, लेकिन मुझे हार जैसा महसूस हुआ। इसलिए मैं बस उबरने की कोशिश कर रही थी और आज का खेल काफी आसान था।'
गेम पर कैसे ध्यान केंद्रित करती हैं दिव्या?
दिव्या ने कहा, 'मुझे लगता है कि मैं बिना किसी वजह के मुश्किल में पड़ गई। मैं देखना चाहती थी कि जीत होगी या नहीं, लेकिन मैं चूक गई। और मैं उलझन में थी।' यह पूछे जाने पर कि उनके जैसी खिलाड़ी पिछले गेम को भूलकर अगले गेम पर कैसे ध्यान केंद्रित करती हैं तो उन्होंने कहा कि शतरंज जैसे खेल में एक नई सोच के साथ उतरना बेहद जरूरी होता है, वर्ना तुम अगले गेम में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाओगी। मैं बस खुद से कहती हूं कि इसके बारे में दुखी होने के लिए मेरे पास ज़िंदगी भर का समय है। इसलिए आज दुखी मत हो। इसके बारे में बाद में दुखी हो सकते हैं।'
नागपुर की 19 वर्षीय खिलाड़ी सोमवार को खिताब जीतकर ग्रैंडमास्टर बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि वह टाई-ब्रेकर में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करेंगी। दिव्या ने कहा, 'बिलकुल, मुझे लगता है कि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगी। वह (हम्पी) बेशक एक बहुत ही मजबूत खिलाड़ी हैं, लेकिन मुझे उम्मीद है कि चीजें मेरे पक्ष में जाएंगी।'