खेलों में मिसाल बना भदोही का वीर रिंकू सिंह

अब डब्लूडब्लूई में कर रहा कमाल
खेलपथ संवाद
भदोही।
इंसान के इरादे मजबूत हों तो वह कुछ भी कर सकता है। खेल की दुनिया में यही साबित कर रहे हैं भदोही के लाल रिंकू सिंह। द ग्रेट खली के बाद डब्लूडब्लूई में रिंकू सिंह भारत का परचम लहरा रहे हैं। यूपी के भदोही जिले के रहने वाले रिंकू भाला फेंक और बेसबॉल में कमाल करने के बाद इस मुकाम तक पहुंचे हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भाला फेंकने से की थी, लेकिन बेसबॉल के जरिए उन्होंने पैसा कमाया फिर वो डब्लूडब्लूई का रुख किया और अब रेसलिंग के मैदान पर कमाल कर रहे हैं। 
खली के बाद वह दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं, जिन्होंने डब्लूडब्लूई में इतनी लोकप्रियता हासिल की है। रिंकू 2018 से इस खेल में सक्रिय हैं, लेकिन कुछ समय तक ब्रेक लेने के बाद उन्होंने वापसी की और पहले ही मैच में रे मिस्टीरियो और उनके बेटे को जमकर धोया। इसके बाद वो सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बने हुए हैं। रिंकू के लोकप्रिय होने की बड़ी वजह उनका लुक भी है। वो बड़े बाल और बड़ी दाढ़ी के साथ माथे पर तिलक लगाकर रखते हैं। इसके अलावा वो काले कपड़े या भगवा वस्त्र धारण करना पसंद करते हैं। उन्हें देखकर प्रतीत होता है कि वो भगवान शिव के बड़े भक्त हैं। 
रिंकू ने अपने शरीर पर कई टैटू बनवा रखे हैं। इनमें से सबसे खास है उनकी छाती पर बना मां का टैटू। उन्होंने बड़े बड़े अक्षरों में अपनी छाती पर मां लिखवाया है। इस टैटू से उनका व्यक्तित्व और भी आकर्षक बनता है। रिंकू सिंह राजपूत का जन्म आठ अगस्त, 1988 को उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में हुआ था। वह होलपुर गांव के रहने वाले हैं। पेशेवर पहलवान होने के साथ ही वो पूर्व पेशेवर बेसबॉल खिलाड़ी हैं। हाल ही में उन्होंने डब्लूडब्लूई रॉ में डेब्यू किया।
रिंकू सिंह ने 2008 में बेसबाल के टैलेंट हंट शो 'द मिलियन डालर आर्म' में भी हिस्सा लिया। ये था। इसमें रिंकू सिंह को भाला फेंकने के अनुभव का फायदा मिला। उन्होंने इससे पहले कभी बेसबाल नहीं खेला था, लेकिन अपने मजबूत शरीर और रफ्तार के कारण उन्होंने टैलेंट शो जीत लिया था। इसके बाद बेसबाल में करियर बनाने के लिए वो अमेरिका चले गए। उन्होंने 2009 से लेकर 2016 तक दुनियाभर के कई लीग में हिस्सा लिया।
रिंकू सिंह के पिता ब्रह्मदेन सिंह ट्रक चलाते थे। रिंकू के गांव के कुछ लोग भाला फेंकते थे और वो उनके फेंके गए भाले को वापस लाते थे। धीरे-धीरे उन्हीं लोगों के भाले से रिंकू ने भी अभ्यास शुरू किया। कुछ दिन बाद वो उनसे बेहतर करने लगे लोगों ने भाला देने से मना कर दिया। चार भाइयों में सबसे छोटे रिंकू के पास भाला खरीदने के पैसे नहीं थे। उन्होंने ट्रक से निकली एक पुरानी राड को पिघलाकर उसे बांस में डाला और पांच किलो का भाला तैयार किया और उसी से अभ्यास करने लगे। इसके बाद उन्हें भालाफेंक में जूनियर नेशनल में पदक भी मिला।
रिंकू ने 2018 में बेसबाल को छोड़कर रेसलिंग की तरफ ध्यान देना शुरू किया। 2018 में ही डब्ल्यूडब्ल्यूई से जुड़ गए। शुरुआती दौर में रिंकू नाम से ही डब्ल्यूडब्ल्यूई में चर्चित थे। इसके बाद एक टीम बनाई। इसमें उन्होंने अपने दो शाथियों के साथ मिलकर लगातार कई मुकाबले जीते। 2021 में कुछ कारणों से टीम से अलग हो गए। फिर डब्ल्यूडब्ल्यूई के साथ जुड़े। इस बार अपना नाम वीर महान रखा है।
रिंकी की वापसी के बाद डब्लूडब्लूई में कोई भी पहलवान दो मिनट तक उनके सामने नहीं टिक पाया है। वीर महान ने पिछले तीन हफ्तों में तीन रेसलरों को बुरी तरह हराया है। उन्होंने रे मिस्टीरियो के बेटे डामिनिक मिस्टीरियो को 119 सेकेंड, जैफ ब्रु्क्स को 110 सेकेंड और सैम समोथर्स को सिर्फ 36 सेकेंड में ही ढेर कर दिया। रिंकू भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त हैं। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कई फोटो और वीडियो शेयर किए हैं, जिससे यह साफ समझ में आता है कि वो भगवान शिव के भक्त हैं। वो अक्सर शिव की पूजा करते दिखाई देते हैं। भाला फेंक, बेसबाल और पहलवानी में कमाल करने वाले रिंकू को तीरंदाजी का भी शौक है और वो इसमें भी निपुण हैं। उन्होंने इसका भी विडियो शेयर किया है, जिसमें वो अपनी निशानेबाजी का जलवा दिखा रहे हैं। 
 

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