बड़बोले टीम मैनेजर की नासमझी से जीवाजी विश्वविद्यालय शर्मसार

आल इंडिया यूनिवर्सिटी चैम्पियन हॉकी बेटियां निराश

श्रीप्रकाश शुक्ला

ग्वालियर। हर खिलाड़ी का यूनिवर्सिटी खेलों में हिस्सा लेना और पदक जीतना एक सपना होता है लेकिन बिना खेले ही यदि खिलाड़ी या टीम को आयोजन स्थल से वापस लौटना पड़े तो उस पर क्या बीतती होगी इसका अंदाजा सिर्फ और सिर्फ एक खिलाड़ी ही लगा सकता है। बेंगलूरु में चल रहे खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स से जीवाजी विश्वविद्यालय की उन हॉकी बेटियों को बिना खेले वापस लौटना पड़ रहा है, जोकि मौजूदा समय में आल इंडिया यूनिवर्सिटी महिला हॉकी की विजेता हैं। हॉकी बेटियों की निराशा का कारण वे स्वयं नहीं बल्कि उनकी टीम का नासमझ मैनेजर है जोकि 18 सदस्यीय टीम ले जाने की बजाय 14 लड़कियों को लेकर ही बेंगलूरु रवाना हुआ था।

हर ग्वालियरवासी को उम्मीद थी कि जीवाजी विश्वविद्यालय की हॉकी बेटियां इस बार खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स का खिताब जीतकर ही लौटेंगी लेकिन टीम मैनेजर की नासमझी से बेटियों के अरमानों पर पानी फिर गया। जब 25 अप्रैल को उनका मुकाबला यूनिवर्सिटी आफ मैसूर से होना था ऐसे समय में आयोजकों को जैसे ही 14 सदस्यीय टीम की लिस्ट दी गई, उन्होंने नियमों का हवाला देकर मैच कराने से इंकार कर दिया। यही कुछ जीवाजी टीम के साथ 26 अप्रैल को सावित्रीबाई फुले यूनिवर्सिटी पुणे के खिलाफ भी हुआ। यूनिवर्सिटी आफ मैसूर और सावित्रीबाई फुले यूनिवर्सिटी पुणे को आयोजकों ने वाकओवर देते हुए 5-0 के समान अंतर से विजेता घोषित कर दिया।

दरअसल, कोरोना संक्रमण के चलते टीम खेलों में काफी नियम-कायदे बदल चुके हैं। हॉकी इंडिया और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स की आयोजन समिति ने हॉकी में शिरकत करने वाली टीमों के खिलाड़ियों की संख्या 18 कर दी है, इससे पहले टोक्यो ओलम्पिक में यह संख्या 20 थी। हम आपको बता दें, जीवाजी विश्वविद्यालय ने टीम के साथ डॉ. के.के. तिवारी को बतौर मैनेजर भेजा था। बड़बोले तिवारी को हॉकी का ककहरा भी नहीं पता लेकिन वह बीते एक दशक से महिला हॉकी टीमों के साथ बतौर मैनेजर तफरी करने जरूर जाते रहे हैं। यद्यपि इस टीम के साथ नियम विरुद्ध एक ऐसा प्रशिक्षक भेजा गया जिसका यूनिवर्सिटी या किसी कॉलेज से कोई सम्बन्ध नहीं है।

जो भी हो कोच और मैनेजर की नादानी से जीवाजी विश्वविद्यालय की महिला हॉकी टीम को निराशा के बीच बिना मेडल लौटना होगा। इस सम्बन्ध में जब जीवाजी विश्वविद्यालय के खेल प्रभारी प्रो. विवेक बापट से बात की तो उन्होंने टीम के साथ गए मैनेजर, प्रशिक्षक और गुना जिले के ईसागढ़ कॉलेज की महिला स्पोर्ट्स टीचर के नाम बताए। प्रो. बापट ने अफसोस जताते हुए कहा कि जीवाजी विश्वविद्यालय की हॉकी बेटियों का मैदान में न खेल पाना बहुत ही निराशाजनक है। इस मामले में हुई बड़ी चूक को जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अविनाश तिवारी किस तरह लेते हैं, यह देखना हर खेलप्रेमी के लिए दिलचस्प होगा। प्रो. तिवारी पर हॉकी टीम मैनेजर द्वारा राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजे गए ईमेल की जांच करवाना भी जरूरी होगा। आखिर उन्होंने किस अधिकार से राज्यपाल और मुख्यमंत्री को मेल भेजे।              

   

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