लम्बी उम्र ही नहीं स्वस्थ जीवन जरूरी

आओ बीमारियों से मुक्त जीवन का लें संकल्प

खेलपथ संवाद

नई दिल्ली। स्वस्थ राष्ट्र की खातिर केन्द्र और राज्य सरकारें प्रतिवर्ष हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही हैं। लोगों में भी लम्बे जीवन की चाह बढ़ी है। हमारे देश में औसत आयु अब 70 वर्ष के पार पहुंच गई है, लेकिन क्या हम वाकई 'स्वस्थ' जी रहे हैं? आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। एक औसत भारतीय अपने जीवन के आखिरी 10 साल लम्बी बीमारियों से लड़ते हुए बिताता है। 'द लांसेट में प्रकाशित एक स्टडी ने लम्बी उम्र और बीमारियों से मुक्त जीवन के बीच का एक बेहद आसान रास्ता दिखाया है। आइए जानते हैं कैसे हम लम्बा और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने 59 हजार लोगों के डेटा का विश्लेषण कर यह पाया कि नींद, फिजिकल एक्टिविटी और डाइट, ये तीनों मिलकर तय करते हैं कि आप कितने साल स्वस्थ जीवन जिएंगे। अच्छी खबर यह है कि आपको किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है, बल्कि छोटे-छोटे सुधार ही बड़े नतीजे दे सकते हैं। अध्ययन में फिजिकल एक्टिविटी को सबसे जरूरी माना गया है। जो लोग दिन में कम से कम 20-22 मिनट तेज चलते हैं या एक्टिव रहते हैं, उनकी उम्र और सेहत में तेजी से सुधार देखा गया। रोजाना अगर आप सिर्फ 20 मिनट की वॉक या एक्सरसाइज करना शुरू कर देंगे, तो आपको मेटाबॉलिक और दिल के स्वास्थ्य से जुड़े कई फायदे मिलेंगे।

अक्सर लोग केवल डाइट बदलते हैं या सिर्फ जिम जाते हैं, लेकिन नींद की कमी को नजरअंदाज कर देते हैं। स्टडी के अनुसार, सिर्फ एक आदत को ठीक करना काफी नहीं है। रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद हार्मोन को नियंत्रित करती है। खाने में फल, सब्जियां और साबूत अनाज शामिल करना शरीर को मरम्मत की ताकत देता है। रोजाना की सैर ग्लूकोज लेवल और रक्तचाप को नियंत्रित करती है।

हैरानी की बात यह है कि अगर आप अपनी नींद में सिर्फ पांच मिनट का इजाफा, सैर में दो मिनट की बढ़ोतरी और डाइट में थोड़ा सा सुधार एक साथ करते हैं, तो आपकी अनुमानित उम्र और सेहत में एक साल की बढ़ोतरी हो सकती है। सबसे बेहतर लाइफ स्टाइल वाले समूह (7-8 घंटे की नींद, 40 मिनट से ज्यादा एक्सरसाइज और अच्छी डाइट) ने सबसे खराब लाइफ स्टाइल वाले समूह की तुलना में 9 साल ज्यादा लम्बी उम्र और 9 साल ज्यादा बीमारी मुक्त जीवन पाया। इसमें दिल की बीमारियां, कैंसर, टाइप-2 डायबिटीज और डिमेंशिया जैसी बड़ी बीमारियों का खतरा काफी कम हो गया।

हमारे देश में जहां इलाज का खर्च और प्रदूषण बढ़ रहा है, वहां हेल्थ-स्पैन बढ़ाना जरूरी है। इसके लिए आपको अपना जीवन बदलने की जरूरत नहीं है, बस अपनी रात की नींद के लिए आधा घंटा बचाएं, शाम को थोड़ी देर तेज चलें और अपनी थाली में फाइबर बढ़ाएं। ये छोटे और निरंतर सुधार ही आपको बुढ़ापे में आत्मनिर्भर और स्वस्थ रखेंगे।

हेल्दी रहने के लिए डाइट का ख्याल रखना जरूरी

बुजुर्गों की सेहत की चुनौतियां अलग तरह की होती हैं। ऐसे में अगर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, जोड़ों के दर्द जैसी समस्याएं भी हैं तो अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। अन्यथा, ये समस्याएं गम्भीर हो सकती हैं। इस उम्र में कैंसर, हार्ट अटैक, निमोनिया की आशंका अपेक्षाकृत अधिक होती है।

देखने और सुनने की समस्या के साथ भूलने की भी परेशानी हो सकती है। कुछ लोगों को पाचन, किडनी की समस्या, मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होती है। बुजुर्गों में डिमेंशिया का खतरा बना रहता है जो उन्हें परिवार व देखभाल करने वालों पर पूरी तरह निर्भर बना सकता है। ये सभी शारीरिक समस्याएं अपनी जगह हैं। बढ़ते शहरीकरण और परिवार की बदलती संरचना ने बुजुर्गों की मानसिक सेहत को प्रभावित किया है। अपनों के बीच रहकर भी उन्हें अकेलापन और जीवन निरुद्देश्य महसूस होता है। यह उनके शारीरिक सेहत पर दुष्प्रभाव डालता है। इन सभी समस्याओं से निपटना है कि स्वास्थ्य की समय-समय पर जांच कराते रहें, दवाइयां लेते रहें और सबसे जरूरी है कि जीवनशैली को सही रखें।

हड्डियों के घनत्व (बोन डेंस्टिटी) में कमी आ जाती है। टहलते समय सपोर्ट लेकर चलना चाहिए। साथ ही ध्यान रखें कि बाशरूम में फिसलें नहीं, इसके लिए फर्श को सूखा रखें। अगर सही, संतुलित दिनचर्या रखेंगे, तो बुजुर्ग भी सेहतमंद और आनंदमय जीवन जी सकेंगे। बुजुर्गों में हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, जोड़ों की समस्या, मधुमेह और फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं अधिक देखने में आती हैं। हड्डियों के कमजोर होने से उनके गिरने और फ्रैक्चर का जोखिम होता है। इसलिए, बुजुर्गों की मानसिक और शारीरिक सेहत को बनाए रखने के लिए सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है। उन्हें अकेलेपन से बचाना जरूरी है।

मानसिक सक्रियता के लिए दिन में कुछ समय ऐसे कार्य करें जिससे दिमाग की सक्रियता बढ़े। नई भाषा या संगीत यंत्रों को बजाना सीखें, इससे एक्टिव रहेंगे। आनलाइन भुगतान करें और नई तकनीकों के बारे में जानें। बागवानी करें। गमला कहां रखना है, कैसे सजाना है, योजना बनाएं। ध्यान रहे दोनों हाथ से काम करें ताकि दिमाग का दोनों हिस्सा सक्रिय रहे। अकेले न रहें, सामुदायिक कार्यक्रमों में रुचि लें। बच्चों के साथ खेलें और उनके साथ समय बिताएं।

स्वस्थ जीवन के लिए खानपान पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। अतिरिक्त नमक या चीनी से दूरी बनाएं। खानपान में सब्जियां, ताजे फल अधिक लें, शाकाहार अपनाएं। तले-भुने खाद्य पदार्थों के सेवन से दूरी बनाएं। इससे पाचन सही रहेगा। ओवरइटिंग से बचना चाहिए। भूख का 60-70 प्रतिशत ही खाएं। इससे कई समस्याओं से बचे रहेंगे। अल्कोहल, गुटका, धूम्रपान आदि से दूरी बनाएं।

वजन को नियंत्रण में रखें, ताकि गैरसंचारी बीमारियों का जोखिम कम से कम हो। पोषण के लिए भोजन में विटामिंस और मिनरल्स की पर्याप्त मात्रा रखें, चिकित्सक से जरूरी सलाह लें। अगर डायबिटीज, ब्लडप्रेशर की समस्या है तो चिकित्सक के परामर्श से दिनचर्या का नियम बनाएं। प्रतिदिन आधा घंटा टहलें। ब्रिस्क वॉक या जितना आप कर सकते हैं, जरूर करें। योग व कसरत के लिए आधा घंटा दें। रेजिस्टेंस, बैलेसिंग एक्सरसाइज से भी लाभ मिलेगा। नृत्य करना, तैरना आदि पसंद है तो जरूर प्रयास करना चाहिए।

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