एशियाई खेलों से शीर्ष महिला टेनिस खिलाड़ी बाहर

सहजा यमलापल्ली ने कहा- मैं बहुत हैरान और निराश हूं

खेलपथ संवाद

नई दिल्ली। भारत की शीर्ष महिला एकल टेनिस खिलाड़ी सहजा यमलापल्ली, वैष्णवी अडकर और वैदेही चौधरी को एशियाई खेलों की टेनिस टीम से बाहर कर दिया गया है। सरकार द्वारा खिलाड़ियों की सूची में कटौती किए जाने के बाद भारत की शीर्ष महिला एकल खिलाड़ी टीम में जगह नहीं बना सकीं और इस अवसर से वंचित किए जाने से सहजा 'बहुत हैरान' हैं।

सरकार की ओर से 22 अगस्त को जारी अंतिम मंजूरी आदेश में आइची-नागोया एशियाई खेलों के लिए 35 खेलों में 492 खिलाड़ियों को मंजूरी दी गई है लेकिन अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) की टेनिस के लिए चुने गए सभी खिलाड़ियों को शामिल करने की मांग स्वीकार नहीं की गई। एआईटीए ने मूल रूप से 12 सदस्यीय टेनिस टीम का प्रस्ताव भेजा था जिसमें छह महिला खिलाड़ी शामिल थीं लेकिन अंतिम सूची में खिलाड़ियों की संख्या घटाकर सात कर दी गई। महिला खिलाड़ियों में केवल अंकिता रैना और रुतुजा भोसले को जगह मिली है।

प्रार्थना थोम्बारे और पुरुष एकल के उभरते खिलाड़ी मानस धामने को भी टीम से बाहर रखा गया है। एशियाई खेल 19 सितम्बर से चार अक्टूबर तक आइची-नागोया में होने हैं। सहजा भारत की नम्बर एक महिला एकल खिलाड़ी हैं और डब्ल्यूटीए रैंकिंग में 344वें स्थान पर हैं। उनके बाद वैष्णवी 390वें और वैदेही 437वें स्थान पर हैं। नीदरलैंड में डब्ल्यूटीए प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहीं सहजा ने कहा, ''यह सुनकर मैं बेहद हैरान और निराश हूं। मैं एशियाई खेलों में हिस्सा लेने को लेकर काफी उत्साहित थी।''

उन्होंने कहा, ''ऐसे कई उदाहरण हैं जब कमजोर माने जाने वाले खिलाड़ियों ने शीर्ष खिलाड़ियों को हराकर पदक और टूर्नामेंट जीते हैं क्योंकि वहां परिस्थितियां अलग होती हैं। कौन जानता है, शायद यह फैसला सही नहीं है। अगर हम यह कहें कि मैं तभी खेलूंगी जब मैं वरीयता प्राप्त खिलाड़ी हूं तो फिर वहां जाने का क्या मतलब है? आखिर टेनिस खेलने का मतलब ही क्या है?'' एआईटीए ने तीन जुलाई को भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) से सहजा को टीम में शामिल करने का विशेष रूप से समर्थन किया था। एआईटीए ने उनके भारत की सर्वोच्च रैंकिंग वाली महिला एकल खिलाड़ी होने और आईटीएफ तथा डब्ल्यूटीए प्रतियोगिताओं में ऊंची रैंकिंग वाले खिलाड़ियों के खिलाफ उनके हालिया अच्छे प्रदर्शन का भी उल्लेख किया था।

एआईटीए ने वैष्णवी के एफआईएसयू विश्व विश्वविद्यालय खेलों में कांस्य पदक और वैदेही के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छे प्रदर्शन का भी हवाला दिया था। सहजा ने कहा, ''खिलाड़ियों पर भरोसा रखिए क्योंकि हमें खुद पर भरोसा है। ग्रैंड स्लैम में भी क्वालीफायर खिलाड़ी आगे तक पहुंच रहे हैं और इतिहास रच रहे हैं। यही तो खेल का मजा है।'' इन तीनों महिला एकल खिलाड़ियों के बाहर होने से एशियाई खेलों में इस वर्ग में भारत का संभवत: कोई प्रतिनिधित्व नहीं हो। अगर अंकिता को बाद में एकल में उतारा भी जाता है तो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के मुख्य दौर में जगह बनाने में उनके हालिया संघर्ष को देखते हुए भारत की पदक की उम्मीदें सीमित रह सकती हैं।

एआईटीए के अंतरिम महासचिव सुंदर अय्यर ने कहा, ''हमने सभी चयनित खिलाड़ियों को भेजने के लिए अधिकारियों को समझाने की पूरी कोशिश की लेकिन वे एशिया के केवल शीर्ष आठ खिलाड़ियों को भेजने के मानदंड का हवाला दे रहे हैं। यह निराशाजनक है लेकिन सभी खेलों के लिए मानदंड समान हैं।'' एआईटीए ने अपनी सबसे मजबूत टीम भेजने के पक्ष में व्यापक तर्क दिया था। संघ का कहना था कि एशियाई खेलों में टेनिस में पांच अलग-अलग पदक स्पर्धाएं होती हैं और एकल, युगल तथा मिश्रित युगल की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखकर चयन किया जाना चाहिए।

रिलेटेड पोस्ट्स