योग और वास्तु शास्त्र भारतीय संस्कृति की दुर्लभ विरासत
भुवनेश्वर में हुआ प्राच्य विरासत पर 19वां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
सम्मेलन में चार छात्रों को पीएचडी तो पांच छात्रों को मिले स्वर्ण पदक
खेलपथ संवाद
भुवनेश्वर। मंदिरों के शहर भुवनेश्वर में प्राच्य विरासत पर आयोजित 19वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में योगाचार्यों और ज्योतिषाचार्यों ने योग और वास्तु शास्त्र को जीवन का महत्वपूर्ण कारक बताया। भारतीय वास्तु अकादमी द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विद्वतजनों ने कहा कि योग और वास्तु शास्त्र भारतीय संस्कृति के दो ऐसे स्तम्भ हैं, जो मानव जीवन में शारीरिक, मानसिक और पर्यावरणीय संतुलन स्थापित करते हैं। ये दोनों प्रणालियां मिलकर व्यक्ति को न केवल स्वस्थ रखती हैं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण जीवन जीने में मदद करती हैं।
भारतीय वास्तु अकादमी द्वारा जयदेव भवन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ओडिशा विधानसभा की अध्यक्ष सुरमा पाधी, विधि मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन, प्रसिद्ध ज्योतिषी अनिल भट्ट, योग शिरोमणि सस्मिता रॉय और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। जाने-माने ज्योतिषाचार्यों तथा योगाचार्यों ने योग और वास्तु शास्त्र को जीवन का महत्वपूर्ण कारक बताया। सभी ने माना कि योग और वास्तु भारत की दुर्लभ विरासत हैं।
सम्मेलन में बताया गया कि योग जहां शरीर और मन के भीतर संतुलन बनाता है, वहीं वास्तु शास्त्र बाहरी वातावरण (घर-कार्यालय) में संतुलन लाता है। ये दोनों मिलकर स्वस्थ, सुखी और ऊर्जावान जीवन का आधार तैयार करते हैं। योग शिरोमणि सस्मिता रॉय ने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए एक समग्र विज्ञान है। उन्होंने कहा कि योग आसन शरीर को लचीला, मजबूत और जोड़ों को स्वस्थ रखते हैं। योग रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है तथा तनाव व थकान को दूर करता है। उन्होंने कहा कि नियमित योग से मानसिक स्पष्टता, शांति और एकाग्रता बढ़ती है। यह तनाव और चिंताओं को कम कर बेहतर नींद में सहायक है। योग शरीर और मन के बीच सामंजस्य स्थापित करता है, जिससे व्यक्ति अधिक संतुलित और सुखमय जीवन जी सकता है।
प्रसिद्ध ज्योतिषी अनिल भट्ट ने जीवन में वास्तु शास्त्र को बहुत उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि वास्तु शास्त्र हमारे आस-पास के वातावरण को प्रकृति के पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) के साथ संतुलित करता है, जिससे जीवन में समृद्धि और शांति आती है। श्री भट्ट ने कहा कि सही वास्तु सिद्धांतों के अनुसार बना घर या कार्यालय सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। उन्होंने कहा कि वास्तु के अनुसार व्यवस्थित स्थान मानसिक स्पष्टता और कार्यक्षमता को बढ़ाता है। ज्योतिषी अनिल भट्ट ने योग और वास्तु का संयोजन करते हुए कहा कि जब योग का अभ्यास वास्तु-अनुकूल स्थान पर किया जाता है, तो इसके लाभ दोगुने हो जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ओडिशा और देश के अन्य राज्यों से सौ से अधिक ज्योतिषियों ने सहभागिता की।
भारतीय वास्तु अकादमी की प्रबंध निदेशक डॉ. तपस्विनी मिश्रा ने गणमान्यों का स्वागत करते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भुवनेश्वर ही नहीं समूचे राष्ट्र के लिए ऐतिहासिक पल है। सम्मेलन में चार छात्रों को पीएचडी की उपाधि तथा पांच छात्रों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। योग, ज्योतिष, वास्तु विज्ञान, रेकी आदि विषयों में उत्तीर्ण होने वाले 77 अन्य छात्रों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। भारतीय वास्तु अकादमी ओडिशा का एक प्रमुख संस्थान है जिसकी स्थापना 2007 में हुई थी। यहां छात्रों को विभिन्न पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का संचालन करते हुए डॉ. तपस्विनी मिश्रा ने कहा कि मौजूदा दौर में युवा पीढ़ी योग, ज्योतिष, वास्तु विज्ञान, रेकी आदि विषयों के पाठ्यक्रम पूरा कर नौकरी हासिल कर सकती है। स्वयं का काम भी किया जा सकता है। डॉ. तपस्विनी मिश्रा ने सम्मेलन की सफलता के लिए सभी का आभार माना।
