काश हर खेलगुरू को मिले अर्जुन जैसा शिष्य
ग्वालियर के हॉकी सितारे ने पेश की नजीर
जब प्रशिक्षक का होगा सम्मान, तभी खेलेगा हिन्दुस्तान
श्रीप्रकाश शुक्ला
ग्वालियर। बचपन से पढ़ते और सुनते आ रहे थे कि खेल सद्भाव का सूचक होते हैं, लेकिन खेल मैदानों की खाक छानने के बाद पता चला कि खेलों के उत्थान और खिलाड़ियों के संस्कार को लेकर जो लिखा जा रहा है, वह सही नहीं है। हमारी सरकारें ही नहीं खिलाड़ी भी मतलबी यार हैं। जिन शिष्यों को लेकर खेलगुरू बड़े-बड़े सपने देखते हैं, रात को सो नहीं पाते, वही शिष्य कामयाबी के रथ पर चढ़ते ही उन्हें भूल जाते हैं। अर्जुन शर्मा जैसे शिष्य तो सौभाग्य से मिलते हैं।
सच कहें तो खेल पत्रकारिता के लम्बे दौर में अधिकांशतः फूलों से लदे खेलों के सत्यानाशी या फिर खिलाड़ियों का विजयोल्लास ही देखा है। नजर नहीं आता कि खिलाड़ियों के साथ कभी प्रशिक्षक भी सम्मानित किए जाते हों। खिलाड़ी भी अपने खेलगुरू से तब तक ही सरोकार रखता है, जब तक कि उसका मतलब नहीं निकल जाता। हॉकी के जमीनी सुयोग्य प्रशिक्षकों में ग्वालियर के अविनाश भटनागर की कर्मठता और उपलब्धियां किसी सम्मान की मोहताज नहीं हैं।
श्री भटनागर की जहां तक बात है, इनको मैंने धूल में फूल खिलाते देखा है। बुधवार को भारतीय रेलवे में टिकट निरीक्षक के पद पर कार्यरत राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी अर्जुन शर्मा ने उस दर्पण मैदान पर अपने उस गुरू को सम्मानित किया जिसने उसे हॉकी का ककहरा और जीत का मंत्र सिखाया। ग्वालियर में हॉकी का अर्जुन यह नाम मैं नहीं भूल सकता। अर्जुन बचपन से ही बेजोड़ खिलाड़ी रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी में हासिल उसकी उपलब्धियों का ही नतीजा है कि वह आज भारतीय रेलवे में सेवारत है।
मध्य प्रदेश के सभी हॉकी फीडर सेण्टरों में दर्पण फीडर सेण्टर सर्वश्रेष्ठ है। यह दुखद है कि प्रदेश को कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी देने वाले इस मैदान की बदहाली को अब तक मध्य प्रदेश का अरबों रुपये का खेल बजट भी दूर नहीं कर सका है। हॉकी खेल को पूरी तरह से समर्पित अविनाश भटनागर अर्जुन शर्मा के सम्मान से आनंदित हैं। श्री भटनागर का कहना है कि 28 साल में अर्जुन शर्मा से सम्मान स्वरूप जो स्पोर्ट्स टी-शर्ट मिली है, वह अमूल्य है।
श्री भटनागर ने व्यथित मन से कहा कि मैंने प्रशिक्षक बतौर प्रदेश और ग्वालियर के लिए कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार किए, जोकि आज विभिन्न विभागों में खेल कोटे के तहत नौकरी कर रहे हैं, उन सभी में अर्जुन शर्मा एकमात्र ऐसा संस्कारवान खिलाड़ी है जिसने गुरु का सम्मान कर उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। अर्जुन शर्मा ने जो किया, उसी तरह अन्य कामयाब खिलाड़ियों को भी अपने प्रशिक्षकों की झोली खुशियों से आबाद करनी चाहिए। जब प्रशिक्षक का होगा सम्मान, तभी खेलेगा हिन्दुस्तान।
