टी20 विश्व कप में खेलेंगे भारतीय मूल के 40 खिलाड़ी

घर में खेलेंगे, पर कहलाएंगे मेहमान, इन पर रहेंगी नजरें

खेलपथ संवाद

नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में एक दिलचस्प और भावनात्मक पहलू यह होगा कि 20 टीमों में 40 भारतीय मूल के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। ये वो खिलाड़ी हैं, जिन्होंने कभी भारत के लिए खेलने का सपना देखा था, लेकिन कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते उन्हें दूसरे देशों का प्रतिनिधित्व करना पड़ा। अब वही खिलाड़ी विश्व कप जैसे मंच पर अपनी पहचान बना रहे हैं, बस जर्सी अलग है।

इस सूची में कनाडा सबसे ऊपर है, जहां 11 भारतीय मूल के खिलाड़ी शामिल हैं। इसके बाद अमेरिका (9), जबकि ओमान और यूएई में सात-सात खिलाड़ी हैं। इसके अलावा न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज, इटली और नीदरलैंड्स की टीमों में भी भारतीय जड़ें रखने वाले खिलाड़ी नजर आएंगे।

अमेरिका के कप्तान मोनांक पटेल, जो गुजरात अंडर-19 के लिए खेल चुके हैं, इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल हैं। उन्होंने कहा, 'यह हमारे कई खिलाड़ियों के लिए सपना पूरा होने जैसा है। भारत में अमेरिका के लिए खेलना अलग अनुभव है, लेकिन यह फैसला मेरे लिए सही साबित हुआ।' वहीं, इटली की ओर से खेलने वाले जसप्रीत सिंह, जो फगवाड़ा में जन्मे हैं, ने कभी अंतरराष्ट्रीय मैदानों पर खेलने का सपना देखा था। कभी जीवन यापन के लिए उबर चलाने वाले जसप्रीत आज विश्व कप में खेल रहे हैं, वह भी भारत में।

अमेरिका के तेज गेंदबाज सौरभ नेत्रवलकर जैसे कई खिलाड़ी आज भी प्रोफेशनल नौकरी करते हैं। नेत्रवलकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और छुट्टियां लेकर क्रिकेट खेलते रहे हैं। उन्होंने पिछले विश्व कप में रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों को आउट किया था। ओमान के डिप्टी कोच सुलक्षण कुलकर्णी का मानना है, 'जब खिलाड़ियों को समझ आता है कि भारत में मौका मिलना कितना मुश्किल है, तो वे बाहर के विकल्प तलाशते हैं। अब यह समझ और जल्दी आ रही है।'

टी20 वर्ल्ड कप 2026 सिर्फ ट्रॉफी की लड़ाई नहीं, बल्कि उन भारतीय मूल के खिलाड़ियों के सपनों का मंच है, जिन्हें भारत में मौका नहीं मिला। विदेशी टीमों के रंग में रंगे ये खिलाड़ी विश्व क्रिकेट के बदलते स्वरूप और भारतीय क्रिकेट की गहराई, दोनों की कहानी कहते हैं। मेजबान भारत जहां खिताब बचाने उतरेगा, वहीं कई टीमें भारतीय मूल के खिलाड़ियों के दम पर इतिहास रचने की कोशिश करेंगी। आइए उन छह भारतीय मूल के खिलाड़ियों पर नजर डालते हैं, जिन पर सबसे ज्यादा नजरें होंगी।

सौरभ नेत्रवलकर: गोल चक्कर में घूमी जिंदगी

मुंबई में जन्मे सौरभ नेत्रवलकर के लिए सात फरवरी को वानखेड़े स्टेडियम में भारत के खिलाफ उतरना एक असाधारण क्षण होगा। भारत के लिए अंडर-19 खेलने के बाद अमेरिका चले गए नेत्रवलकर ने कभी नहीं सोचा था कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करेंगे, वह भी भारत के खिलाफ। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता कि वहां मैं कैसे प्रतिक्रिया दूंगा, लेकिन यह निश्चित रूप से भावनात्मक पल होगा।

यह मेरे लिए एक फुल सर्कल जैसा है, क्योंकि मैंने क्रिकेट मुंबई में शुरू किया, फिर खेल छोड़ दिया, अमेरिका चला गया और कभी सोचा भी नहीं था कि दोबारा क्रिकेट खेलूंगा।' 34 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर-कम-क्रिकेटर ने 2024 टी20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान जैसी टीम को हराकर अमेरिका को सुपर-8 तक पहुंचाया था।

मोनांक पटेल: भारत के खिलाफ करेंगे कप्तानी

आनंद (गुजरात) में जन्मे मोनांक पटेल अमेरिका की कप्तानी करते हुए भारत के खिलाफ उतरेंगे। यह मुकाबला उनके लिए इसलिए भी खास होगा क्योंकि सामने उनके गुजरात अंडर-19 के साथी जसप्रीत बुमराह होंगे। मोनांक ने कहा, 'हमने रेड बॉल और व्हाइट बॉल दोनों क्रिकेट साथ खेला। तब भी हमें पता था कि जसप्रीत में एक्स-फैक्टर है और वह कुछ बड़ा करेगा।' 32 वर्षीय मोनांक पहले ही पाकिस्तान के खिलाफ विश्व कप में मैच जिताऊ अर्धशतक खेल चुके हैं।

जतिंदर सिंह: सपना अधूरा रह जाने की टीस

लुधियाना में जन्मे जतिंदर सिंह, ओमान के कप्तान हैं। 36 साल के करियर में उन्हें कभी भारत में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला। इस बार भी ओमान के सभी लीग मैच श्रीलंका में होने हैं, जिससे उनका यह सपना शायद अधूरा ही रह जाए। हालांकि, अगर टीम सुपर-8 के लिए क्वालिफाई करने में कामयाब रहती है तो उनका सपना पूरा हो जाएगा।

जसप्रीत सिंह: इटली की ओर से खेलेंगे विश्व कप

फगवाड़ा (पंजाब) में जन्मे जसप्रीत सिंह इटली की ओर से टी20 वर्ल्ड कप में खेलेंगे। 2006 में परिवार के साथ इटली गए जसप्रीत ने टेप-बॉल क्रिकेट से शुरुआत की और 2019 में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। कभी उबर ड्राइवर के तौर पर गुजारा करने वाले जसप्रीत के लिए यह टूर्नामेंट एक सपना पूरा होने जैसा है, वह भी भारत में।

आर्यन दत्त: नीदरलैंड का अकेला भारतीय मूल का सितारा

नीदरलैंड के ऑफ-स्पिनर आर्यन दत्त 2023 वनडे वर्ल्ड कप में भारतीय दर्शकों के सामने खेल चुके हैं। पंजाब से जुड़े पारिवारिक रिश्तों वाले आर्यन इस बार टी20 फॉर्मेट में बड़ी टीमों को चौंकाने की कोशिश करेंगे।

दिलप्रीत बाजवा: संघर्ष से कप्तानी तक

गुरदासपुर में जन्मे दिलप्रीत बाजवा 2020 में कनाडा चले गए। पंजाब में उम्र-समूह क्रिकेट में रन बनाने के बावजूद मौके नहीं मिले, लेकिन कनाडा में उन्हें नई शुरुआत मिली। 23 वर्षीय बाजवा आज कनाडा के कप्तान हैं और अपने जन्मस्थान में विश्व कप खेलना उनके लिए खुशी और टीस, दोनों लेकर आया है। यह विश्व कप साफ दिखाता है कि क्रिकेट अब सिर्फ पारंपरिक देशों तक सीमित नहीं है। भारतीय प्रवासी खिलाड़ियों ने अमेरिका, कनाडा, यूरोप और मिडिल ईस्ट में क्रिकेट को नई पहचान दी है।

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